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Fatehabad News: अस्पताल में 6 हजार से ज्यादा शवों का चीरफाड़ कर चुके मुरारी लाल हुए सेवानिवृत्त
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सेवानिवृत हुए मुरारी लाल
फतेहाबाद। जिला नागरिक अस्पताल में पिछले 20 सालों से पोस्टमार्टम के लिए शव का चीरफाड़ करने वाले कर्मचारी मुरारी लाल बुधवार को सेवानिवृत्त हो गए। मुरारी लाल की सेवानिवृत्ति को लेकर नागरिक अस्पताल में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। मुरारी लाल जिला नागरिक अस्पताल में 6 हजार से ज्यादा शवों का चीरफाड़ कर चुके हैं।
मुरारी लाल ने ये शुरूआत तब की थी जब चीरफाड़ के लिए कोई भी शव को हाथ लगाने के लिए तैयार नहीं था। सफाई कर्मचारी के पद पर तैनात हुए मुरारी लाल ने ये काम संभाला और परिवार के लोगों का शव लेने से पहले पोस्टमार्टम के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। मुरारी लाल कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से शुरू में दावा किया गया था कि 5 रुपये प्रति शव के मिलेंगे, लेकिन नहीं मिले। इसके बाद 500 रुपये प्रति शव देने की बात कही गई, लेकिन वह भी नहीं मिले। आखिर में देने से मना ही कर दिया गया।
कभी नहीं डरे, एक दिन में 8 शवों तक का करवाया पोस्टमार्टम
मुरारी लाल बताते हैं कि पहले वह रेवाड़ी में तैनात थे, इसके बाद ट्रांसफर कनीना में हो गई। करीब 20 साल पहले नागरिक अस्पताल में ट्रांसफर हुई। यहां पर पोस्टमार्टम के लिए शव को चीरने को कोई तैयार नहीं था। इसके चलते परिजनों को परेशानी होती थी। इसको लेकर वह आगे आए और काम शुरू किया। एक दिन में 8-8 शवों का पोस्टमार्टम करवाया। भूना, रतिया, फतेहाबाद, भट्टू क्षेत्र के शव पोस्टमार्टम के लिए यहीं आते हैं।
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-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए तकनीकी पद न होने के चलते पूर्व में ट्रेनिंग देकर सफाई कर्मी मुरारी व्यवस्था संभाल रहा था। पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टर और फार्मासिस्ट को मानदेय मिल रहा है, लेकिन तकनीकी पद न होने के चलते मुरारी को अलग से मानदेय नहीं मिल पाया। मुरारी लाल बुधवार को सेवानिवृत्त हो गए।
- डॉ. सुभाष, कार्यकारी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी
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मुरारी लाल ने ये शुरूआत तब की थी जब चीरफाड़ के लिए कोई भी शव को हाथ लगाने के लिए तैयार नहीं था। सफाई कर्मचारी के पद पर तैनात हुए मुरारी लाल ने ये काम संभाला और परिवार के लोगों का शव लेने से पहले पोस्टमार्टम के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। मुरारी लाल कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से शुरू में दावा किया गया था कि 5 रुपये प्रति शव के मिलेंगे, लेकिन नहीं मिले। इसके बाद 500 रुपये प्रति शव देने की बात कही गई, लेकिन वह भी नहीं मिले। आखिर में देने से मना ही कर दिया गया।
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कभी नहीं डरे, एक दिन में 8 शवों तक का करवाया पोस्टमार्टम
मुरारी लाल बताते हैं कि पहले वह रेवाड़ी में तैनात थे, इसके बाद ट्रांसफर कनीना में हो गई। करीब 20 साल पहले नागरिक अस्पताल में ट्रांसफर हुई। यहां पर पोस्टमार्टम के लिए शव को चीरने को कोई तैयार नहीं था। इसके चलते परिजनों को परेशानी होती थी। इसको लेकर वह आगे आए और काम शुरू किया। एक दिन में 8-8 शवों का पोस्टमार्टम करवाया। भूना, रतिया, फतेहाबाद, भट्टू क्षेत्र के शव पोस्टमार्टम के लिए यहीं आते हैं।
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- डॉ. सुभाष, कार्यकारी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी