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Fatehabad News: बिना मंजूरी गलियों में चल रहे प्ले स्कूल, क्षमता से ज्यादा एडमिशन, जांच तक नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Apr 2024 12:04 AM IST
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Play schools running in the streets without approval, admission more than capacity, not even checking
फतेहाबाद में प्राइमरी स्कूल जहां पर बाल वाटिका तीन शुरू की गई है।
फतेहाबाद। प्रशासन बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों पर शिकंजा कस रहा है लेकिन बिना मंजूरी जिले में चल रहे प्ले स्कूलों पर नजर नहीं है। जहां स्कूल से पहले नन्हें बच्चों को अभिभावक भेज रहे हैं। जिले में शहर से लेकर गांवों में बिना मंजूरी अधिकतर प्ले स्कूल चल रहे हैं। ये प्ले स्कूल तंग गलियों में रिहायशी मकानों के अंदर चलाए जा रहे हैं।
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इतनी बड़ी संख्या में जिले में प्ले स्कूल स्कूल चल रहे हैं और महिला एवं बाल विकास विभाग खबर होते भी कदम नहीं उठा रहा है। विभाग के पास वर्ष 2023-24 में 50 आवेदन प्ले स्कूल खोलने को लेकर आए। इसमें से सिर्फ 12 प्ले स्कूलों को ही मंजूरी दी गई है। बावजूद इसके एक आंकड़े के मुताबिक 300 से ज्यादा प्ले स्कूल चल रहे हैं। इसको लेकर पिछले दिनों डीसी की बैठक में निजी स्कूल संचालक मुद्दा उठा चुके हैं। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि उनके ऊपर सभी नियम लागू होते हैं, लेकिन जो धड़ल्ले से प्ले स्कूल चल रहे हैं उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। वहीं प्ले स्कूल द्वारा वैन भी लगा रखी है। जो कि नियम भी पूरे नहीं करती है। इन वैन के द्वारा ही विद्यार्थियों को लाया और छोड़ा जाता है। अहम बात यह है कि बिना पीले रंग के ये वैन चल रही हैं। प्ले स्कूल को लेकर मंजूरी न होने के चलते रंग पीला नहीं करवाया जा रहा है। संवाद
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दो कमरों में चल रहीं कक्षाएं तो कहीं रसोई को बनाया प्ले ग्राउंड
शहर में अधिकतर प्ले स्कूल रिहायशी मकानों के अंदर चल रहे हैं। जो कि मानक भी पूरी नहीं करते है। इसको लेकर पड़ताल की गई तो चौंकाने वाली बातें सामने आई। शहर के सतीश कॉलोनी, नहर कॉलोनी, जगजीवनपुरा मोहल्ला, अग्रवाल कॉलोनी, तहसील चौक, चार मरला कॉलोनी, लाजपत नगर, जवाहर चौक, संन्यास आश्रम रोड आदि क्षेत्र में प्ले स्कूल चल रहे हैं। पड़ताल की गई तो सामने आया कि कई जगह पर रिहायशी मकान के अंदर यूकेजी तक कक्षाएं चल रही हैं। नर्सरी कक्षा को ड्राइंग रूम में तो केजी और यूकेजी कक्षा को सामने के दो कमरों में चलाया जा रहा है। इसके अलावा खुली रसोई के अंदर प्ले ग्राउंड बनाया गया है जहां पर झूले रखे गए हैं। इसके अलावा कई जगहों पर बंद मकान के अंदर कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
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बेसमेंट में चल रहीं कक्षाएं
प्ले स्कूलों को लेकर मानक पूरी नहीं किए जा रहे हैं। कई जगहों पर बेसमेंट में ही कक्षाएं लगाई जा रही हैं। अगर कोई घटना होती है तो निकल पाना भी मुश्किल हो सकता है। यहां तक इन प्ले स्कूलों में फायर यंत्रों तक का प्रबंध नहीं है।
386 सरकारी स्कूलों में चल रही बाल वाटिका-3
जिले के 386 सरकारी स्कूलों में बाल-वाटिका-3 चल रही हैं। इसके अलावा बाल वाटिका एक और दो आंगनबाड़ी केंद्रों में चलाई जा रही है। निजी स्कूलों में जिन्हें कक्षा नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी दिया गया है, उसी तरह सरकारी स्कूलों में इसे बाल वाटिका-एक, दो और तीन नाम दिया गया है। बाल वाटिका-तीन में अब तक जिले में करीब 1787 दाखिले हुए हैं।
कोट
विभाग के पास पिछले साल 50 आवेदन आए थे, जिनमें से 12 को मंजूरी दी गई है। अगर कहीं बिना मंजूरी प्ले स्कूल चल रहे हैं, तो इसको लेकर जांच की जाएगी। बिना मंजूरी प्ले स्कूल नहीं चलाया जा सकता है।

-जोगिंद्र कौर, कार्यकारी जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, फतेहाबाद
कोट
जिले में बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों की सर्वे करके रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके अलावा प्ले स्कूलों को लेकर भी रिपोर्ट तैयार हो रही है जो कि बिना मंजूरी चल रहे है। बिना नियमों के चल रहे स्कूलों के खिलाफ उच्च अधिकारियों के आदेश पर जो कार्रवाई होगी वह की जाएगी।
- वेद सिंह दहिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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