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Fatehabad News: जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर उठे सवाल किसान बोले- नहीं किया सही आकलन

Wed, 01 Apr 2026 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Wed, 01 Apr 2026 11:32 PM IST
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Questions raised on the report of the district administration, farmers said correct assessment was not done
गांव हिजरावां कलां में अपनी सरसों की खराब हुई फसल दिखाता किसान। स्वयं
फतेहाबाद। प्रशासन ने जिले में दो दिन पहले ओलावृष्टि और भारी बारिश से खराब हुई फसलों के नुकसान का आकलन तैयार कर लिया है। तैयार रिपोर्ट में प्रशासन ने 11 गांवों में से 5 में भारी नुकसान बताया है। इन गांवों के किसानाें के नुकसान की भरपाई करने के लिए उपायुक्त ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को पत्र लिखकर ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने के लिए लिखा है।
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किसानों का कहना है कि प्रशासन ने फसल खराब होने का आकलन सही नहीं किया है। वास्तविकता में 20-25 गांवों में ओलावृष्टि और भारी बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है लेकिन प्रशासन ने कागजों में केवल 11 गांवों को ही नुकसान की श्रेणी में लिया है।
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:: पांच गांवों में सबसे ज्यादा ओलावृष्टि

प्रशासन ने कुल 11 गांवों में नुकसान की रिपोर्ट बनाई है। इस सूची में नुकसान को दो श्रेणियों में बांटा है। अत्यधिक नुकसान वाले केवल 5 गांवों को इस श्रेणी में रखा है जहां ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा नुकसान है। प्रशासन ने गांव बिसला, माजरा, भूथनकलां, झलनियां व भिरड़ाना में 50 से लेकर 80 प्रतिशत तक नुकसान बताया है। वहीं दूसरी श्रेणी की सूची में 6 अन्य गांवों को शामिल किया है जहां नुकसान सिर्फ 20 से 22 प्रतिशत बताया गया है। इनमें गांव बरसीन, हिजरावां कलां, अकांवाली, दौलतपुर, दरियापुर व करनौली को शामिल किया गया है। इस रिपोर्ट में प्रशासन ने राजस्व विभाग के मुख्यालय को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रभावित 5 गांवों के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला जाए ताकि किसान वहां अपना नुकसान दर्ज करवा सकें।
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फील्ड में उतरे प्रशासन, कागजों में न बांधे रिपोर्ट

प्रशासन की ओर से 5 गांवों को ही सूची में शामिल करने पर किसानों ने कड़ी आपत्ति जताई है। किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि का दायरा प्रशासन की रिपोर्ट से कहीं अधिक है। कई ऐसे गांव हैं जहां फसलें 100 प्रतिशत तक खराब हो चुकी हैं लेकिन उन्हें इस सूची से बाहर रखा गया है। प्रभावित गांवों के किसानों का कहना है कि प्रशासन को वातानुकूलित कमरों से निकलकर खेतों में जाकर वास्तविकता देखनी चाहिए। जब तक अधिकारी मौके पर जाकर हर खेत का मुआयना नहीं करेंगे तब तक सही नुकसान का आकलन संभव नहीं है।

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क्या है ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल का पेंच

नियमों के मुताबिक जब तक किसी क्षेत्र विशेष के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल नहीं खोला जाता किसान अपने खराबे का विवरण ऑनलाइन दर्ज नहीं करवा सकते। वर्तमान में प्रशासन ने केवल उन 5 गांवों के लिए पोर्टल खोलने की सिफारिश की है जिन्हें उन्होंने सर्वाधिक प्रभावित माना है। ऐसे में बाकी 6 गांवों किसानों को हुए नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी।

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किसान बोले-

गांव हिजरावां कलां निवासी किसान सुरेंद्र ने बताया कि उसके खेत में सरसों उगाई गई थी जिसका 100 प्रतिशत नुकसान हुआ है। प्रशासन की ओर से एक पत्र में गांव में सिर्फ 20 प्रतिशत नुकसान बताया गया है। 29 मार्च को रात को ओले गिरे थे। इसके बाद 30 मार्च को प्रशासन ने 24 घंटे से भी कम समय में एक रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेज दी है।


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गांव हिजरावां कलां निवासी किसान मलकीत उप्पल ने बताया कि गांव में 29 मार्च को आई बारिश व ओले ने काफी नुकसान किया है। इससे उनको काफी नुकसान हुआ है। प्रशासन को सभी गांवों के लिए पोर्टल खुलवाना चाहिए ताकि जिसका नुकसान हुआ है वो पोर्टल पर दर्ज करवा सके और उनके नुकसान की भरपाई हो सके।
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