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बे-बस ग्रामीण रूटों पर भटक रहे यात्री

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Nov 2021 11:09 PM IST
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Passengers wandering on bay-bus rural routes
बस में सवार होने के लिए पैदल चलकर लहरियां के बस स्टैंड पर जाते गांव रहनखेड़ी व भूंदड़ा के ग्रामीण? - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। लॉकडाउन के बाद पटरी से उतरी रोडवेज की परिवहन व्यवस्था अभी तक भी पटरी पर नहीं लौट पाई है। खासकर, ग्रामीण रूटों के यात्री बेहतरीन परिवहन सेवा से मोहताज हैं। कई ऐसे रूट हैं, जहां पर रोडवेज की बसें नहीं चलती और यात्री इधर-उधर धक्के खाने को मजबूर रहते हैं।
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लॉकडाउन से पहले जिन रूटों पर रोडवेज प्रशासन बसें भेज रहा था, उनमें से कई रूट खाली पड़े हैं। इससे ग्रामीण सवारियों से लेकर स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। दरअसल, कहने को तो 1997 में ही फतेहाबाद के जिला बनने के बाद जिला मुख्यालय पर हरियाणा रोडवेज ने बस डिपो बना दिया। मगर जिले के लोग आज भी परिवहन जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं। सिर्फ नेशनल हाईवे के साथ लगते गांवों में ही बेहतर बस सेवा मिल पा रही है। संवाद
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10 से ज्यादा गांव ऐसे, जहां हरियाणा बनने के बाद नहीं चली बस
जिले के 10 से ज्यादा गांव ऐसे हैं, जहां वर्षों से हरियाणा रोडवेज तो क्या प्राइवेट बसें भी नहीं चली हैं। इन गांवों के यात्रियों को दो से तीन किलोमीटर दूर पैदल चलकर दूसरे गांव के बस अड्डे से बसें पकड़नी पड़ती हैं। इन गांवों में भूना ब्लॉक के गांव दिगोह, भूंदड़ा, टिब्बी, कानीखेड़ी, रहनखेड़ी, बुवानकोठी, जाखल क्षेत्र के गांव शक्करपुरा आदि शामिल हैं। इन गांवों के ग्रामीणों को दूसरे गांव के बस अड्डे पर जाकर ही बस मिल पाती हैं।
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इन गांवों में लॉकडाउन के बाद से बंद हैं बसें
रतिया क्षेत्र के गांव कंवलगढ़, हुक्मावाली, सहनाल, गुरुसर, पालसर, बबनपुर ढाणी, लांबा ढाणी, स्कूल ढाणी में भी लॉकडाउन के बाद से ग्रामीण बसों के अभाव से जूझ रहे हैं। इन रूटों पर पहले परिवहन समितियों की बसें चलाई जाती थी। मगर मलाईदार रूट लेने के चक्कर में परिवहन समिति संचालकों ने इन रूटों को छोड़ दिया। बाद में रोडवेज ने यहां बसें चलाईं। फिर लॉकडाउन लगा तो बसों का संचालन बंद हो गया। लॉकडाउन तो खुल गया, लेकिन इन गांवों में बसें फिर से नहीं चल पाई हैं।
जिले में गांव 257, रूटों पर रोडवेज बसें सिर्फ 135
जिले में इस समय 257 गांवों के लिए रोडवेज प्रशासन के पास सिर्फ 135 बसें हैं, जो ऑन रूट हैं। इनमें से 100 जिला मुख्यालय के डिपो जबकि 35 टोहाना सब डिपो से चलती हैं। इनमें से भी कोई बस खराब हो जाए तो उसको कई दिनों के लिए वर्कशॉप में ही खड़ी कर दी जाती है।
जरूरत है दोगुनी बसें चलाने की
रोडवेज कर्मचारी यूनियन के जिला उपप्रधान राजू बिश्नोई बताते हैं कि जिले की आबादी 10 लाख तक पहुंच चुकी है। मगर बसों की संख्या आबादी के मुकाबले बेहद कम है। डिपो की स्थापना से लेकर अब तक कभी भी बसों का आंकड़ा 200 तक भी नहीं पहुंचा है। कई बसें तकनीकी खामियों के कारण डिपो में ही खड़ी रहती हैं। जिले में दोगुनी बसें चलाने की जरूरत हैं।
आबादी 10 लाख
गांव 257
ऑन रूट बस 135
कोट
जिले के ग्रामीण रूटों पर हर रोज विद्यार्थियों से लेकर आम यात्रियों को बसों का अभाव झेलना पड़ रहा है। विद्यार्थी बसों की छतों पर बैठ कर या खिड़की पर लटककर यात्रा करने को मजबूर हैं। सरकार को बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए।
संदीप समैण, विभाग संयोजक, एबीवीपी
हरियाणा गठन के बाद से हमारे गांव में आज तक बस नहीं चल पाई है। हमारे गांव के लोग पैदल चलकर गांव लहरियां के बस स्टैंड पर जाते हैं, तब बस मिल पाती है। सरकार को सुध लेनी चाहिए।

गुरविंद्र सिंह, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि, गांव रहनखेड़ी
जैसे-जैसे ग्रामीणों की डिमांड आती है, वैसे-वैसे उन रूटों पर बसों का संचालन शुरू करवा रहे हैं। इस महीने तक सारी व्यवस्था दुरुस्त करवाई जाएगी। ग्रामीणों को मौजूदा संसाधनों में बेहतर सुविधा देने का प्रयास जारी है।
आरएस पूनियां, महाप्रबंधक, फतेहाबाद डिपो

बस स्टैंड परिसर में रोडवेज बस में सवार होते यात्री।

बस स्टैंड परिसर में रोडवेज बस में सवार होते यात्री।- फोटो : Fatehabad

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