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सरकारी खरीद हुई नहीं, निजी हाथों में 650 रुपये तक कम रेट में बेचा बाजरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 14 Oct 2022 10:09 PM IST
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No government procurement, bajra sold to private hands at a lower rate of up to Rs 650
अनाज मंडी में लगी बाजरे की ढेरी। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। इस बार फतेहाबाद जिले में बाजरा उत्पादक किसानों पर सरकारी तंत्र की मार पड़ी है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से 600 से 650 रुपये तक कम दाम मिले हैं। पहले तो खरीद एजेंसी हैफेड ने खरीद से हाथ खींच लिए, फिर भावांतर योजना के लाभ से भी किसान वंचित रह गए। सरकारी खरीद न होने से किसानों को अपनी बाजरे की फसल निजी हाथों में औने पौने दामों में बेचनी पड़ रही है। सरकार ने बाजरा उत्पादक किसानों के लिए भावांतर भरपाई योजना के तहत 450 रुपये प्रति क्विंटल देने की घोषणा की है, लेकिन फिलहाल किसानों को यह लाभ भी नहीं मिल रहा है।
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बता दें कि जिले में राजस्थान से सटे गांवों में बाजरे की बिजाई होती है। भट्टू कलां, फतेहाबाद व भूना में किसानों ने पांच हजार 475 एकड़ जमीन पर इस बार बाजरे की बिजाई की थी। सरकार ने भी इस बार बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2350 रुपये किया था। मगर जब किसान बाजरा लेकर मंडियों में आए तो सरकारी खरीद शुरू ही नहीं की गई और किसानों का बाजरा एमएसपी से 650 रुपये कम में बिका। बता दें कि फतेहाबाद की अनाज मंडियों में पिछले साल की अपेक्षा इस बार बाजरे की आवक काफी कम रही है। पिछले साल जहां अब तक 2688 क्विंटल बाजरा अनाज मंडियों में आया था, वहीं इस बार मात्र 976 क्विंटल बाजरे की फसल ही मंडियों में आई है।
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बारिश के कारण खराब हुई थी बाजरे की फसल
फतेहाबाद में 24 सितंबर को भयंकर बारिश होने के कारण किसानों की बाजरे की फसल खराब हो गई थी। कई किसानों के खेतों में तो बाजरे की बाली पर ही अंकुरण होने लगा था और बाजरे का दाना भी काला पड़ गया। भट्टू कलां क्षेत्र में बाजरे की अधिक बिजाई होती है, लेकिन इस बार बारिश के कारण सबसे अधिक बाजरा इसी क्षेत्र में प्रभावित हुआ है। यही वजह है कि भट्टूकलां की अनाज मंडी में वीरवार तक बाजरे की एक भी ढेरी नहीं आई थी। शुक्रवार को भट्टू कलां की अनाज मंडी में करीब छह क्विंटल बाजरा आया।
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एमएसपी से कम बिक रहा बाजरा
अनाज मंडियों में किसानों का बाजरा एमएसपी से 650 रुपये कम बिक रहा है। इसके पीछे बड़ा कारण सरकारी खरीद न होना है। बाजरे की सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों को निजी हाथों में औने पौने दाम में अपनी बाजरे की फसल बेचनी पड़ रही है। फतेहाबाद की मंडियों में किसानों की बाजरे की फसल 1750 रुपये से 1850 रुपये के बीच बिक रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
नहीं मिल रहा भावांतर भरपाई योजना का लाभ
सरकार ने किसानों के बाजरे की फसल के कम दाम मिलने पर भावांतर भरपाई योजना के तहत 450 रुपये प्रति क्विंटल देने की घोषणा की है। लेकिन फतेहाबाद में अभी तक किसानों को इसका फायदा नहीं मिला है। भट्टू मंडी में बाजरा बेचने आए गांव सुलीखेड़ा के किसान संदीप ने बताया कि इस बार उसके खेत में छह क्विंटल बाजरा हुआ है। मौसम की मार के कारण पहले ही बाजरा खराब हो गया था, जो बचा बाजरा था, उसके दाम सरकारी खरीद न होने के कारण सही नहीं मिल रहे हैं। सरकार ने भावांतर भरपाई योजना की बात कही है, लेकिन अभी तक उनको इसका कोई लाभ नहीं मिला है। इस बार बाजरा उत्पादक किसानों को भारी नुकसान हुआ है, सरकार को किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
खराब क्वालिटी का हवाला देकर हैफेड ने नहीं की खरीद
अनाज मंडी में बाजरे की फसल की आवक के बाद हैफेड ने बाजरे की गुणवत्ता की जांच करवाई थी। हैफेड के अधिकारियों के अनुसार, इस बार बाजरे की क्वालिटी खराब है, जिस कारण सरकारी खरीद नहीं की गई है। खराब बाजरे को गोदामों में रखने का भी कोई फायदा दिखाई नहीं दे रहा।

कोट
बाजरे की सरकारी खरीद इस बार नहीं की गई है। अनाज मंडियों में जो बाजरा आया था, उसकी गुणवत्ता चेक करवाई गई थी, जो फेल आई है। बाजरा पूरी तरह से डिस्कलर आ रहा है। वहीं, अनाज मंडियों में पिछले साल की बजाय इस बार बाजरा भी कम आया है।
-राजेश हुड्डा, डीएम, हैफेड
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