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लॉकडाउन में दुकानें खोलने की तरकीब खोज रहे दुकानदार
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सरकार ने लॉकडाउन के बीच कुछ दुकानदारों को छूट दी हुई है। इनमें किराना दुकानदार, दूध विक्रेता, कन्फेक्शनरी, बेकरी व कृषि यंत्रों की दुकानें शामिल हैं। अब बाकी बचे दुकानदार तरकीब लगा रहे हैं कि वे छूट के दायरे में कैसे आएं। इसलिए कइयों ने तरीका अपना भी लिया है। शहर में जो दुकानदार पाइप, टूल्स, रंग रोगन, स्पेयर पार्ट्स, फर्नीचर के औजार बेचते हैं। उन दुकानदारों ने अब कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाला सामान भी साथ रखना शुरू कर दिया है, क्योंकि कृषि कार्यों से संबंधित दुकानों को खोलने अनुमति है। ये दुकानदार अब कृषि से संबंधित सामान बाहर ही रख देते हैं ताकि कोई अधिकारी भी आपत्ति न जता पाए।
कई जगहों पर दुकानदारों ने दुकानों के बाहर लगे बोर्ड ही बदल दिए हैं। मिठाई बेचने वालों ने दूध का काम शुरू कर लिया है ताकि दूध विक्रेता होने की छूट का लाभ ले सकें। कई दुकानदारों ने बोर्ड ही हटा दिए हैं ताकि किसी की नजर न पड़े। जनरल स्टोर को दुकानें खोलने की अनुमति नहीं है। इसलिए कई दुकानदार अपनी दुकान के बाहर भुजिया आदि के पैकेट टांग देते हैं ताकि दूर से किराना शॉप या कन्फेक्शनरी नजर आए। अंदर अन्य सामान भी साथ बेचा जा रहा है। इस तरह फायदे उठाए जा रहे हैं। फिलहाल कपड़े व जूतों की दुकानें पूरी तरह बंद हैं।
बाजार में नहीं दिखता लॉकडाउन का असर
शहर के मुख्य बाजार में लॉकडाउन नजर आता है, जहां पर कपड़े व गारमेंट आदि की दुकानें हैं। वे दुकानें बंद होने के कारण पता चलता है कि लॉकडाउन है। मगर बाजारों में ट्रैफिक देखकर नहीं लगता कि लॉकडाउन है। रोजाना उतने ही वाहन होते हैं, जितने सामान्य हालातों में होते हैं। खासकर, फतेहाबाद में बस स्टैंड से भूना मोड़ तक लगता ही नहीं है कि लॉकडाउन है।
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कोट
जिले में चाहे दुकानदार हैं या आग नागरिक, महामारी सभी के लिए समान रूप से खतरनाक है। जन की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। घर से बाहर तभी जाएं, जब बहुत ज्यादा जरूरी हो। इस महामारी को हल्के में न लें।
- डॉ. नरहरि सिंह बांगड़, उपायुक्त।
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कई जगहों पर दुकानदारों ने दुकानों के बाहर लगे बोर्ड ही बदल दिए हैं। मिठाई बेचने वालों ने दूध का काम शुरू कर लिया है ताकि दूध विक्रेता होने की छूट का लाभ ले सकें। कई दुकानदारों ने बोर्ड ही हटा दिए हैं ताकि किसी की नजर न पड़े। जनरल स्टोर को दुकानें खोलने की अनुमति नहीं है। इसलिए कई दुकानदार अपनी दुकान के बाहर भुजिया आदि के पैकेट टांग देते हैं ताकि दूर से किराना शॉप या कन्फेक्शनरी नजर आए। अंदर अन्य सामान भी साथ बेचा जा रहा है। इस तरह फायदे उठाए जा रहे हैं। फिलहाल कपड़े व जूतों की दुकानें पूरी तरह बंद हैं।
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बाजार में नहीं दिखता लॉकडाउन का असर
शहर के मुख्य बाजार में लॉकडाउन नजर आता है, जहां पर कपड़े व गारमेंट आदि की दुकानें हैं। वे दुकानें बंद होने के कारण पता चलता है कि लॉकडाउन है। मगर बाजारों में ट्रैफिक देखकर नहीं लगता कि लॉकडाउन है। रोजाना उतने ही वाहन होते हैं, जितने सामान्य हालातों में होते हैं। खासकर, फतेहाबाद में बस स्टैंड से भूना मोड़ तक लगता ही नहीं है कि लॉकडाउन है।
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कोट
जिले में चाहे दुकानदार हैं या आग नागरिक, महामारी सभी के लिए समान रूप से खतरनाक है। जन की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। घर से बाहर तभी जाएं, जब बहुत ज्यादा जरूरी हो। इस महामारी को हल्के में न लें।
- डॉ. नरहरि सिंह बांगड़, उपायुक्त।