{"_id":"64bea4ceeea7e1170902a244","slug":"only-43-percent-of-the-area-on-my-crop-my-details-portal-how-will-the-loss-be-recorded-on-the-compensation-portal-fatehabad-news-c-127-1-shsr1016-2671-2023-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad: मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 43 फीसदी ही क्षेत्र, कैसे क्षतिपूर्ति पोर्टल पर होगा नुकसान दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad: मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 43 फीसदी ही क्षेत्र, कैसे क्षतिपूर्ति पोर्टल पर होगा नुकसान दर्ज
Tue, 25 Jul 2023 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
कपिल शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
कपिल शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
Updated Tue, 25 Jul 2023 01:52 AM IST
सार
जिले के कई गांवों में अभी भी जलभराव होने और संपर्क टूटने से सीएससी बंद है, ऐसे में सवाल है कि कैसे पंजीकरण करवाएं। मेरी फसल मेरा ब्योरा पर दर्ज होने के बाद ही क्षतिपूर्ति पोर्टल खुलेगा। मोबाइल से पोर्टल पर नुकसान दर्ज करवा पाना किसानों के लिए आसान नहीं है।
विज्ञापन
गांव रूपावाली में बंद पड़ा कॉमन सर्विस सेंटर।
विस्तार
बाढ़ के कारण फतेहाबाद जिले की 41940 हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसलें नष्ट हो चुकी हैं। इन फसलों का मुआवजा पाने के लिए किसानों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। बाढ़ या जलभराव प्रभावित 127 गांवों में करीब 200 सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) बंद पड़े हैं। सबसे विकट समस्या यही है कि वही किसान क्षतिपूर्ति पोर्टल खोल पाएंगे, जो मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत हैं। ऐसे में सरकारी नियमों के फेर में कहीं किसानों के सपने टूट न जाएं।
अब तक जिले की सिर्फ 43 फीसदी कृषि भूमि यानि 2,40976 ही मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत हो पाई है। ज्यादातर किसान कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से ही पंजीकरण करवाते हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में काफी संख्या में सीएससी बंद पड़े हैं।
ऐसे में सरकारी दिशा निर्देशों में फंसकर किसानों के लिए मुआवजा पाना काफी मुश्किल हो जाएगा। गौरतलब है कि घग्गर नदी में आई बाढ़ और जलभराव के कारण जिले के 127 गांवों के खेतों में पानी भर गया है। इनमें सबसे अधिक नुकसान रतिया और जाखल क्षेत्र के गांवों में हुआ है।
विज्ञापन
यह है प्रक्रिया
किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेने व ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन करने के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसल पंजीकरण करवाने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। वहीं, नुकसान के मुआवजे के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर एक महीने के अंदर आवेदन कर सकते हैं। किसान ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर तभी नुकसान दर्ज करवा सकेंगे, जब उनका मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण होगा।
एंड्राॅयड फोन हैं तो यह विकल्प अपनाएं किसान
सीएससी की जिला प्रबंधक शिल्पा के अनुसार जिले के बाढ़ग्रस्त कई गांवों में सीएससी बंद हैं। ऐसे में किसान एंड्रॉयड फोन के जरिये भी मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके लिए मोबाइल के प्ले स्टोर में जाकर मेरी फसल मेरा ब्योरा मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करनी होगी, जिस पर किसान घर बैठे फसल का पंजीकरण कर सकते हैं। इसके बाद ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर खराब फसल के मुआवजे के लिए आवेदन हो जाएगा।
बाढ़ग्रस्त इलाके के कई गांवों में सीएससी बंद
किसान नेता मनदीप नथवान ने बताया कि अधिकांश गांवों में किसान सीएससी के माध्यम से ही अपनी फसल का पंजीकरण करवाते हैं। सीएससी बंद होने से किसानों को पंजीकरण करवाने में दिक्कत आ रही है। अब धान के अलावा नरमा-कपास की फसल की बिजाई की हुई थी। धान की बेल्ट जाखल, रतिया, कुलां में सौ फीसदी फसल चौपट हो गई है।
जिले में अभी तक 43 फीसदी से अधिक किसानों ने मेरा फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर कृषि भूमि का पंजीकरण करवाया है। यह आंकड़ा अभी और बढ़ेगा। किसानों को पंजीकरण के लिए कई विकल्प मिले हुए हैं। किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। -डॉ.राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग
