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अब पराली से बनेगी खाद, 25 दिन में कैप्सूल की मदद से पराली से बन जाएगी खाद
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गांव हुक्कमावाली के खेत में डेमो देते कम्पनी के अधिकारी।
- फोटो : Fatehabad
धान की कटाई के सीजन में फसलों के अवशेष किसानों और प्रशासन के लिए बड़ी मुसीबत बने हुए हैं। कई जगह पर किसानों द्वारा फसलों के अवशेष को नष्ट करने के लिए आग जलाई जाती हैं जिससे पर्यावरण दूषित तो होता ही है साथ में जमीन के मित्र कीट भी मर जाते हैं। किसान धान की पराली को आग न लगाए इसके लिए पराली प्रबंधन के लिए अनेक उपाय किए गए। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सहयोग से ऐसा उत्पाद तैयार कर रही है जो एक बॉयोकॉल्ज प्रा. लि. कंपनी के सहयोग से पराली से खाद बनाने के तहत तैयार कर रही है। यह कंपनी कैप्सूल से पराली को खाद में बदलेगी। इसी प्रोजेक्ट पर वीरवार को गांव हुकमावाली के किसान गुरतेग सिंह के खेत में डेमो किया गया। डेमों मेें किसानों को दिखाया गया कि पराली से 25 दिन बाद ही खाद बनाई जा सकती है। इस तकनीक से किसान आकर्षित भी हुए उन्होंने अपनाने का फैसला किया। जिले में यह पहला प्रयास है।
दिल्ली स्थित पूसा के वैज्ञानिकों ने इस समस्या के समाधान के लिए हल खोज लिया है। एक बॉयोकॉल्ज प्रा. लि. कंपनी द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सहयोग से उत्पाद तैयार किया है जो बिना किसी प्रदूषण के पराली से पूरी तरह से निजात दिला देता है। इस उत्पाद के इस्तेमाल से खेतों की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। अनुसंधान परिषद व कंपनी के अधिकारियों ने गांव हुक्कमावाली में इसका डेमो किया गया। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। किसान गुरतेग कुमार ने बताया कि अगर इस तरीके से पराली को नष्ट किया जाता है तो किसानों को इससे बहुत लाभ मिलेगा।
यूं बनती है पराली से खाद
कृषि उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि धान की कटाई से 10 दिन पहले पूसा डीकंपोजर मंगवा ले। उसे 5 लीटर पानी 150 ग्राम गुड, 50 ग्राम बेसन, एक ड्रम व एक लकड़ी की छड़ी ले। 5 लीटर पानी में 150 ग्राम गुड़ को अच्छे से उबाले जब चासनी बन जाए तो ठंडा कर ले। उसके बाद इस घोल में 50 ग्राम बेसन मिला दे। इसके बाद उसमें कैप्सूल के बिजाणु डाले दे। फिर घोल को अच्छे से मिलाकर चार दिन के लिए छाया में ढक दे। चार दिन बाद इस घोल पर मोटी परत आ जाएगी। उसके बाद यह प्रक्रिया 5 लीटर पानी व 150 ग्राम गुड़ अच्छे से मिलाकर गर्म कर ठंडा कर लेंगे। यह प्रक्रिया चार बार करनी होगी। तैयार वाला घोल नए घोल में मिला दे। उसमें 1.25 लीटर पानी मिला देंगे। चार दिन में छाया में ढककर रख दे। जिससे हमें 25 लीटर घोल प्राप्त होगा। यानी कैप्सूल से घोल तक आठ दिन का समय लगेगा।
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ऐसे करे प्रयोग : 25 लीटर घोल को 500 लीटर पानी में मिला दे। जो एक हेक्टेयर के करीब पर्याप्त है जो धान की कटाई के बाद धान की पराली बच जाती है उस पराली को इस घोल का स्प्रे एक हेक्टेयर में करे। स्प्रे के बाद जमीन में रोटा वेटर चलाए व पलवा करके बिजाई करे। पराली स्प्रे करने के अगले दिन ही गलना शुरू हो जाएगी और 25 दिन बार पराली खाद बन जाएगी।
