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Fatehabad News: कचरा प्रबंधन के लिए शहर में घर-घर पहुंच रहे स्वयं सहायता समूह के सदस्य
Sun, 23 Nov 2025 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 23 Nov 2025 11:17 PM IST
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फतेहाबाद के माडल टाउन एरिया में लोगों को समझाने के बाद घर को चिह्नित करती स्वयं सहायता समूह की
फतेहाबाद। मॉडल टाउन को स्वच्छ और व्यवस्थित क्षेत्र बनाने की दिशा में नगर परिषद ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब कचरा प्रबंधन के लिए घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं।
नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार, मॉडल टाउन को जीरो वेस्ट वार्ड घोषित किया जा चुका है। इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए महिलाओं की जिम्मेदारी तय करते हुए पूरे वार्ड में नियमित जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। महिलाओं की टीम सुबह से ही गलियों में उतरकर लोगों को सूखा-गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा करने, एकल उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग कम करने और कचरा वाहन में डालने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
नगर परिषद का मानना है कि लोगों के व्यवहार में बदलाव लाए बिना कचरा प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत नहीं की जा सकती। इसी कारण स्वयं सहायता समूहों को इस अभियान की कमान सौंपी गई है। अधिकारी बताते हैं कि कचरे की मात्रा कम करने और उसे सही तरीके से विभाजित कर निपटान करने के लिए घर-घर जागरूकता सबसे कारगर उपाय है।
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यही वजह है कि महिलाओं की ड्यूटी तय कर उन्हें नियमित रूप से फीडबैक देने और क्षेत्र में आने वाली समस्याओं की रिपोर्ट करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि महिलाओं के इस अभियान का असर पहले दिन से दिखाई देना शुरू हो गया है। कई घरों में लोग कचरा अलग-अलग जमा करने लगे हैं, जिससे सफाई कर्मियों का काम भी आसान हुआ है।
नगर परिषद का दावा है कि यदि इसी तरह सहयोग मिलता रहा तो मॉडल टाउन को पूरी तरह जीरो वेस्ट वार्ड बनाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। अधिकारी बताते हैं कि आगे इस मॉडल को शहर के अन्य वार्डों में भी लागू किया जाएगा।
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स्वयं सहायता समूह की दस महिलाओं को सौंपी गई है जिम्मेदारी
नगर परिषद प्रशासन ने जीरो वेस्ट क्षेत्र का लक्ष्य हासिल करने के लिए स्वयं सहायता समूह की दस महिलाओं को जिम्मेदारी सौंपी है। इन महिलाओं को नगर परिषद की ओर से भुगतान किया जाएगा। अगले माह से जब डोर टू डोर कचरा उठान का काम पूर्ण स्तर पर शुरू हो जाएगा, उस समय कचरा उठान का ठेका लेने वाली कंपनी ही इन महिलाओं को भुगतान करेगी। हालांकि नप प्रशासन ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि इस स्वयं सहायता समूह को कितना भुगतान किया जाएगा।
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गीले-सूखे कचरे के बारे में कर रहीं जागरूक
स्वच्छ भारत मिशन के इंचार्ज कुमार सौरभ ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की जिन दस महिलाओं को लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें पहले तीन दिन की ट्रेनिंग दी गई। इसके तहत अब उक्त महिलाएं मॉडल टाउन एरिया के घर-घर में जाकर लोगों को गीले-सूखे कचरे को अलग-अलग करने की जानकारी देंगी। उनसे आग्रह किया जाएगा कि वो अपने घर में दो अलग-अलग कूड़ेदान रखकर कचरे को घर से ही अलग-अलग करें और गाड़ी में डालते समय भी गाड़ी के अलग-अलग हिस्सों में ही कचरा डालें। फिलहाल नगर परिषद की ओर से जो गाड़ियां कचरा उठान के लिए जा रही हैं, उनको दो हिस्सों में बांटा गया है। मॉडल टाउन के बाद नगर परिषद प्रशासन बाकी शहर के लिए भी यही व्यवस्था को लागू करने के बारे में विचार कर रहा है।