बाढ़ के कारण किसानों की फसलों से लेकर मकानों तक को नुकसान हुआ है। सरकार द्वारा नुकसान का मुआवजा प्रदान किया जाना है। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को एक माह के लिए शुरू किया गया है। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन से पहले किसानों को मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पंजीकरण उपरांत खराब हुई फसल, मकान, दुकान, पशुधन व अन्य नुकसान के मुआवजा के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर एक महीने में आवेदन कर सकते हैं। -मनदीप कौर, डीसी, फतेहाबाद
जिले में बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का आंकड़ा
जिले में पंजीकृत हुए कृषि योग्य क्षेत्र का ब्योरा
क्षेत्र अनुमानित एरिया अभी तक पंजीकृत हुआ क्षेत्र
विज्ञापन
अब तक जिले की सिर्फ 43 फीसदी कृषि भूमि यानि 2,40976 ही मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत हो पाई है। ज्यादातर किसान कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से ही पंजीकरण करवाते हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में काफी संख्या में सीएससी बंद पड़े हैं।
विज्ञापन
ऐसे में सरकारी दिशा निर्देशों में फंसकर किसानों के लिए मुआवजा पाना काफी मुश्किल हो जाएगा। गौरतलब है कि घग्गर नदी में आई बाढ़ और जलभराव के कारण जिले के 127 गांवों के खेतों में पानी भर गया है। इनमें सबसे अधिक नुकसान रतिया और जाखल क्षेत्र के गांवों में हुआ है।
विज्ञापन
यह है प्रक्रिया
किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेने व ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन करने के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसल पंजीकरण करवाने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। वहीं, नुकसान के मुआवजे के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर एक महीने के अंदर आवेदन कर सकते हैं। किसान ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर तभी नुकसान दर्ज करवा सकेंगे, जब उनका मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण होगा।
एंड्राॅयड फोन हैं तो यह विकल्प अपनाएं किसान
सीएससी की जिला प्रबंधक शिल्पा के अनुसार जिले के बाढ़ग्रस्त कई गांवों में सीएससी बंद हैं। ऐसे में किसान एंड्रॉयड फोन के जरिये भी मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके लिए मोबाइल के प्ले स्टोर में जाकर मेरी फसल मेरा ब्योरा मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करनी होगी, जिस पर किसान घर बैठे फसल का पंजीकरण कर सकते हैं। इसके बाद ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर खराब फसल के मुआवजे के लिए आवेदन हो जाएगा।
बाढ़ग्रस्त इलाके के कई गांवों में सीएससी बंद
किसान नेता मनदीप नथवान ने बताया कि अधिकांश गांवों में किसान सीएससी के माध्यम से ही अपनी फसल का पंजीकरण करवाते हैं। सीएससी बंद होने से किसानों को पंजीकरण करवाने में दिक्कत आ रही है। अब धान के अलावा नरमा-कपास की फसल की बिजाई की हुई थी। धान की बेल्ट जाखल, रतिया, कुलां में सौ फीसदी फसल चौपट हो गई है।
जिले में अभी तक 43 फीसदी से अधिक किसानों ने मेरा फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर कृषि भूमि का पंजीकरण करवाया है। यह आंकड़ा अभी और बढ़ेगा। किसानों को पंजीकरण के लिए कई विकल्प मिले हुए हैं। किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। -डॉ.राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग
बाढ़ के कारण किसानों की फसलों से लेकर मकानों तक को नुकसान हुआ है। सरकार द्वारा नुकसान का मुआवजा प्रदान किया जाना है। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को एक माह के लिए शुरू किया गया है। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन से पहले किसानों को मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पंजीकरण उपरांत खराब हुई फसल, मकान, दुकान, पशुधन व अन्य नुकसान के मुआवजा के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर एक महीने में आवेदन कर सकते हैं। -मनदीप कौर, डीसी, फतेहाबाद
जिले में बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का आंकड़ा
- रतिया 13693 हेक्टेयर
- फतेहाबाद 11309 हेक्टेयर
- जाखल 7665 हेक्टेयर
- कुलां 2646 हेक्टेयर
- टोहाना 1897 हेक्टेयर
जिले में पंजीकृत हुए कृषि योग्य क्षेत्र का ब्योरा
क्षेत्र अनुमानित एरिया अभी तक पंजीकृत हुआ क्षेत्र
- भट्टू कलां 67702 एकड़ 13111 एकड़
- भूना 69286 एकड़ 23521 एकड़
- फतेहाबाद 170832 एकड़ 56423 एकड़
- जाखल 25961 एकड़ 20019 एकड़
- कुलां 34780 एकड़ 20479 एकड़
- रतिया 112816 एकड़ 74367 एकड़
- टोहाना 76056 एकड़ 33053 एकड़