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संस्कृत भाषा दर्शन, साहित्य और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा : डॉ. राकेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 03 Mar 2025 11:17 PM IST
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Sanskrit language is an integral part of philosophy, literature and religious traditions: Dr. Rakesh
एमएम कॉलेज में आयोजित संस्कृत कार्यशाला में उपस्थित अतिथिगण।
फतेहाबाद। मनोहर मेमोरियल कॉलेज के संस्कृत विभाग की ओर से 20 फरवरी से शुरू हुई 10 दिवसीय संस्कृत भाषा कार्यशाला का सोमवार को समापन हो गया। कार्यशाला में मुख्यअतिथि के तौर पर डॉ. राकेश रहे व मुख्य वक्ता के रूप में संस्कृत भारती के सहमंत्री भूपेंद्र एवं मार्गदर्शक नवीन कुमार, संगठन मंत्री संस्कृत भारती संस्था ने भाग लिया।
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वक्ताओं ने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रतिभागियों को संस्कृत वार्तालाप, शुद्ध उच्चारण एवं व्याकरण पर विशेष प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में नेशनल कॉलेज, सिरसा के सेवानिवृत्त प्राचार्य तेजराम बिश्नोई भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और शिक्षा में इसके महत्व पर अपने विचार साझा किए।
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वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत को विश्व की सर्वाधिक पूर्ण भाषा माना गया है, जो भारत को एकता के सूत्र में बांधती है। संस्कृत न केवल एक प्राचीन भाषा है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, दर्शन, साहित्य, और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा है। संस्कृत की शिक्षा से व्यक्ति न केवल भाषा की समझ विकसित करता है, बल्कि वह भारतीय सांस्कृतिक धरोहर से भी जुड़ता है।
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कार्यशाला के समापन समारोह में कॉलेज प्राचार्य डॉ. गुरचरण दास ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए और संस्कृत भाषा के संरक्षण में ऐसे आयोजनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला छात्रों को संस्कृत में संवाद करने की दक्षता प्रदान करेगी और उनकी रुचि को बढ़ाएगी। डॉ. रवीना ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों एवं शिक्षकों को संस्कृत में संवाद करने के लिए प्रेरित करना और इसके व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देना था।
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