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Fatehabad News: नगर पालिका चेयरपर्सन के खिलाफ फिर से अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी
Tue, 09 Jun 2026 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:06 PM IST
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नगरपालिका रतिया। फाइल फोटो
रतिया। नगर पालिका चेयरपर्सन प्रीति खन्ना को हटाने की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है। पिछले वर्ष असफल रहे प्रयास के बाद इस बार पार्षदों ने नई रणनीति अपनाते हुए अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। मंगलवार को 14 पार्षद चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार नगर पालिका के कुल 17 में से 14 पार्षद एकजुट होकर चेयरपर्सन के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। इन पार्षदों में उपप्रधान जोगिंदर नंदा का समर्थन भी शामिल बताया जा रहा है, जो इस बार खुले तौर पर चेयरपर्सन के विरोध में नजर आ रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि पिछले वर्ष भी अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी थी।
इस बार पार्षदों ने पहले से अधिक मजबूत रणनीति तैयार की है और मामले को निर्णायक मोड़ तक ले जाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि पार्षदों के इस कदम के पीछे क्षेत्र के एक वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता का समर्थन भी चर्चा में है जिससे राजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो गए हैं। ऐसे में चेयरपर्सन प्रीति खन्ना के सामने अपनी कुर्सी बचाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
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उल्लेखनीय कि पिछले वर्ष 4 मार्च को 14 पार्षदों ने चेयरपर्सन और उपप्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए जिला उपायुक्त से मुलाकात की थी। उस समय प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी। बाद में पार्षदों ने 7 मई को उच्च न्यायालय का रुख किया था जिसके बाद अदालत ने प्रशासन को मामले में अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे। न्यायिक हस्तक्षेप के बाद 22 मई को अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक आयोजित करने के आदेश जारी हुए थे।
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22 मई को बच गई थी कुर्सी
पिछले वर्ष 22 मई को अतिरिक्त उपायुक्त अनुराग ढालिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए प्रधान के खिलाफ 14 तथा उप प्रधान के खिलाफ 12 पार्षदों की जरूरत थी लेकिन बैठक में निर्धारित समय तक केवल 11 पार्षद ही पहुंचे थे जिसके चलते चेयरपर्सन प्रीति खन्ना व उपाध्यक्ष जोगिंदर नंदा के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव कोरम पूरा नहीं होने कारण खारिज हो गया। इसके चलते दोनों की ही कुर्सी बच गई।
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पिछले दिनों एक पार्षद को किया था निलंबित
निकाय विभाग के निदेशक द्वारा पिछले दिनों वार्ड 11 के पार्षद विजय गर्ग द्वारा एनडीसी के नाम पर रिश्वत लेने की शिकायत के आधार पर उसे निलंबित किया गया था। जिसके बाद अब नगर पालिका में पार्षदों की संख्या 16 ही रह गई है।
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सूत्रों के अनुसार नगर पालिका के कुल 17 में से 14 पार्षद एकजुट होकर चेयरपर्सन के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। इन पार्षदों में उपप्रधान जोगिंदर नंदा का समर्थन भी शामिल बताया जा रहा है, जो इस बार खुले तौर पर चेयरपर्सन के विरोध में नजर आ रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि पिछले वर्ष भी अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी थी।
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इस बार पार्षदों ने पहले से अधिक मजबूत रणनीति तैयार की है और मामले को निर्णायक मोड़ तक ले जाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि पार्षदों के इस कदम के पीछे क्षेत्र के एक वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता का समर्थन भी चर्चा में है जिससे राजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो गए हैं। ऐसे में चेयरपर्सन प्रीति खन्ना के सामने अपनी कुर्सी बचाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
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उल्लेखनीय कि पिछले वर्ष 4 मार्च को 14 पार्षदों ने चेयरपर्सन और उपप्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए जिला उपायुक्त से मुलाकात की थी। उस समय प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी। बाद में पार्षदों ने 7 मई को उच्च न्यायालय का रुख किया था जिसके बाद अदालत ने प्रशासन को मामले में अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे। न्यायिक हस्तक्षेप के बाद 22 मई को अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक आयोजित करने के आदेश जारी हुए थे।
22 मई को बच गई थी कुर्सी
पिछले वर्ष 22 मई को अतिरिक्त उपायुक्त अनुराग ढालिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए प्रधान के खिलाफ 14 तथा उप प्रधान के खिलाफ 12 पार्षदों की जरूरत थी लेकिन बैठक में निर्धारित समय तक केवल 11 पार्षद ही पहुंचे थे जिसके चलते चेयरपर्सन प्रीति खन्ना व उपाध्यक्ष जोगिंदर नंदा के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव कोरम पूरा नहीं होने कारण खारिज हो गया। इसके चलते दोनों की ही कुर्सी बच गई।
पिछले दिनों एक पार्षद को किया था निलंबित
निकाय विभाग के निदेशक द्वारा पिछले दिनों वार्ड 11 के पार्षद विजय गर्ग द्वारा एनडीसी के नाम पर रिश्वत लेने की शिकायत के आधार पर उसे निलंबित किया गया था। जिसके बाद अब नगर पालिका में पार्षदों की संख्या 16 ही रह गई है।