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Fatehabad News: सत्ता आती जाती रही, लावारिस पशुओं का कब्जा बरकरार रहा

Tue, 10 Sep 2024 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Tue, 10 Sep 2024 01:38 AM IST
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Power kept coming and going, possession of abandoned animals remained intact
शहर के जीटी रोड पर सड़क ​किनारे खड़े आवारा पशु।
फतेहाबाद। प्रदेश में सत्ता आती रही, जाती रही। हलके के विधायक बदलते रहे। मगर लावारिस पशुओं का सड़कों से राज खत्म नहीं हुआ। पांच साल पहले भी लावारिस पशु सड़कों पर घूम रहे थे और अब भी। शहर में मुख्य मार्गों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक में लावारिस पशुओं की भरमार है।
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इनसे पॉश इलाके भी सुरक्षित नहीं है। खुद विधायक दुड़ाराम की कोठी के आसपास भट्टू रोड पर लावारिस पशुओं के झुंड नजर आते हैं। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और नगर परिषद अधिकारियों की सुस्ती आमजन के जीवन को मुसीबत में डाल रही है। दरअसल, शहर में लावारिस पशुओं से जनता परेशान हो चुकी है। इनकी बढ़ती संख्या आमजन के लिए सिरदर्द बनी हुई है। शहर का बाजार ही नहीं बल्कि ऐसी कोई गली या मोहल्ला नहीं है, जहां पर लावारिस पशु न हों।
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इन पशुओं के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। हालांकि नगर परिषद प्रशासन इन लावारिस पशुओं को पकड़ने के दावे भी कर रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही दिखाई पड़ती है। नगर परिषद की ओर से आवारा पशुओं को पकड़कर गोशाला भिजवाने के लिए एक एजेंसी को टेंडर भी दिया हुआ है। अधिकारियों के अनुसार इस साल जनवरी माह से अब तक कुल 518 पशुओं को पकड़कर गोशाला भेजा जा चुका है।
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पांच साल से नहीं बनी कोई ठोस योजना
चिंताजनक बात यह है कि लावारिस पशुओं से जनता को निजात दिलाने के लिए पिछले पांच साल में कोई ठोस व प्रभावी योजना नहीं बनी है। न ही किसी जनप्रतिनिधि ने कोई संजीदगी दिखाई है। नगर परिषद की हाउस की बैठक में पार्षद मुद्दा उठाते हैं, लेकिन बैठक के बाद वह ठंडे बस्ते में चला जाता है। हालात ऐसे हैं कि गाय जब दूध देना बंद कर दे तो पशुपालक उनको सड़कों पर लावारिस छोड़ देते हैं।
लावारिस पशुओं में शामिल गाय, बैल, सांड़ आदि भोजन की तलाश में रोजाना शहर की ओर आ रहे हैं। लोग घरों में बचे हुए खाने को घर के बाहर बनी कुंडियों में डाल देते हैं, जिससे आवारा पशु दिनभर गली मोहल्लों में घूमते रहते हैं। सब्जी व फल विक्रेताओं के साथ ठेलों से भी सड़कों पर गली सड़ी सब्जियों व उनके छिलके डाले जाने के कारण आवारा पशु मुख्य मार्ग, चौराहे व सड़कों पर खुलेआम घूमते रहते हैं, जिससे दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।

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5 लाख रुपये हुए खर्च लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों
नगर परिषद प्रशासन की ओर से लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए रेवाड़ी की एक एजेंसी को टेंडर दिया हुआ है। नगर परिषद अधिकारी एजेंसी को एक पशु पकड़ने के लिए 920 रुपये खर्च दे रहे हैं। नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार एजेंसी अब तक 518 पशु पकड़ चुकी है। मगर शहर में लावारिस पशुओं की स्थिति ज्यों की त्यों ही बनी हुई है।
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केस नंबर एक
- शहर के जगजीवनपुरा मोहल्ले में लावारिस पशु ने गली में खेल रहे एक 5 वर्षीय बच्चे को गंभीर घायल रूप से घायल कर दिया था। काफी दिनों तक मोहल्लावासियों ने पार्षदों के सहयोग से आवारा पशुओं को मोहल्ले से बाहर भी निकाला था।
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केस नंबर दो
- शहर के सिरसा रोड पर अपने दोस्त के साथ जन्मदिन मनाकर घर लौट रहे 2 युवकों की मौत भी आवारा पशु के कारण हुई थी। शहर के सिरसा रोड पर स्थित एक होटल से कुछ युवक अपने एक दोस्त का जन्मदिन मनाकर घर लौट रहे थे। इस दौरान युवक होटल से खाना खाकर थोड़ी दूर ही पहुंचे थे। इस दौरान लावारिस पशु उनके मोटरसाइकिल के आगे आ गया। जिससे चालक व उसके पीछे बैठे युवक की मौत हो गई थी।
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शहर के हर चौक-चौराहे पर लावारिस पशु बैठे रहते हैं। काफी बार हादसे भी हो चुके हैं। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को इससे छुटकारा दिलाने के लिए ध्यान देना चाहिए।
- नितिन, निवासी, चार मरला कॉलोनी
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शहर के जीटी रोड पर रात के समय काफी लावारिस पशु बैठे रहते हैं। इनकी वजह से रोजाना सड़क हादसे होने का डर बना रहता है। प्रशासन को इन पशुओं को पकड़ कर गोशाला में भेजना चाहिए।
- राजू, निवासी, डीएसपी रोड
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काफी बार लाइट न होने के कारण लावारिस पशु सड़क पर बैठे हुए नजर नहीं आते हैं, जिस कारण काफी सड़क हादसे हो चुके हैं। भविष्य में ऐसा ना हो, इसके लिए प्रशासन को इनको नंदीशाला या गोशाला में भिजवाना चाहिए।
- कृष्ण कुमार, निवासी, शिव चौक
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लावारिस पशुओं के गले में रिफ्लेक्टर पट्टी डालनी चाहिए ताकि रात के समय जब कोई वाहन चालक गुजरे तो उसको पता चल सके। वहीं, इसको लेकर कोई स्थायी समाधान भी प्रशासन को करना चाहिए। इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है।

- गुरप्रीत, निवासी, माजरा रोड
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:: लावारिस पशुओं की समस्या के समाधान को लेकर कई कदम उठाए गए हैं। नगर परिषद ने एजेंसी को टेंडर भी दे रखा है। नंदीशाला को भी बजट दिया जाता है। भविष्य में इस विषय पर और संजीदगी से काम करवाया जाएगा।
-दुड़ाराम, विधायक, फतेहाबाद
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