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276 में से 28 गांवों में ही हर घर शौचालय
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
Updated Sun, 29 Nov 2015 11:44 PM IST
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पीएम मोदी ने देश के प्रत्येक गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए हर ग्रामीण घर में शौचालय बनाने का आह्वान किया था। इसके लिए केन्द्र सरकार की ओर से प्रदेश सरकार को मदद भी दी जाती रही है।
लेकिन सरकार के एक साल बीतने के बाद जो स्थिति सामने आई है, वो न केवल बदहाल है अपितु शर्मनाक भी है। इस योजना के तहत प्रदेश भर के तकरीबन 6973 गांवों को हर घर में शौचालय बनाने के लिए चुना गया था लेकिन प्रदेश के महज 719 गांव ही इस योजना पर अभी तक खरे उतर पाए हैं।
फतेहाबाद के 276 गांवों में से 28 गांव ही खुले में शौचमुक्त हो पाएं हैं। इसका मतलब है कि इन 28 गांवों के प्रत्येक घर में अब शौचालय हैं और इन गांवों का कोई व्यक्ति अब खुले में शौच के लिए नहीं जाता।
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लंबी प्रक्रिया को वजह मानते हैं अधिकारी
फतेहाबाद में इस परियोजना को अपेक्षित सफलता न मिलने के पीछे सबसे बड़ी वजह लंबी प्रक्रिया को माना जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए पहले आवेदक को अपने घर में शौचालय बनाना होता है।
इसके बाद प्रशासन का नुमाइंदा इसको वेरिफाई करता है। तब जाकर गांव को खुले में शौचमुक्त घोषित किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इसी वजह से इस योजना में अपेक्षित सफलता अभी तक नजर नहीं आई है।
पीएम मोदी ने दिया था देवालय की जगह शौचालय का नारा
पीएम मोदी ने अपनी एक चुनावी सभा में शौचालय का महत्व बताते हुए कहा था कि भले ही घर में देवालय न हो, लेकिन शौचालय अवश्य बनाना चाहिए।
सत्ता में आने के बाद भी उन्होंने लाल किले की प्राचीर से शौचालयों के निर्माण पर जोर दिया था। हरियाणा में बीजेपी सरकार बनने के बाद ये उम्मीद जताई गई थी कि प्रदेश की बीजेपी सरकार मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए जी-जान लगा देगी, लेकिन ताजा आंकड़ों से ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है।
इस परियोजना के तहत पहले शौचालय बनाने और फिर उसको वेरिफाई करने की प्रक्रिया काफी लंबी है। इस कारण आंकड़ों में पीछे हैं। लेकिन कई गांवों की वेरिफिकेशन पूरी होने वाली है। उम्मीद है कि जल्द ही आंकड़े सुधरेेंगे।
राजेश जोगपाल, एडीसी, फतेहाबाद ।
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लेकिन सरकार के एक साल बीतने के बाद जो स्थिति सामने आई है, वो न केवल बदहाल है अपितु शर्मनाक भी है। इस योजना के तहत प्रदेश भर के तकरीबन 6973 गांवों को हर घर में शौचालय बनाने के लिए चुना गया था लेकिन प्रदेश के महज 719 गांव ही इस योजना पर अभी तक खरे उतर पाए हैं।
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फतेहाबाद के 276 गांवों में से 28 गांव ही खुले में शौचमुक्त हो पाएं हैं। इसका मतलब है कि इन 28 गांवों के प्रत्येक घर में अब शौचालय हैं और इन गांवों का कोई व्यक्ति अब खुले में शौच के लिए नहीं जाता।
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लंबी प्रक्रिया को वजह मानते हैं अधिकारी
फतेहाबाद में इस परियोजना को अपेक्षित सफलता न मिलने के पीछे सबसे बड़ी वजह लंबी प्रक्रिया को माना जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए पहले आवेदक को अपने घर में शौचालय बनाना होता है।
इसके बाद प्रशासन का नुमाइंदा इसको वेरिफाई करता है। तब जाकर गांव को खुले में शौचमुक्त घोषित किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इसी वजह से इस योजना में अपेक्षित सफलता अभी तक नजर नहीं आई है।
पीएम मोदी ने दिया था देवालय की जगह शौचालय का नारा
पीएम मोदी ने अपनी एक चुनावी सभा में शौचालय का महत्व बताते हुए कहा था कि भले ही घर में देवालय न हो, लेकिन शौचालय अवश्य बनाना चाहिए।
सत्ता में आने के बाद भी उन्होंने लाल किले की प्राचीर से शौचालयों के निर्माण पर जोर दिया था। हरियाणा में बीजेपी सरकार बनने के बाद ये उम्मीद जताई गई थी कि प्रदेश की बीजेपी सरकार मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए जी-जान लगा देगी, लेकिन ताजा आंकड़ों से ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है।
इस परियोजना के तहत पहले शौचालय बनाने और फिर उसको वेरिफाई करने की प्रक्रिया काफी लंबी है। इस कारण आंकड़ों में पीछे हैं। लेकिन कई गांवों की वेरिफिकेशन पूरी होने वाली है। उम्मीद है कि जल्द ही आंकड़े सुधरेेंगे।
राजेश जोगपाल, एडीसी, फतेहाबाद ।