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कमीशन का खेल: स्कूल संचालक लगवा रहे निजी प्रकाशकों की किताबें, दुकानें भी फिक्स, अभिभावक महंगी खरीदने को मजबूर

Mon, 04 Apr 2022 01:07 AM IST
भूपेंद्र सिंह मुकेश खुराना, संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
मुकेश खुराना, संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 04 Apr 2022 01:07 AM IST
सार

किताबों का सेट पहली कक्षा का तीन तो चौथी का चार हजार में मिल रहा है। किताबें लेने के लिए दुकानें भी फिक्स की गई है। वार्षिक शुल्क बंद करके मंथली फीस 30 फीसदी बढ़ाई गई है। 

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Parents forced to buy expensive books arbitrarily by school operators
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, अधिकतर निजी स्कूलों में सोमवार से नया सत्र शुरू हो जाएगा। नया सत्र शुरू होने के साथ किताबों और निजी स्कूलों की फीस ने अभिभावकों का बजट बिगाड़ दिया है। एनसीआरटीई की जगह निजी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगवा रहे, जो कि एक किताब ही 300 से 400 रुपये तक मिल रही है। कई स्कूल या तो खुद बाहर दुकानें खुलवाकर किताबें बेच रहे हैं या फिर दुकानों को ही अधिकृत कर दिया है। 

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वहीं स्कूल की किताबें एक ही दुकान पर मिल रही है दूसरी दुकान पर उस स्कूल की किताबें ही नहीं मिल रहीं हैं। इसके चलते मजबूरी में अभिभावकों को महंगे दाम में किताबें खरीदनी पड़ रही है। जिला शिक्षा विभाग इसको लेकर चुप्पी साधे हुए है।
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इस पर रोक लगाने के लिए न तो कोई टीम गठित हुई है और न ही स्कूलों में इसको लेकर जांच चल रही है। इसके अलावा कागज न मिलने के कारण पब्लिशर्स ने रेट भी बढ़ा दिए हैं। पिछले साल की तुलना में किताबों के रेट करीब 10 से 15 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। 
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पहली कक्षा का तीन तो चौथी का चार हजार रुपये तक मिल रहा किताबों का सेट 
स्कूलों को एनसीआरटीई की किताबें लगानी होती है जो कि सस्ती होती है। लेकिन अधिकतर स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की किताबें लगा रखी है जो कि 300 से 400 रुपये तक की है। जगजीवनपुरा निवासी राजकुमार का कहना है कि उसकी बेटी चौथी कक्षा में हुई है। उसकी किताबें करीब चार रुपये तक की आई है। इसके अलावा भट्टू रोड निवासी रवि कुमार का कहना है कि उसकी बेटी निजी स्कूल में पढ़ती है। दुकान फिक्स है और उसके अलावा अन्य दुकान से नहीं मिली है। किताबें और कॉपियां करीब तीन हजार तक की आई है। 
 
स्कूलों ने बाहर बनाई दुकानें, कर रहे कमाई 
शहर के कई निजी स्कूलों ने किताबें बेचने के लिए दुकानें खोल ली है। ये दुकानें सिर्फ दो से तीन माह के लिए ही खोली जाती है। स्कूल में किताबें नहीं बेच सकते है इसलिए बाहर ही दुकान खोल रखी है। दुकान में प्रत्येक कक्षा के सेट बना रखे है। छात्र को पूरा सेट दुकान से ही उपलब्ध करवा दिया जाता है। 
 
वार्षिक शुल्क खत्म, 1800 वाली फीस 3200 हुई 
नया सत्र शुरू होने के साथ निजी स्कूलों ने मासिक फीस में भी बढ़ोतरी की है। करीब 30 फीसदी तक फीस बढ़ा दी गई है। पहले निजी स्कूल जहां 1800 तक फीस ले रहे थे अब उस कक्षा की फीस 3200 तक कर दी गई है। पहली कक्षा की फीस 3200 रुपये कई निजी स्कूलों ने रखी है। अगर इसमें ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़ दें तो 4200 रुपये पहली कक्षा की फीस बनेगी। हालांकि निजी स्कूलों ने वार्षिक शुल्क बंद कर दिया है लेकिन इसको लेने का तरीका बदल दिया है। इसे मंथली फीस में जोड़ दिया है। 
 
10 फीसदी तक महंगी हुई हैं किताबें 
इस बार किताबें महंगी हुई, करीब 10 फीसदी तक रेट बढ़ चुके हैं। मुख्य कारण ये है कि पीछे कागज की कमी है। इसके चलते पब्लिशर्स ने रेट बढ़ा दिए हैं। पब्लिशर्स डिमांड भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। -देवेंद्र नारंग, संचालक ममता किताब घर  

 
लिखित शिकायत आएगी तो जांच करवाएंगे : डीइओ 

निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर हमारे पास कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। स्कूलों को एनसीआरटीई की किताबें लगवानी है। प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें नहीं लगवा सकते है। अभिभावकों की तरफ से कोई शिकायत नहीं आई है। -दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी 

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