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Fatehabad News: सुविधाएं नहीं, कोच बलवान गढ़ रहे खिलाड़ियों का भविष्य

Thu, 04 Jun 2026 10:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 04 Jun 2026 10:46 PM IST
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No facilities, coach Balwan is shaping the future of the players
गांवं पारता के स्कूल मैदान में खेल की तैयारी करते हुए बच्चे संवाद
समैन। चीन के हांगकांग में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करने वाली अंतरराष्ट्रीय एथलीट पूजा की सफलता के पीछे उनके कोच बलवान सिंह का वर्षों का परिश्रम है। विशेष खेल सुविधाओं के अभाव के बावजूद बलवान सिंह आज भी ग्रामीण क्षेत्र के करीब 40 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर उनका भविष्य संवारने में जुटे हैं।
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गांव बोस्ती की खिलाड़ी पूजा ने एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1.93 मीटर की शानदार ऊंची कूद लगाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने 14 वर्ष पुराना सीनियर नेशनल रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। पूजा की इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। कोच बलवान सिंह ने बताया कि सीमित संसाधनों के बीच ही पूजा ने अपने खेल जीवन की शुरुआत की थी। करीब आठ वर्षों तक उसने गांव पारता के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में नियमित अभ्यास किया और एथलेटिक्स की बारीकियां सीखीं।
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उन्होंने कहा कि पूजा की उपलब्धि पर उन्हें गर्व है। उसने कठिन परिस्थितियों में अपने सपनों को साकार कर देश और जिले का मान बढ़ाया है। हालांकि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं की कमी बनी हुई है जिससे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बलवान सिंह का कहना है कि यदि खिलाड़ियों को बेहतर ट्रैक, आधुनिक उपकरण और अन्य आवश्यक सुविधाएं मिलें तो क्षेत्र से कई और प्रतिभाएं राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। संवाद
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-कोच को तीन माह से नहीं मिला वेतन



पूजा को 8 साल तक लगातार अभ्यास करवाने वाले कोच बलवान सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की तरफ से उन्हें गांव पारता में एथलेटिक्स की खेल नर्सरी मिली हुई है। यहां सुबह शाम 40 खिलाड़ी अभ्यास करने के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीने से उन्हें वेतन भी नहीं मिला है। कोच बलवान सिंह ने कहा कि पिछले लंबे समय से गांव में खेल स्टेडियम बनवाने की मांग कर रहे हैं लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई विशेष सुविधाएं नहीं मिल पाई है। उन्होंने खिलाड़ियों को दी जाने वाली सभी सुविधाएं अपने स्तर पर ही जुटाई हैं।



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वह एथलेटिक्स की तैयारी अपने स्तर पर ही कर रही है। सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है। मैदान में न तो शौचालय है और न ही लाइट की व्यवस्था है।

- प्रियंका, खिलाड़ी।

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यहां 15 गांवों के खिलाड़ी तैयारी करने के लिए आते हैं लेकिन सामान के अभाव में सही से अभ्यास भी नहीं कर पाते। मैदान में गंदगी फैली हुई है और खुद ही सफाई करनी पड़ती है।


- लक्ष्य, खिलाड़ी।

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मैदान में शौचालय न होना सबसे बड़ी समस्या है। इसके अलावा यहां पर लाइट की व्यवस्था भी नहीं है। मैदान स्कूल में बना है लेकिन छुट्टी के चलते उसे बंद कर दिया जाता है।

- मेघा, खिलाड़ी।
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