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खिलाड़ी सुमिता और ज्योति का सीनियर हॉकी कैंप के लिए चयन
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सुमिता नैन।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। जिले की हॉकी खिलाड़ियों की नर्सरी कहलाए जाने वाले गांव बैजलपुर की दो बेटियों सुमिता नैन और ज्योति बिड़ासर का इंडिया सीनियर हॉकी कैंप में चयन हुआ है। दोनों खिलाड़ी सोमवार से बेंगलुरू में शुरू होने वाले शिविर में भाग लेंगी।
इन दोनों सहित 33 खिलाड़ी इस शिविर में भाग लेंगी। वहां अगर बेहतर प्रदर्शन किया गया, तो उनका इंडियन टीम में चयन होगा। गांव के किसान परिवार की इन बेटियों ने पहले भी कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते हैं। सुमिता का यह सातवां शिविर होगा। ज्योति की टीम ने झांसी में हुई सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। उसी प्रदर्शन के आधार पर इनको कैंप के लिए चुना गया है। दोनों खिलाड़ी गांव बैजलपुर में ही कोच रणसिंह राणा के मार्गदर्शन में अभ्यास करती हैं।
गांव में एस्ट्रोटर्फ का न होने से खिलाड़ियों में निराशा
गांव में इतनी खेल प्रतिभा होने के बावजूद खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही है। गांव में एस्ट्रोटर्फ की लंबे समय से मांग हो रही है। आज तक कोई भी सरकारी सहायता इन प्रतिभाओं को नहीं मिली है। ग्रामीणों का कहना ह़ै कि हॉकी जैसे महंगे खेल को बिना किसी सरकारी सहायता के खेलना संभव नहीं है। ग्रामीण अपने स्तर पर ही कोच रण सिंह राणा को सहयोग कर रहे हैं। करीब 10 से 12 लाख रुपये की लागत से खेल का सामान मंगवाया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार गांव में खेल प्रतिभाओं को ध्यान में रखते हुए एस्ट्रोटर्फ, हॉकी नर्सरी की सुविधा उपलब्ध करवाएं ताकि शाहाबाद की तरह इस गांव के खिलाड़ी भी टीम इंडिया में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सके।
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इन दोनों सहित 33 खिलाड़ी इस शिविर में भाग लेंगी। वहां अगर बेहतर प्रदर्शन किया गया, तो उनका इंडियन टीम में चयन होगा। गांव के किसान परिवार की इन बेटियों ने पहले भी कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते हैं। सुमिता का यह सातवां शिविर होगा। ज्योति की टीम ने झांसी में हुई सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। उसी प्रदर्शन के आधार पर इनको कैंप के लिए चुना गया है। दोनों खिलाड़ी गांव बैजलपुर में ही कोच रणसिंह राणा के मार्गदर्शन में अभ्यास करती हैं।
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गांव में एस्ट्रोटर्फ का न होने से खिलाड़ियों में निराशा
गांव में इतनी खेल प्रतिभा होने के बावजूद खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही है। गांव में एस्ट्रोटर्फ की लंबे समय से मांग हो रही है। आज तक कोई भी सरकारी सहायता इन प्रतिभाओं को नहीं मिली है। ग्रामीणों का कहना ह़ै कि हॉकी जैसे महंगे खेल को बिना किसी सरकारी सहायता के खेलना संभव नहीं है। ग्रामीण अपने स्तर पर ही कोच रण सिंह राणा को सहयोग कर रहे हैं। करीब 10 से 12 लाख रुपये की लागत से खेल का सामान मंगवाया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार गांव में खेल प्रतिभाओं को ध्यान में रखते हुए एस्ट्रोटर्फ, हॉकी नर्सरी की सुविधा उपलब्ध करवाएं ताकि शाहाबाद की तरह इस गांव के खिलाड़ी भी टीम इंडिया में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सके।

ज्योति बिड़ासर।- फोटो : Fatehabad
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