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सुसुरक्षा पर निजी स्कूलों का सालाना खर्च 4 लाख, सरकारी का बजट शून्य
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निजी स्कूल के सामने तैनात गार्ड।
- फोटो : Fatehabad
रामसरा के स्कूल में घुसकर शिक्षक की हत्या के बाद सरकारी स्कूलों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि निजी स्कूलों से तुलना करें तो सरकारी स्कूलों की सुरक्षा का सवाल वाजिब भी है। निजी स्कूल सुरक्षा पर लगभग 3 से 4 लाख रुपये प्रति वर्ष खर्च कर रहे हैं। जबकि सरकारी स्कूलों की सुरक्षा का बजट शून्य है। बार-बार कहा यही जा रहा है कि सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी लगाए जाएंगे। मगर सवाल तो ये है कि सीसीटीवी कैमरों की रखवाली के लिए क्या व्यवस्था है। कुछ भी तो नहीं। चोर बंद कमरों से इनवर्टर, बैटरी व एजुसेट ले जाते हैं और पता भी नहीं चलता। ऐसे में कैमरे चोरी नहीं होंगे, इसकी गारंटी कौन ले। क्योंकि न तो दिन में गार्ड होता है और न ही रात को चौकीदार।
सुरक्षा व्यवस्था में इतना अंतर
प्राइवेट स्कूल : हर स्कूल के बाहर एक गार्ड तैनात रहता है। एक रजिस्टर रखा होता है। मुख्य गेट बंद रहता है। किसी को अंदर जाना है तो पहले रजिस्टर में एंट्री होगी। अपना नाम-पता, मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है। किससे मिलना है, यह भी बताना पड़ता है। इसके बाद प्रवेश होता है।
सरकारी स्कूल : मेन गेट खुला रहता है। बाहर न तो कोई गार्ड होता और न ही कोई रजिस्टर। जब मर्जी कोई भी स्कूल में घुस आए, कोई पूछने वाला नहीं है। बच्चे स्कूलों से बाहर घूम रहे होते हैं। न दिन में कोई चौकसी होती और न ही रात को कोई पहरेदारी। रात को लोग स्कूल प्रांगण में बैठकर शराब तक पीते हैं।
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ये हैं मुख्य औसतन खर्चे
सुरक्षा गार्ड 1.50 लाख वार्षिक वेतन
रात का चौकीदार 1.50 लाख वार्षिक वेतन
कैमरों का रखरखाव 50 हजार सलाना खर्च
कोट
हमने दिन के लिए सुरक्षा गार्ड रखा हुआ है। रात को अलग व्यक्ति की ड्यूटी होती है। दोनों के वेतन पर तीन लाख रुपये प्रतिवर्ष खर्च होते हैं। सीसीटीवी लगाने का खर्चा लाखों रुपये आया था। इनकी मरम्मत पर भी हर साल 50 से 70 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं।
-लोकेश खुराना, प्राचार्य, मदर इंडिया स्कूल।
हमारे पास बजट की कमी : डीईओ
हमारे पास बजट की कमी रहती है। इसलिए सुरक्षा गार्ड, चौकीदार व कैमरों जैसी व्यवस्था नहीं हो सकती। मगर स्कूल मुखियाओं को हिदायत है कि सुरक्षा के मामले में चौकस रहें। स्कूल टाइम में गेट बंद रखने की हिदायत दी गई है। स्कूल में आने वाले अजनबियों को भी रिकॉर्ड रखने को कहा गया है।
- दयानंद सिहाग, डीईओ।
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सुरक्षा व्यवस्था में इतना अंतर
प्राइवेट स्कूल : हर स्कूल के बाहर एक गार्ड तैनात रहता है। एक रजिस्टर रखा होता है। मुख्य गेट बंद रहता है। किसी को अंदर जाना है तो पहले रजिस्टर में एंट्री होगी। अपना नाम-पता, मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है। किससे मिलना है, यह भी बताना पड़ता है। इसके बाद प्रवेश होता है।
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सरकारी स्कूल : मेन गेट खुला रहता है। बाहर न तो कोई गार्ड होता और न ही कोई रजिस्टर। जब मर्जी कोई भी स्कूल में घुस आए, कोई पूछने वाला नहीं है। बच्चे स्कूलों से बाहर घूम रहे होते हैं। न दिन में कोई चौकसी होती और न ही रात को कोई पहरेदारी। रात को लोग स्कूल प्रांगण में बैठकर शराब तक पीते हैं।
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ये हैं मुख्य औसतन खर्चे
सुरक्षा गार्ड 1.50 लाख वार्षिक वेतन
रात का चौकीदार 1.50 लाख वार्षिक वेतन
कैमरों का रखरखाव 50 हजार सलाना खर्च
कोट
हमने दिन के लिए सुरक्षा गार्ड रखा हुआ है। रात को अलग व्यक्ति की ड्यूटी होती है। दोनों के वेतन पर तीन लाख रुपये प्रतिवर्ष खर्च होते हैं। सीसीटीवी लगाने का खर्चा लाखों रुपये आया था। इनकी मरम्मत पर भी हर साल 50 से 70 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं।
-लोकेश खुराना, प्राचार्य, मदर इंडिया स्कूल।
हमारे पास बजट की कमी : डीईओ
हमारे पास बजट की कमी रहती है। इसलिए सुरक्षा गार्ड, चौकीदार व कैमरों जैसी व्यवस्था नहीं हो सकती। मगर स्कूल मुखियाओं को हिदायत है कि सुरक्षा के मामले में चौकस रहें। स्कूल टाइम में गेट बंद रखने की हिदायत दी गई है। स्कूल में आने वाले अजनबियों को भी रिकॉर्ड रखने को कहा गया है।
- दयानंद सिहाग, डीईओ।