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यात्री रहे ज्यादा, कम पड़ गई बसें, बहनों को खड़े होकर करना पड़ा सफर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 01:09 AM IST
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Passengers remained more, buses fell short, women had to travel standing
सीटें भरने के बाद बस में खड़े यात्री। संवाद - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। रक्षाबंधन के मौके पर महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिली, लेकिन कई सुविधाओं का सामना करना पड़ा। बसों में भीड़ रही। यात्री ज्यादा हो गए और बसें कम पड़ गईं। हालांकि आम दिनों की तुलना में ज्यादा बसें चलाई गईं। मगर महिला यात्रियों की संख्या भी ज्यादा रही। इसलिए यात्रियों को घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ा। बसों में बैठने को जगह नहीं थी। इसलिए खड़े रहकर भी सफर करना पड़ा।
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आमतौर पर यात्रियों की संख्या कम होने के कारण 30 से 35 बसें डिपो में ही खड़ी रहती हैं। इसके चलते रूटीन में रोडवेज की 112 बसें ही विभिन्न रूटों पर चलाई जाती हैं। रविवार को रक्षाबंधन के मद्देनजर सभी 141 बसें विभिन्न रूटों पर चलाई गईं ताकि महिलाओं व बच्चों को यात्रा में कोई असुविधा न हो। इसके अलावा 60 प्राइवेट बसें भी नियमित रूप से चलीं। हालांकि महिलाओं को यात्रा के दौरान ज्यादा असुविधा नहीं हुई, लेकिन महामारी के मद्देनजर जारी निर्देशों का पालन नहीं हो पाया। तमाम बसें यात्रियों से ठूंस-ठूंस कर भरी हुई थीं। इसके चलते सामाजिक दूरी जैसे महत्वपूर्ण नियम का पालन कराना मुश्किल हो गया। चूंकि सरकार ने महिलाओं व बच्चों के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा दे रखी थी। इसलिए बसों में आम दिनों की तुलना में भीड़ डेढ़ से दो गुना तक ज्यादा रही। बसों में सामान्यतया 52 यात्रियों के बैठने की सुविधा होती है। मगर रविवार को प्रत्येक बस में 70 से 80 यात्रियों को सफर करना पड़ा। ऐसे में सामाजिक दूरी बनाना नामुकिन ही था।
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15 लाख होनी चाहिए, 7 लाख की रिकवरी हुई
आम दिनों में टिकटों से होने वाली कमाई रोजाना 12 लाख के करीब रहती है। यह कमाई तब होती है, जब 110 से 120 बसें चल रही होती हैं। 141 बसें चलने पर लगभग 15 लाख रुपये भाड़ा आना चाहिए। मगर रविवार को महिलाओं व बच्चों की टिकट माफ दी। सिर्फ पुरुषों की टिकट लगी, जिसके चलते केवल 5 लाख रुपये ही कमाई हो पाई।
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40 हजार महिलाओं व बच्चों ने उठाया लाभ
रविवार को रोडवेज की 31 बसें दिल्ली व चंडीगढ़ जैसे लंबे रूटों पर चल रही थीं। 110 बसें लोकल रूटों पर चलीं। इसके अलावा 60 प्राइवेट बसें चलीं। प्रत्येक बस में औसतन 70 यात्री थे। कुल 170 बसों में प्रत्येक चक्कर में लगभग 12 हजार लोगों ने सफर किया। दिन भर में लगभग 60 हजार यात्रियों ने सफर किया। इनमें करीब 20 हजार पुरुष यात्री रहे। बाकी बच्चे व महिलाएं थीं।
निजी वाहनों पर ज्यादा सफर किया
बेशक, बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई, लेकिन निजी वाहनों में भी लोगों ने खूब सफर किया। कई लोकल रूटों पर घंटों तक बसें नहीं आतीं। कई गांवों तक बसें जाती ही नहीं हैं। बसों में जगह की कमी रहती है। इस वजह से बहुत सारे लोग निजी वाहनों पर सफर करना ज्यादा पसंद करते हैं। इस वजह से दुपहिया वाहनों व गाड़ियों में भी लोगों को यात्रा करते देखा गया।

सभी कर्मचारी ड्यूटी पर रहे
हमने सभी कर्मियों को ड्यूटी पर लगाया हुआ था। सभी के अवकाश रद्द कर दिए गए, ताकि महिलाओं को दिक्कत न हो। जिले भर में लगभग141 बसें रोडवेज व करीब 60 निजी बसें चलीं हैं। इसके चलते महिलाओं को यात्रा में कोई परेशानी नहीं रही।
-मनफूल ढाका, रोडवेज डिपो प्रबंधक, फतेहाबाद।
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