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पीपीपी के तहत चल रहे डायलिसिस सेंटर में बिजली गुल, इलाज नहीं
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नागरिक अस्पताल में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत चल रहे डायलिसिस सेंटर में बिजली सप्लाई बंद होने पर दूसरा विकल्प नहीं है। बिजली सप्लाई नहीं है तो मरीज की डायलिसिस भी नहीं होती है। मरीज को या तो इंतजार करना पड़ता है या फिर वापस घर लौटना पड़ रहा है। पीपीपी के तहत चल रहा डायलिसिस सेंटर जनरेटर से नहीं जुड़ा है। इसके चलते बिजली सप्लाई गुल होने पर डायलिसिस मशीन भी बंद हो जाती है।
हालांकि नागरिक अस्पताल हॉटलाइन से जुड़ा हुआ है लेकिन फिर भी लोड ज्यादा होने के कारण बिजली के कट लगते रहते है। यहां तक कि अस्पताल के अंदर लगे ट्रांसफार्मर में भी लोड ज्यादा होने के कारण फाल्ट आता रहता है और कई बार-बार घंटों बिजली गुल रहती है। सेंटर पर डायलिसिस करवाने वाले गांव रत्ताखेड़ा के योगेश का कहना है कि उसे सप्ताह में दो बार डायलिसिस करवाने की जरूरत पड़ती है। जब वह नागरिक अस्पताल के सेंटर में आता है तो बिजली सप्लाई न होने पर वापस भेज दिया जाता है। वहीं सेंटर के मैनेजर का कहना है कि यहां हॉटलाइन है और बिजली कट कम लगते है। जेनरेटर की सर्विस न होने के कारण नहीं जोड़ा गया है लेकिन बिजली सप्लाई उपलब्ध करवाना अस्पताल प्रशासन का काम है।
डायलिसिस के लिए चुकाने होते हैं 1013 से 1143 रुपये
नागरिक अस्पताल में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत किडनी केयर सेंटर चल रहा है। यहां पर डायलिसिस करवाने के लिए निगेटिव मरीज को 1013 रुपये तथा पॉजिटिव मरीज को 1143 रुपये चुकाने होते हैं। इसके अलावा बीपीएल, आयुष्मान योजना, ईडब्ल्यूएस से जुडे़ मरीजों की डायलिसिस निशुल्क होती है।
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कोट
डायलिसिस सेंटर वैसे तो हॉटलाइन से जुड़ा हुआ है। जनरेटर से कनेक्शन नहीं है, उसकी सर्विस नहीं हुई है। बिजली सप्लाई देना अस्पताल प्रशासन का काम है। वैसे बिजली कट की ज्यादा समस्या नहीं आ रही है।
- रूबल कुमार, मैनेजर डीसीडीसी किडनी केयर सेंटर।
कोट
डायलिसिस सेंटर पीपीपी के तहत चल रहा है। सेंटर का विभाग के साथ क्या अनुबंध हुआ है, इसकी जानकारी ली जाएगी। अगर नियम अनुसार जनरेटर की सुविधा दे सकते हैं तो दी जाएगी।
- डॉ. राजेश चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी।
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हालांकि नागरिक अस्पताल हॉटलाइन से जुड़ा हुआ है लेकिन फिर भी लोड ज्यादा होने के कारण बिजली के कट लगते रहते है। यहां तक कि अस्पताल के अंदर लगे ट्रांसफार्मर में भी लोड ज्यादा होने के कारण फाल्ट आता रहता है और कई बार-बार घंटों बिजली गुल रहती है। सेंटर पर डायलिसिस करवाने वाले गांव रत्ताखेड़ा के योगेश का कहना है कि उसे सप्ताह में दो बार डायलिसिस करवाने की जरूरत पड़ती है। जब वह नागरिक अस्पताल के सेंटर में आता है तो बिजली सप्लाई न होने पर वापस भेज दिया जाता है। वहीं सेंटर के मैनेजर का कहना है कि यहां हॉटलाइन है और बिजली कट कम लगते है। जेनरेटर की सर्विस न होने के कारण नहीं जोड़ा गया है लेकिन बिजली सप्लाई उपलब्ध करवाना अस्पताल प्रशासन का काम है।
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डायलिसिस के लिए चुकाने होते हैं 1013 से 1143 रुपये
नागरिक अस्पताल में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत किडनी केयर सेंटर चल रहा है। यहां पर डायलिसिस करवाने के लिए निगेटिव मरीज को 1013 रुपये तथा पॉजिटिव मरीज को 1143 रुपये चुकाने होते हैं। इसके अलावा बीपीएल, आयुष्मान योजना, ईडब्ल्यूएस से जुडे़ मरीजों की डायलिसिस निशुल्क होती है।
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कोट
डायलिसिस सेंटर वैसे तो हॉटलाइन से जुड़ा हुआ है। जनरेटर से कनेक्शन नहीं है, उसकी सर्विस नहीं हुई है। बिजली सप्लाई देना अस्पताल प्रशासन का काम है। वैसे बिजली कट की ज्यादा समस्या नहीं आ रही है।
- रूबल कुमार, मैनेजर डीसीडीसी किडनी केयर सेंटर।
कोट
डायलिसिस सेंटर पीपीपी के तहत चल रहा है। सेंटर का विभाग के साथ क्या अनुबंध हुआ है, इसकी जानकारी ली जाएगी। अगर नियम अनुसार जनरेटर की सुविधा दे सकते हैं तो दी जाएगी।
- डॉ. राजेश चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी।