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भक्त की भक्ति के आगे झुक जाते हैं भगवान : साध्वी शांत योगानंद
Fri, 27 Sep 2024 09:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 27 Sep 2024 09:26 PM IST
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फतेहाबाद। पितृ पक्ष के अवसर पर संत कंवलानंद के सान्निध्य में श्रीयोग अनुभव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथावाचक साध्वी शांत योगानंद ने भगवान के भक्त ध्रुव-प्रह्लाद, श्रीनरसिंह अवतार एवं कपिल देवहूति संवाद का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान भक्त की भक्ति के आगे झुक जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा एक ऐसा अमृत है, जिसका जितना भी पान किया जाए, उतना ही मन तृप्त नहीं होता। प्यास और बढ़ती जाती है। हिरण्यकश्यप नामक दैत्य ने घोर तप करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और वरदान मांगा कि न दिन में मरू ना रात में, आपके बनाए बारह मासों में भी मेरी मृत्यु न हो क्योंकि वह अमर होना चाहता था। हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे और हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को शत्रु मानते थे।
उन्होंने जब पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए प्रहार किया तभी खंभा फट गया और उस खंभे से भगवान ने नरसिंह रूप में प्रकट होकर प्रह्लाद की रक्षा की। उन्होंने कहा कि जब भक्त का दृढ़ विश्वास होता है तो भगवान भी भक्त की भक्ति के आगे झुक जाते हैं। धरा पर जब अधर्म, पापाचार, दुराचार बढ़ता है, तब भगवान को भिन्न-भिन्न रूपों में आना पड़ता है। इसी दौरान कथा के मध्य भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
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कृष्ण जन्म का प्रसंग शुरू होते ही पंडाल में उपस्थित श्रोता नंद के आनंद भयो-जय कन्हैया लाल की के जयघोष करते नजर आए। कृष्ण जन्म की खुशी में लड्डू, खिलौने और माखन-मिश्री का प्रसाद भी वितरित किया गया। इस मौके पर नरेश मदान, दिनेश नारंग, नरेंद्र गाबा, लक्ष्मण दास, हीरालाल ग्रोवर, पंकज सरदाना सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि भागवत कथा एक ऐसा अमृत है, जिसका जितना भी पान किया जाए, उतना ही मन तृप्त नहीं होता। प्यास और बढ़ती जाती है। हिरण्यकश्यप नामक दैत्य ने घोर तप करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और वरदान मांगा कि न दिन में मरू ना रात में, आपके बनाए बारह मासों में भी मेरी मृत्यु न हो क्योंकि वह अमर होना चाहता था। हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे और हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को शत्रु मानते थे।
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उन्होंने जब पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए प्रहार किया तभी खंभा फट गया और उस खंभे से भगवान ने नरसिंह रूप में प्रकट होकर प्रह्लाद की रक्षा की। उन्होंने कहा कि जब भक्त का दृढ़ विश्वास होता है तो भगवान भी भक्त की भक्ति के आगे झुक जाते हैं। धरा पर जब अधर्म, पापाचार, दुराचार बढ़ता है, तब भगवान को भिन्न-भिन्न रूपों में आना पड़ता है। इसी दौरान कथा के मध्य भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
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कृष्ण जन्म का प्रसंग शुरू होते ही पंडाल में उपस्थित श्रोता नंद के आनंद भयो-जय कन्हैया लाल की के जयघोष करते नजर आए। कृष्ण जन्म की खुशी में लड्डू, खिलौने और माखन-मिश्री का प्रसाद भी वितरित किया गया। इस मौके पर नरेश मदान, दिनेश नारंग, नरेंद्र गाबा, लक्ष्मण दास, हीरालाल ग्रोवर, पंकज सरदाना सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।