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Fatehabad News: जांच में 43 फीसदी गर्भवती हाई रिस्क की श्रेणी में मिलीं
Thu, 24 Sep 2026 10:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 24 Sep 2026 10:14 PM IST
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फतेहाबाद में नागरिक अस्पताल में गर्भवती रजिस्ट्रेशन करते हुए संवाद
फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत वीरवार को गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। शिविर में 116 महिलाओं की जांच की गई। इनमें 50 महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में पाई गईं।
ऐसी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त निगरानी और चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत होती है। सिविल सर्जन डॉ. बुधराम ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर माह की 9, 10, 23 और 30 तारीख को शिविर लगाए जाते हैं।
इन शिविरों में गर्भवती महिलाओं की समय पर स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिम की पहचान कर आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध करवाना है। इससे जच्चा और बच्चा दोनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में मदद मिलती है।
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-इसलिए होती है हाई रिस्क प्रेग्नेंसी
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी कई कारणों से हो सकती है। इनमें गर्भवती महिला को उच्च रक्तचाप, मधुमेह या एनीमिया होना, पहले से कोई गंभीर बीमारी होना, पिछली गर्भावस्था में जटिलता रहना, बहुत कम या अधिक उम्र में गर्भधारण तथा एक से अधिक बच्चों का गर्भ में होना शामिल हो सकता है। जिन गर्भवती महिलाओं में रक्तचाप या शुगर की समस्या, गंभीर एनीमिया, रक्तस्राव, भ्रूण के विकास से जुड़ी समस्या अथवा पिछली गर्भावस्था में गंभीर जटिलता का इतिहास हो, उन्हें चिकित्सकीय जांच के आधार पर हाई रिस्क श्रेणी में रखा जा सकता है।
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-हाई रिस्क गर्भावस्था में नियमित प्रसव पूर्व जांच, समय पर जरूरी टेस्ट, संतुलित आहार, आयरन-फोलिक एसिड समेत चिकित्सक द्वारा बताई दवाओं का सेवन और पर्याप्त आराम जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कार्ड जारी किया जाता है ताकि आशा वर्कर विशेष निगरानी रख सकें।
- डॉ. भरत सहारण, उप सिविल सर्जन।
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ऐसी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त निगरानी और चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत होती है। सिविल सर्जन डॉ. बुधराम ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर माह की 9, 10, 23 और 30 तारीख को शिविर लगाए जाते हैं।
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इन शिविरों में गर्भवती महिलाओं की समय पर स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिम की पहचान कर आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध करवाना है। इससे जच्चा और बच्चा दोनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में मदद मिलती है।
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-इसलिए होती है हाई रिस्क प्रेग्नेंसी
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी कई कारणों से हो सकती है। इनमें गर्भवती महिला को उच्च रक्तचाप, मधुमेह या एनीमिया होना, पहले से कोई गंभीर बीमारी होना, पिछली गर्भावस्था में जटिलता रहना, बहुत कम या अधिक उम्र में गर्भधारण तथा एक से अधिक बच्चों का गर्भ में होना शामिल हो सकता है। जिन गर्भवती महिलाओं में रक्तचाप या शुगर की समस्या, गंभीर एनीमिया, रक्तस्राव, भ्रूण के विकास से जुड़ी समस्या अथवा पिछली गर्भावस्था में गंभीर जटिलता का इतिहास हो, उन्हें चिकित्सकीय जांच के आधार पर हाई रिस्क श्रेणी में रखा जा सकता है।
-हाई रिस्क गर्भावस्था में नियमित प्रसव पूर्व जांच, समय पर जरूरी टेस्ट, संतुलित आहार, आयरन-फोलिक एसिड समेत चिकित्सक द्वारा बताई दवाओं का सेवन और पर्याप्त आराम जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कार्ड जारी किया जाता है ताकि आशा वर्कर विशेष निगरानी रख सकें।
- डॉ. भरत सहारण, उप सिविल सर्जन।