यह तरीका अपने आप में कारगार है। इसका पहले भी डेमो किया गया है। इससे पराली की सारी समस्याएं दूर हो जाएगी। कृषि विभाग के एसडीओ भीम सिंह ने बताया कि आज एमडी बॉयोकॉल्ज प्रा. लि. कंपनी द्वारा डेमो दिया जा रहा है। इससे फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिलाने में काफी सहायता मिलेगी और किसान फसलों के अवशेष नहीं जलाएंगे। -राजकुमार बिश्नोई, कंपनी अधिकारी।
यहां डीकंपोजर का डेमो दिया जा रहा है। इससे खेत की पराली को जमीन में ही गला सकते है और यही पराली खेत के लिए खाद का कार्य करेगी। इससे यूरिया और अन्य रासायनिक खादों से निजात मिलेगी। -मनीष सेठी, हेड हैड ऑफ़ रिसर्च एंड डिपार्टमेंट, एमडी बॉयोकॉल्ज प्रा. लि. कंपनी।
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दिल्ली स्थित पूसा के वैज्ञानिकों ने इस समस्या के समाधान के लिए हल खोज लिया है। एक बॉयोकॉल्ज प्रा. लि. कंपनी द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सहयोग से उत्पाद तैयार किया है जो बिना किसी प्रदूषण के पराली से पूरी तरह से निजात दिला देता है। इस उत्पाद के इस्तेमाल से खेतों की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। अनुसंधान परिषद व कंपनी के अधिकारियों ने गांव हुक्कमावाली में इसका डेमो किया गया। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। किसान गुरतेग कुमार ने बताया कि अगर इस तरीके से पराली को नष्ट किया जाता है तो किसानों को इससे बहुत लाभ मिलेगा।
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यूं बनती है पराली से खाद
कृषि उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि धान की कटाई से 10 दिन पहले पूसा डीकंपोजर मंगवा ले। उसे 5 लीटर पानी 150 ग्राम गुड, 50 ग्राम बेसन, एक ड्रम व एक लकड़ी की छड़ी ले। 5 लीटर पानी में 150 ग्राम गुड़ को अच्छे से उबाले जब चासनी बन जाए तो ठंडा कर ले। उसके बाद इस घोल में 50 ग्राम बेसन मिला दे। इसके बाद उसमें कैप्सूल के बिजाणु डाले दे। फिर घोल को अच्छे से मिलाकर चार दिन के लिए छाया में ढक दे। चार दिन बाद इस घोल पर मोटी परत आ जाएगी। उसके बाद यह प्रक्रिया 5 लीटर पानी व 150 ग्राम गुड़ अच्छे से मिलाकर गर्म कर ठंडा कर लेंगे। यह प्रक्रिया चार बार करनी होगी। तैयार वाला घोल नए घोल में मिला दे। उसमें 1.25 लीटर पानी मिला देंगे। चार दिन में छाया में ढककर रख दे। जिससे हमें 25 लीटर घोल प्राप्त होगा। यानी कैप्सूल से घोल तक आठ दिन का समय लगेगा।
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ऐसे करे प्रयोग : 25 लीटर घोल को 500 लीटर पानी में मिला दे। जो एक हेक्टेयर के करीब पर्याप्त है जो धान की कटाई के बाद धान की पराली बच जाती है उस पराली को इस घोल का स्प्रे एक हेक्टेयर में करे। स्प्रे के बाद जमीन में रोटा वेटर चलाए व पलवा करके बिजाई करे। पराली स्प्रे करने के अगले दिन ही गलना शुरू हो जाएगी और 25 दिन बार पराली खाद बन जाएगी।
यह तरीका अपने आप में कारगार है। इसका पहले भी डेमो किया गया है। इससे पराली की सारी समस्याएं दूर हो जाएगी। कृषि विभाग के एसडीओ भीम सिंह ने बताया कि आज एमडी बॉयोकॉल्ज प्रा. लि. कंपनी द्वारा डेमो दिया जा रहा है। इससे फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिलाने में काफी सहायता मिलेगी और किसान फसलों के अवशेष नहीं जलाएंगे। -राजकुमार बिश्नोई, कंपनी अधिकारी।
यहां डीकंपोजर का डेमो दिया जा रहा है। इससे खेत की पराली को जमीन में ही गला सकते है और यही पराली खेत के लिए खाद का कार्य करेगी। इससे यूरिया और अन्य रासायनिक खादों से निजात मिलेगी। -मनीष सेठी, हेड हैड ऑफ़ रिसर्च एंड डिपार्टमेंट, एमडी बॉयोकॉल्ज प्रा. लि. कंपनी।