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Fatehabad News: अब चेयरमैनी की दौड़ में लगेंगे जिले के भाजपा नेता
Sun, 13 Oct 2024 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 13 Oct 2024 12:31 AM IST
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फतेहाबाद। जिले में अब पांच साल भाजपा को चेयरमैनी के सहारे ही सत्ता चलानी होगी। जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक चुने गए हैं। ऐसे में सरकारी तंत्र पर पकड़ बनाए रखने के लिए चेयरमैन की नियुक्ति करना भाजपा के लिए मजबूरी बन गई है। हालांकि, इस समय सरकारी सिस्टम के फ्रेम में राज्यसभा सांसद सुभाष बराला प्रमुखता से स्थान बनाए हुए हैं।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव से दो महीने पहले मार्च में भाजपा के वरिष्ठ नेता भारतभूषण मिड्ढा को एग्रो इंडस्ट्रीज और वेद फुलां को हरकोफेड का चेयरमैन बनाकर सरकार में भागीदारी दी गई थी। मगर दोनों अधिकतर समय चुनावी मोड में ही रहे, इसलिए कोई ज्यादा छाप नहीं छोड़ सके। इससे पहले साढ़े नौ साल तक फतेहाबाद विधानसभा तो क्या पूरे जिले से एक भी चेयरमैन सरकार ने नहीं बनाया था।
संगठन में भी बदलाव की हो रही चर्चाएं : इसके अतिरिक्त जिले में भाजपा संगठन में बदलाव की चर्चाएं भी उठ रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि जिलाध्यक्ष भी बदले जाएंगे। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। रतिया और टोहाना में भी सांगठनिक ढांचे में नए सिरे से कार्यकर्ताओं को फिट करने की कोशिश रहेगी क्योंकि यहां के नेता भी अब बदल चुके हैं।
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टोहाना में देवेंद्र सिंह बबली भाजपा में शामिल होने से उनकी टीम और रतिया से लक्ष्मण नापा के जाने के बाद वहां सुनीता दुग्गल की प्रमुखता होने से उनके कार्यकर्ताओं को भी भाजपा को संगठन में समायोजित करना होगा।
साल 2014 में रतिया विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बाद सुनीता बनी थीं चेयरपर्सन
रतिया विधानसभा क्षेत्र से साल 2014 में सुनीता दुग्गल ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। मगर उस चुनाव में उन्हें मात्र 453 वोटों से हार झेलनी पड़ी थी। इसके बाद उन्हें हरियाणा सरकार में हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की चेयरपर्सन बनाया गया। इसके बाद साल 2019 में सिरसा लोकसभा सीट से वह सांसद चुनी गई। इस बार भी उन्हें रतिया विधानसभा सीट से भाजपा ने प्रत्याशी बनाया था, लेकिन वह 21,442 वोटों से हार गई। ऐसे में इस बार भी सुनीता दुग्गल को किसी बोर्ड या निगम का चेयरपर्सन बनाने की संभावना बढ़ गई है क्योंकि वह अनुसूचित जाति वर्ग और महिला वर्ग दोनों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
विकास प्रोजेक्ट्स को जारी रखवाना रहेगी चुनौती
जिले में बेशक भाजपा हार गई हो, लेकिन प्रदेश में सरकार बनाने में सफल रही हैं। ऐसे में जिले में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स को सिरे चढ़वाना पूर्व विधायकों दुड़ाराम, देवेंद्र बबली से लेकर राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला और चेयरमैनी पाने वाले नेताओं के लिए चुनौती रहेगी। जिले का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट मेडिकल कॉलेज हैं, जिसको गांव रसूलपुर में बनवाने की घोषणा हो चुकी है। इसके लिए 1100 करोड़ रुपये भी मंजूर हो चुके हैं, लेकिन अभी तक शिलान्यास नहीं हो सका है।
प्रदेश सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के बाद ही आगे की गतिविधियां शुरू होंगी। निश्चित रूप से पार्टी अपने निष्ठावान कार्यकर्ताओं की सरकार में भागीदारी करेगी।
-बलदेव सिंह ग्रोहा, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव से दो महीने पहले मार्च में भाजपा के वरिष्ठ नेता भारतभूषण मिड्ढा को एग्रो इंडस्ट्रीज और वेद फुलां को हरकोफेड का चेयरमैन बनाकर सरकार में भागीदारी दी गई थी। मगर दोनों अधिकतर समय चुनावी मोड में ही रहे, इसलिए कोई ज्यादा छाप नहीं छोड़ सके। इससे पहले साढ़े नौ साल तक फतेहाबाद विधानसभा तो क्या पूरे जिले से एक भी चेयरमैन सरकार ने नहीं बनाया था।
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संगठन में भी बदलाव की हो रही चर्चाएं : इसके अतिरिक्त जिले में भाजपा संगठन में बदलाव की चर्चाएं भी उठ रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि जिलाध्यक्ष भी बदले जाएंगे। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। रतिया और टोहाना में भी सांगठनिक ढांचे में नए सिरे से कार्यकर्ताओं को फिट करने की कोशिश रहेगी क्योंकि यहां के नेता भी अब बदल चुके हैं।
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टोहाना में देवेंद्र सिंह बबली भाजपा में शामिल होने से उनकी टीम और रतिया से लक्ष्मण नापा के जाने के बाद वहां सुनीता दुग्गल की प्रमुखता होने से उनके कार्यकर्ताओं को भी भाजपा को संगठन में समायोजित करना होगा।
साल 2014 में रतिया विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बाद सुनीता बनी थीं चेयरपर्सन
रतिया विधानसभा क्षेत्र से साल 2014 में सुनीता दुग्गल ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। मगर उस चुनाव में उन्हें मात्र 453 वोटों से हार झेलनी पड़ी थी। इसके बाद उन्हें हरियाणा सरकार में हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की चेयरपर्सन बनाया गया। इसके बाद साल 2019 में सिरसा लोकसभा सीट से वह सांसद चुनी गई। इस बार भी उन्हें रतिया विधानसभा सीट से भाजपा ने प्रत्याशी बनाया था, लेकिन वह 21,442 वोटों से हार गई। ऐसे में इस बार भी सुनीता दुग्गल को किसी बोर्ड या निगम का चेयरपर्सन बनाने की संभावना बढ़ गई है क्योंकि वह अनुसूचित जाति वर्ग और महिला वर्ग दोनों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
विकास प्रोजेक्ट्स को जारी रखवाना रहेगी चुनौती
जिले में बेशक भाजपा हार गई हो, लेकिन प्रदेश में सरकार बनाने में सफल रही हैं। ऐसे में जिले में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स को सिरे चढ़वाना पूर्व विधायकों दुड़ाराम, देवेंद्र बबली से लेकर राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला और चेयरमैनी पाने वाले नेताओं के लिए चुनौती रहेगी। जिले का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट मेडिकल कॉलेज हैं, जिसको गांव रसूलपुर में बनवाने की घोषणा हो चुकी है। इसके लिए 1100 करोड़ रुपये भी मंजूर हो चुके हैं, लेकिन अभी तक शिलान्यास नहीं हो सका है।
प्रदेश सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के बाद ही आगे की गतिविधियां शुरू होंगी। निश्चित रूप से पार्टी अपने निष्ठावान कार्यकर्ताओं की सरकार में भागीदारी करेगी।
-बलदेव सिंह ग्रोहा, जिलाध्यक्ष, भाजपा