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नगर परिषद प्रशासन ने माडल टाउन एरिया को जीरो वेस्ट क्षेत्र घोषित किया है। महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वो इन इलाकों में जाकर कचरा प्रबंधन को लेकर लोगों को जागरूक करें।
- सतपाल सैनी, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद
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नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार, मॉडल टाउन को जीरो वेस्ट वार्ड घोषित किया जा चुका है। इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए महिलाओं की जिम्मेदारी तय करते हुए पूरे वार्ड में नियमित जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। महिलाओं की टीम सुबह से ही गलियों में उतरकर लोगों को सूखा-गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा करने, एकल उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग कम करने और कचरा वाहन में डालने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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नगर परिषद का मानना है कि लोगों के व्यवहार में बदलाव लाए बिना कचरा प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत नहीं की जा सकती। इसी कारण स्वयं सहायता समूहों को इस अभियान की कमान सौंपी गई है। अधिकारी बताते हैं कि कचरे की मात्रा कम करने और उसे सही तरीके से विभाजित कर निपटान करने के लिए घर-घर जागरूकता सबसे कारगर उपाय है।
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यही वजह है कि महिलाओं की ड्यूटी तय कर उन्हें नियमित रूप से फीडबैक देने और क्षेत्र में आने वाली समस्याओं की रिपोर्ट करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि महिलाओं के इस अभियान का असर पहले दिन से दिखाई देना शुरू हो गया है। कई घरों में लोग कचरा अलग-अलग जमा करने लगे हैं, जिससे सफाई कर्मियों का काम भी आसान हुआ है।
नगर परिषद का दावा है कि यदि इसी तरह सहयोग मिलता रहा तो मॉडल टाउन को पूरी तरह जीरो वेस्ट वार्ड बनाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। अधिकारी बताते हैं कि आगे इस मॉडल को शहर के अन्य वार्डों में भी लागू किया जाएगा।
स्वयं सहायता समूह की दस महिलाओं को सौंपी गई है जिम्मेदारी
नगर परिषद प्रशासन ने जीरो वेस्ट क्षेत्र का लक्ष्य हासिल करने के लिए स्वयं सहायता समूह की दस महिलाओं को जिम्मेदारी सौंपी है। इन महिलाओं को नगर परिषद की ओर से भुगतान किया जाएगा। अगले माह से जब डोर टू डोर कचरा उठान का काम पूर्ण स्तर पर शुरू हो जाएगा, उस समय कचरा उठान का ठेका लेने वाली कंपनी ही इन महिलाओं को भुगतान करेगी। हालांकि नप प्रशासन ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि इस स्वयं सहायता समूह को कितना भुगतान किया जाएगा।
गीले-सूखे कचरे के बारे में कर रहीं जागरूक
स्वच्छ भारत मिशन के इंचार्ज कुमार सौरभ ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की जिन दस महिलाओं को लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें पहले तीन दिन की ट्रेनिंग दी गई। इसके तहत अब उक्त महिलाएं मॉडल टाउन एरिया के घर-घर में जाकर लोगों को गीले-सूखे कचरे को अलग-अलग करने की जानकारी देंगी। उनसे आग्रह किया जाएगा कि वो अपने घर में दो अलग-अलग कूड़ेदान रखकर कचरे को घर से ही अलग-अलग करें और गाड़ी में डालते समय भी गाड़ी के अलग-अलग हिस्सों में ही कचरा डालें। फिलहाल नगर परिषद की ओर से जो गाड़ियां कचरा उठान के लिए जा रही हैं, उनको दो हिस्सों में बांटा गया है। मॉडल टाउन के बाद नगर परिषद प्रशासन बाकी शहर के लिए भी यही व्यवस्था को लागू करने के बारे में विचार कर रहा है।
नगर परिषद प्रशासन ने माडल टाउन एरिया को जीरो वेस्ट क्षेत्र घोषित किया है। महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वो इन इलाकों में जाकर कचरा प्रबंधन को लेकर लोगों को जागरूक करें।
- सतपाल सैनी, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद