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मानसून सिर पर, स्वास्थ्य विभाग बेफिक्र

Fri, 20 Jun 2014 11:32 PM IST
fatehabad
fatehabad Updated Fri, 20 Jun 2014 11:32 PM IST
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मानसून सिर पर है। शहर में सफाई व्यवस्था का जिम्मा लिए नगरपरिषद व जनस्वास्थ्य विभाग अभी तक  बेखबर है। स्वास्थ्य विभाग के पास मानसून में फैलने वाली बीमारियों से निपटने के लिए अब तक कोई ठोस प्लान नहीं है। विभाग का कहना है कि यदि मरीजों की संख्या ज्यादा होगी तो वेयरहाउस से दवाइयों की डिमांड बढ़ा दी जाएगी। मानसून के दिनों में होने वाली बरसात से शहर फैली गंदगी के कारण अनेक  भयंकर बीमारियों का पैदा होना स्वभाविक ही है। हर वर्ष मानसून के दिनों में शहर में सैकड़ों लोग विभिन्न बिमारियों की चपेट में आ जाते है। मलेरिया, हैजा, डायरिया व डेंगू जैसी खतरनाक बीमारियां फैलने लगती हैं। तब सरकारी ही नहीं बल्कि निजी अस्पतालों के बैड भी मरीजों से भरे नजर आते हैं। मानसून में फैलने वाली बीमारियों से कई लोग अपनी जान गवां देते है। इन सब बातों का जिम्मेदार प्रशासन होता है। शहर में सफाई व्यवस्था की बात करें तो नगरपरिषद के पास कोई ठीक जवाब नहीं होता वहीं जनस्वास्थ्य विभाग भी मानसून के दिनों में भी रूटीन काम करने की बात कहता है। अब स्वास्थ्य विभाग में भी बीमारियों से निपटने के लिए कोई खास प्लानिंग नहीं है। ऐसे में जनजीवन के स्वास्थ्य का क्या होगा यह राम ही जाने।  
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मानसून में होती हैं संक्रामक बीमारियां : डा. सहगल
पंजाबी सभा अस्पताल के एमडी डा. अंशुल सहगल ने बताया कि बरसात और गंदगी के मिश्रित वातावरण से भयंकर बीमारियां पैदा होती हैं। जिसमें हैजा, टाईफाइड, डेेंगू, मलेरिया, पीलिया जैसी खतरनाक बीमारियां जानलेवा होती हैं। इसके अलावा मानसून में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, सिर दर्द जैसी बीमारी होना आम हो जाता है। मानसून के दिनों में उनके पास नियमित दिनों की अपेक्षा 25 प्रतिशत अधिक मरीज आने शुरू हो जाते हैं जिनमें लगभग एक जैसी ही बीमारी पाई जाती हैं।
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बीमारी से बचने के उपाय
डा. सहगल ने बताया कि मानसून के दिनों में अपने घर व आस-पड़ोस में सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कूलरों में हर तीसरे-चौथे दिन पानी बदलना चाहिए, गमलों आदि में पानी एकत्रित न होने दें। कटे व सड़े फल न खाएं, पानी को उबालकर अथवा आरो सिस्टम का पानी ही पिएं। बुखार, सिर दर्द, पेट दर्द की शिकायत होने पर तुरंत चिकित्सक से उपचार कराएं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सूरजभान कंबोज का कहना है कि मानसून में लोग ज्यादा बीमार होने लगते हैं। ऐसे में हम वेयरहाउस से ज्यादा दवाइयां मंगवाते हैं। वर्ष 2012 की अपेक्षा 2013 में कम मरीज आए थे। अब देखना है कि इस वर्ष कितने लोग मानसून से होेने वाली बीमारियों की चपेट में आते हैं, उसी हिसाब से दवाइयां मंगवाई जाएंगी। स्पेशल कोई प्लानिंग व एस्टीमेट नहीं बनाया गया है। जिले में कई प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुले हैं, सब जगह दवाईंयां उपलब्ध हैं। अपने स्तर पर इलाज किया जाएगा।
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