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Fatehabad News: छात्राओं के लिए आईं गुलाबी बसें ग्रामीण रूट पर दाैड़ रहीं
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फतेहाबाद। जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं को सुविधा देने के लिए रोडवेज को करीब तीन वर्ष पहले मिलीं आठ गुलाबी बसों का लाभ नहीं मिल रहा है। गुलाबी बसों को छात्राओं के लिए चलाने के बजाय अलग-अलग रूटों पर चलाया जा रहा है।
हालांकि, भोड़ियाखेड़ा स्थित महिला महाविद्यालय की छात्राओं की संख्या अधिक होने पर रोडवेज अधिकारी उनके आने-जाने लिए बड़ी बसें भेजते हैं। मगर गुलाबी बसें छात्राओं व महिलाओं के लिए ही चलाने के बजाय ग्रामीण रूटों पर दौड़ रही हैं। फिलहाल तो गुलाबी बसों को वर्कशॉप में ही खड़ा किया गया है। रोडवेज प्रशासन के अनुसार हैप्पी कार्ड बांटने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगी हुई है, जिस कारण कई रूट प्रभावित हो रहे हैं। गुलाबी बसों को एक बार वर्कशॉप वाली खाली जगहों पर खड़ा किया हुआ है। वहीं जिस रूट पर कम सवारी होती है, उस रूट पर गुलाबी बसों को भेजा जाता है। गुलाबी बसों को जब फतेहाबाद डिपो में भेजा गया था, उसके कुछ दिनों के बाद कोरोना महामारी शुरू हो गई थी, इस दौरान एबुलेंस की कमी को पूरा करने के लिए इन्हीं गुलाबी बसों को एबुलेंस बनाकर इस्तेमाल किया गया था।
हालांकि, अपनी सफाई में अधिकारियों का कहना है कि जो गुलाबी बसें रोडवेज के पास है, वो बसें सुचारु रूप से छात्राओं के आने-जाने के लिए चलाई जा रही हैं। कई बार छात्राओं की संख्या ज्यादा होती है, तो बड़ी बस को भेजना पड़ता है। गुलाबी बसों में कुल 35 सीटें है, वहीं बड़ी बस में कुल 52 सीटें है। जिस कारण छात्राओं को छोड़ने के लिए बड़ी बसों को भेजना मजबूरी होती है। हालांकि, इससे छात्राओं के लिए विशेष तौर पर गुलाबी बसें चलाने का उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
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कोट
डिपो के पास कुल आठ गुलाबी बसें है, जो रोजाना सुबह नए बस स्टैंड से छात्राओं को उनके शिक्षण संस्थानों पर छोड़कर आती है। दोपहर के समय शिक्षण संस्थानों से छात्राओं को वापस भी लेकर आती है।
- सुभाष ढांड, संस्थान प्रंबंधक, फतेहाबाद
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हालांकि, भोड़ियाखेड़ा स्थित महिला महाविद्यालय की छात्राओं की संख्या अधिक होने पर रोडवेज अधिकारी उनके आने-जाने लिए बड़ी बसें भेजते हैं। मगर गुलाबी बसें छात्राओं व महिलाओं के लिए ही चलाने के बजाय ग्रामीण रूटों पर दौड़ रही हैं। फिलहाल तो गुलाबी बसों को वर्कशॉप में ही खड़ा किया गया है। रोडवेज प्रशासन के अनुसार हैप्पी कार्ड बांटने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगी हुई है, जिस कारण कई रूट प्रभावित हो रहे हैं। गुलाबी बसों को एक बार वर्कशॉप वाली खाली जगहों पर खड़ा किया हुआ है। वहीं जिस रूट पर कम सवारी होती है, उस रूट पर गुलाबी बसों को भेजा जाता है। गुलाबी बसों को जब फतेहाबाद डिपो में भेजा गया था, उसके कुछ दिनों के बाद कोरोना महामारी शुरू हो गई थी, इस दौरान एबुलेंस की कमी को पूरा करने के लिए इन्हीं गुलाबी बसों को एबुलेंस बनाकर इस्तेमाल किया गया था।
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हालांकि, अपनी सफाई में अधिकारियों का कहना है कि जो गुलाबी बसें रोडवेज के पास है, वो बसें सुचारु रूप से छात्राओं के आने-जाने के लिए चलाई जा रही हैं। कई बार छात्राओं की संख्या ज्यादा होती है, तो बड़ी बस को भेजना पड़ता है। गुलाबी बसों में कुल 35 सीटें है, वहीं बड़ी बस में कुल 52 सीटें है। जिस कारण छात्राओं को छोड़ने के लिए बड़ी बसों को भेजना मजबूरी होती है। हालांकि, इससे छात्राओं के लिए विशेष तौर पर गुलाबी बसें चलाने का उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
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डिपो के पास कुल आठ गुलाबी बसें है, जो रोजाना सुबह नए बस स्टैंड से छात्राओं को उनके शिक्षण संस्थानों पर छोड़कर आती है। दोपहर के समय शिक्षण संस्थानों से छात्राओं को वापस भी लेकर आती है।
- सुभाष ढांड, संस्थान प्रंबंधक, फतेहाबाद