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Fatehabad News: नगर परिषद प्रधान ने ईओ को भेजा पत्र, पशुओं के कारण अब दुर्घटना हुई तो आप होंगे जिम्मेदार
Tue, 14 May 2024 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 14 May 2024 01:42 AM IST
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फतेहाबाद में बंदरों के हमले से बचने के लिए सीढि़यों से गिरकर घायल हुई महिला।
फतेहाबाद। शहर की भीमां बस्ती में बंदरों के हमले से जान बचाने के लिए भागी महिला के सीढि़यों पर फिसलने से दोनों पैर टूट गए। उनके दोनों पैरों पर पलस्तर बांधा गया है। तीन माह में बंदरों के हमले में पैर टूटने का यह दूसरा मामला है। इस मामले में नगर परिषद प्रधान राजेंद्र सिंह खिंची ने ईओ राजेंद्र सोनी को सख्त लहजे में पत्र भेजा है। पत्र में यहां तक लिखा गया गया है कि पशुओं के कारण भविष्य में कोई दुर्घटना होती है तो आप जिम्मेदार होंगे। पशुओं को पकड़ने के लिए नगर परिषद के प्रधान पहले भी अधिकारियों को पत्र भेज चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
बंदरों की वजह से पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ईओ को जारी पत्र में नगर परिषद प्रधान ने लिखा है कि बंदर, कुत्तों और गोवंश को पकड़ने के लिए पहले भी पत्र लिखा जा चुका है। अब फिर भीमां बस्ती में बंदरों के हमले से महिला के दोनों पैर टूट चुके हैं। इससे शहरवासियों में रोष है और नगर परिषद के प्रति विरोध है। इसलिए शहरी क्षेत्र में घूम रहे बंदर, गोवंश, कुत्तों को पकड़वाने में जल्द तेजी लाई जाए। अगर भविष्य में बंदर, गोवंश और कुत्तों के कारण शहर में कोई दुर्घटना होती है तो उसके जिम्मेदार आप होंगे।
बंदरों को पकड़ने के लिए आठ लाख और गोवंश पर खर्च चुके तीन लाख रुपये :
नगर परिषद ने बंदरों को पकड़ने के लिए एजेंसी को ठेका दिया गया है। एजेंसी तीन बार में करीब 380 बंदर पकड़ चुकी है। नगर परिषद ने एक बंदर को पकड़ने के लिए 2,150 रुपये में ठेका दिया गया है। करीब आठ लाख रुपये नगर परिषद खर्च कर चुकी है। गोवंश को पकड़ने के लिए नगर परिषद ने रेवाड़ी की एजेंसी को 920 रुपये प्रति पशु की दर से ठेका दिया है। इस पर करीब तीन लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। लेकिन स्थिति नहीं सुधर सकी है।
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बंदरों की वजह से पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ईओ को जारी पत्र में नगर परिषद प्रधान ने लिखा है कि बंदर, कुत्तों और गोवंश को पकड़ने के लिए पहले भी पत्र लिखा जा चुका है। अब फिर भीमां बस्ती में बंदरों के हमले से महिला के दोनों पैर टूट चुके हैं। इससे शहरवासियों में रोष है और नगर परिषद के प्रति विरोध है। इसलिए शहरी क्षेत्र में घूम रहे बंदर, गोवंश, कुत्तों को पकड़वाने में जल्द तेजी लाई जाए। अगर भविष्य में बंदर, गोवंश और कुत्तों के कारण शहर में कोई दुर्घटना होती है तो उसके जिम्मेदार आप होंगे।
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बंदरों को पकड़ने के लिए आठ लाख और गोवंश पर खर्च चुके तीन लाख रुपये :
नगर परिषद ने बंदरों को पकड़ने के लिए एजेंसी को ठेका दिया गया है। एजेंसी तीन बार में करीब 380 बंदर पकड़ चुकी है। नगर परिषद ने एक बंदर को पकड़ने के लिए 2,150 रुपये में ठेका दिया गया है। करीब आठ लाख रुपये नगर परिषद खर्च कर चुकी है। गोवंश को पकड़ने के लिए नगर परिषद ने रेवाड़ी की एजेंसी को 920 रुपये प्रति पशु की दर से ठेका दिया है। इस पर करीब तीन लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। लेकिन स्थिति नहीं सुधर सकी है।
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