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Fatehabad News: इमरजेंसी से प्रसूता कक्ष तक में घुस रहे बंदर, इलाज करें या अपनी जान बचाएं

Thu, 12 Dec 2024 10:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 12 Dec 2024 10:39 PM IST
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Monkeys are entering from emergency to delivery room, get treatment or save your life.
फतेहाबाद के सीएचसी भट@टूकलां के गेट पर बैठे बंदरस्त्रोत अस्पताल प्रशासन
फतेहाबाद। शहर की गलियों में लोग बंदरों के आतंक से परेशान है ही अब गांव में भी लोग इससे अछूते नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भट्टूकलां के डॉक्टर-स्टाफ से लेकर मरीज तक बंदरों के उत्पात से परेशान हैं।
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बंदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड, प्रसूता कक्ष के अंदर तक घुस रहे हैं। यहां तक वे ओपीडी कक्ष में आ रहे हैं। भट्टूकलां में 50 बंदरों का झुंड घूम रहा है। वहां काम करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि मरीजों का उपचार करें या खुद की जान बचाएं। अस्पताल के चिकित्सकों व स्टाफ ने बंदरों से निजात दिलवाने के लिए उपायुक्त मनदीप कौर को पत्र लिखा है।
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सीएचसी भट्टूकलां के चिकित्सकों का कहना है कि करीब 6 माह से यहां पर बंदर उत्पात मचा रहे हैं। पहले दो से तीन बंदर थे लेकिन अब 50 के करीब बंदरों का झुंड आ गया है। बंदर गेट पर बैठ जाते हैं। जब उनको भगाया जाता है तो मरीजों को काटने को दौड़ रहे हैं। यहां तक कि इमरजेंसी वार्ड और प्रसूता कक्ष की तरफ चले जाते हैं, जिससे कोई घटना होने का डर रहता है। अस्पताल में रोजाना 250 से 300 मरीजों की ओपीडी होती है।
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शहर में भी बंदरों का आतंक, ठेका दिया, फिर भी नहीं सुधरे हालात

शहर फतेहाबाद में भी बंदरों का आतंक है। बंदरों को पकड़ने के लिए नगर परिषद ने निजी एजेंसी को ठेका दिया हुआ है। करीब 2,250 रुपये प्रति बंदर पकड़ने का ठेका निजी एजेंसी को दिया गया है। एजेंसी ने बंदरों को पकड़ने के लिए दो बार अभियान भी चलाया लेकिन उसके बाद फिर नहीं आई है। शहर के नहर कॉलोनी, कोर्ट परिसर, लाजपत नगर आदि क्षेत्र में बंदरों के झुंड घूमते रहते हैं। बंदरों के कारण पिछले दिनों दो हादसे भी हो चुके हैं। छत से गिरने से दो अलग-अलग मामलों में महिलाओं की टांग टूट चुकी है।
क्वार्टर से अस्पताल आने में लगता है डर

सीएचसी भट्टूकलां के दंत चिकित्सक डॉ. मनु राठी का कहना है कि अस्पताल में तो बंदरों से परेशान है हीं, अपने क्वार्टर में भी डर लगता है। अगर स्टाफ को क्वार्टर से अस्पताल में आना होता है तो भी डर बना रहता है। बंदर क्वार्टरों के अंदर घुस जाते है और सामान नष्ट कर देते हैं।
बंदरों को लेकर अगर कोई समस्या है तो ग्राम पंचायत के पास अधिकार है वह समाधान के लिए कदम उठा सकती है।

- अनिल कुमार, बीडीपीओ।
बंदर वार्ड की तरफ चले जाते हैं। हर समय डर लगा रहता है। गेट से बंदर अंदर आ जाते हैं। पहले भी समाधान करवाने को लेकर मांग की जा चुकी है और अब फिर पत्र लिखा गया है।

- डॉ. वाणी, मेडिकल ऑफिसर, भट्टूकलां।
बंदरों के कारण बहुत ज्यादा परेशानी है। वे डिलीवरी वार्ड में घुस जाते हैं जहां पर नवजात शिशु होते हैं। इसके अलावा कार्यालय में भी बंदर आ जाते हैं। वे अचानक मरीजों के पीछे लग जाते हैं। बंदरों ने पानी की टंकियों के ढक्कन तक तोड़ दिए हैं। ऐसे में डॉक्टर मरीजों का उपचार करें या फिर इनसे जान बचाएं। अब उपायुक्त को समाधान के लिए पत्र लिखा है। अधिकारियों को इस बारे में सुध लेनी चाहिए।


- पुष्कर दहिया, फार्मासिस्ट सीएचसी भट्टूकलां।
-सीएचसी में बंदरों का आतंक है। पहले दो से तीन बंदर आते थे लेकिन अब 50 बंदरों का झुंड आ रहा है। बंदर मरीजों को काट लेते हैं। वे गेट पर बैठ जाते है और मरीजों को काटने दौड़ते हैं। क्वार्टर से लेकर अस्पताल तक स्टाफ नहीं आ सकता है। बहुत परेशानी हो रही है।

- डॉ. मनु राठी, दंत चिकित्सक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भट्टूकलां, फतेहाबाद।
मेरे संज्ञान में ये मामला अभी आया है। अगर वहां पर ऐसी कोई समस्या आ रही है तो संबंधित अधिकारियों से बात करके समाधान करवाया जाएगा।

- डॉ. महेंद्र भादू सिविल सर्जन, फतेहाबाद।
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