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गड़बड़झाला : जांच और असेसमेंट शीट बिना ही जारी कर दिया दिव्यांगता प्रमाणपत्र
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फतेहाबाद का नागरिक अस्पताल।
- फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सिविल सर्जन कार्यालय ने ऐसे लोगों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी कर दिए जिनकी न तो डॉक्टरी जांच हुई और न ही पोर्टल पर असेसमेंट शीट अपलोड की गई। ये ही नहीं क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट ने जिस युवती को 50 प्रतिशत दिव्यांग बताया, पोर्टल पर 100 फीसदी दिव्यांग दिखाकर प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है।
बता दें कि सिविल सर्जन कार्यालय का यह फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। सवाल ये उठ रहे हैं कि संबंधित कर्मचारी मिलीभगत करके फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करते रहे और संबंधित तत्कालीन उप सिविल सर्जन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। वहीं मामला सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत के पास पहुंचने के बाद सोमवार को मामले में कमेटी गठित कर जांच करवाई जाएगी। जांच में कई फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र सामने आ सकते हैं। हालांकि अभी ये जांच का विषय है कि इसमें कौन-कौन शामिल है और किसकी किस स्तर पर लापरवाही रही है। संवाद
केस नंबर एक
एक व्यक्ति के दिव्यांग सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन में सामने आया कि उसका आईक्यू 59 फीसदी और दिव्यांग 45 प्रतिशत दी हुई थी। जबकि संबंधित स्पेशलिस्ट डॉक्टर द्वारा जांच ही नहीं की गई। इसके अलावा न ही मरीज ओपीडी में उपस्थित हुआ था। जांच करने पर पता चला कि सर्टिफिकेट विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध है लेकिन कोई असेसमेंट शीट या रेफरल शीट पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई और दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।
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केस नंबर दो
एक युवती की क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट द्वारा जांच करके दिव्यांग प्रतिशत 50 प्रतिशत दी गई थी जबकि पोर्टल पर दिव्यांग का प्रमाण पत्र 100 फीसदी के साथ जारी कर दिया गया। जबकि असेसमेंट शीट अपलोड नहीं की गई।
डिजिटल हस्ताक्षर का उठाया गया फायदा
फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने में बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है, इसके अलावा विभाग के संबंधित कर्मचारियों की भी मिलीभगत हो सकती है। चिकित्सा अधिकारियों के डिजिटल साइन का फायदा उठाकर प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। अधिकारी भी इस बात का मान रहे हैं कि डिजिटल साइन का दुरुपयोग किया गया हो सकता है। अहम बात यह भी है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने से पहले जांच क्यों नहीं की गई।
नौकरी में आरक्षण लेने और पेंशन में काम आता है दिव्यांग प्रमाण पत्र
सरकारी नौकरी में आरक्षण लेने को लेकर दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करवाया जाता है। डॉक्टरों का बोर्ड संबंधित व्यक्ति की जांच करता है और उसके मुताबिक दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करता है। जांच में ये बताया जाता है कि व्यक्ति इतने फीसदी दिव्यांग है। इसके अलावा सरकार की तरफ से दिव्यांग को पेंशन जारी की जाती है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग दिव्यांग प्रमाण पत्र आवेदन के साथ लेता है।
कोट
ये मामला वर्ष 2019 का है, जबकि चार्ज मुझे अब मिला है। मामले की जांच होगी। बाकि इसके बारे में ज्यादा जानकारी सिविल सर्जन मैडम ही देंगी।
-डॉ. वीना बत्रा, उप सिविल सर्जन
कोट
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी होने बारे मेरे पास अभी सूचना आई है। इस मामले को लेकर सोमवार को जांच शुरू की जाएगी। जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।
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बता दें कि सिविल सर्जन कार्यालय का यह फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। सवाल ये उठ रहे हैं कि संबंधित कर्मचारी मिलीभगत करके फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करते रहे और संबंधित तत्कालीन उप सिविल सर्जन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। वहीं मामला सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत के पास पहुंचने के बाद सोमवार को मामले में कमेटी गठित कर जांच करवाई जाएगी। जांच में कई फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र सामने आ सकते हैं। हालांकि अभी ये जांच का विषय है कि इसमें कौन-कौन शामिल है और किसकी किस स्तर पर लापरवाही रही है। संवाद
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केस नंबर एक
एक व्यक्ति के दिव्यांग सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन में सामने आया कि उसका आईक्यू 59 फीसदी और दिव्यांग 45 प्रतिशत दी हुई थी। जबकि संबंधित स्पेशलिस्ट डॉक्टर द्वारा जांच ही नहीं की गई। इसके अलावा न ही मरीज ओपीडी में उपस्थित हुआ था। जांच करने पर पता चला कि सर्टिफिकेट विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध है लेकिन कोई असेसमेंट शीट या रेफरल शीट पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई और दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।
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केस नंबर दो
एक युवती की क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट द्वारा जांच करके दिव्यांग प्रतिशत 50 प्रतिशत दी गई थी जबकि पोर्टल पर दिव्यांग का प्रमाण पत्र 100 फीसदी के साथ जारी कर दिया गया। जबकि असेसमेंट शीट अपलोड नहीं की गई।
डिजिटल हस्ताक्षर का उठाया गया फायदा
फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने में बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है, इसके अलावा विभाग के संबंधित कर्मचारियों की भी मिलीभगत हो सकती है। चिकित्सा अधिकारियों के डिजिटल साइन का फायदा उठाकर प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। अधिकारी भी इस बात का मान रहे हैं कि डिजिटल साइन का दुरुपयोग किया गया हो सकता है। अहम बात यह भी है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने से पहले जांच क्यों नहीं की गई।
नौकरी में आरक्षण लेने और पेंशन में काम आता है दिव्यांग प्रमाण पत्र
सरकारी नौकरी में आरक्षण लेने को लेकर दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करवाया जाता है। डॉक्टरों का बोर्ड संबंधित व्यक्ति की जांच करता है और उसके मुताबिक दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करता है। जांच में ये बताया जाता है कि व्यक्ति इतने फीसदी दिव्यांग है। इसके अलावा सरकार की तरफ से दिव्यांग को पेंशन जारी की जाती है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग दिव्यांग प्रमाण पत्र आवेदन के साथ लेता है।
कोट
ये मामला वर्ष 2019 का है, जबकि चार्ज मुझे अब मिला है। मामले की जांच होगी। बाकि इसके बारे में ज्यादा जानकारी सिविल सर्जन मैडम ही देंगी।
-डॉ. वीना बत्रा, उप सिविल सर्जन
कोट
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी होने बारे मेरे पास अभी सूचना आई है। इस मामले को लेकर सोमवार को जांच शुरू की जाएगी। जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।