{"_id":"664f9e1ecce51b830b008346","slug":"mental-patients-becoming-furious-as-heat-increases-fatehabad-news-c-127-1-shsr1017-117142-2024-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: गर्मी बढ़ने के साथ उग्र हो रहे मानसिक रोगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: गर्मी बढ़ने के साथ उग्र हो रहे मानसिक रोगी
विज्ञापन
फतेहाबाद। गर्मी बढ़ने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। गर्मी जैसे-जैसे अपना प्रभाव दिखा रही है वैसे मानसिक रोगियों की परेशानी बढ़ रही हैं। मानसिक रोगियों को नींद नहीं आ रही है तो चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। छोटी-छोटी बात पर उग्र हो रहे हैं। यहां तक भूख भी नहीं लग रही है और काम में भी मन नहीं लग रहा है। नागरिक अस्पताल की मनोचिकित्सक ओपीडी में 10 से 15 फीसदी नए मरीज आ रहे हैं।
हर तीन माह में मनोचिकित्सक की ओपीडी ढाई हजार तक रहती है। मनोचिकित्सक के पास रोजाना 35 से 40 मरीज आ रहे हैं। वर्ष 2023-24 की बात करें तो मनोचिकित्सक की ओपीडी में उपचार के लिए 10081 मरीज आए हैं। इस साल जनवरी से मार्च माह तक ही 2740 मरीज आ चुके हैं। चिकित्सकों के मुताबिक गर्मी के कारण रोगियों की मानसिक स्थिरता प्रभावित होती है। पहले ठीक हो चुके रोगियों पर भी असर पड़ रहा है। रोगी ज्यादा बात करने लगता है और चिड़चिड़ापन रहता है। नींद नहीं आने के कारण किसी से बात करने का मन भी नहीं करता है।
मनोचिकित्सक की ओपीडी में ये रही है मरीजों की स्थिति
माह ओपीडी में आए मरीज
अप्रैल 2023 से दिसंबर तक 7341
जनवरी 2024 से मार्च तक 2740
एंग्जायटी के बढ़ रहे केस
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ.गिरीश का कहना है कि गर्मी के कारण ओपीडी में घबराहट वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है। गर्मी में ही इस तरह की बीमारियां सामने आती हैं। जिसे एंग्जाइटी कहा जाता है। अचानक हाथ कांपना, पसीना आना, घबराहट, मन में उलझन होना, बिना बात के रोना बेचैनी के लक्षण हैं। लगातार ठीक से नींद न आने पर भी बेचैनी की दिक्कत हो सकती है।
विज्ञापन
ये लक्षण हैं तो मनोचिकित्सक से जरूर लें सलाह
मनोचिकित्सक का कहना है कि अगर घबराहट रहती है, डर लगता है, बेचैनी, शरीर में कंपन रहना, दिल की धड़कन बढ़ना, तनाव महसूस करना, सिर में दर्द, हाथ-पैर में पसीना आता है या फिर बार-बार ये मन में आता है कि बुरा होने वाला है तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
अपनी बात को दूसरे के साथ साझा जरूर करें
गर्मी में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है। बैचेनी और नींद न आना की समस्या रहती है। जिन मरीजों की दवाई चल रही है वह लेते रहें। इसके अलावा लोग अपने मन की बात दूसरों के साथ साझा जरूर करें। कम से कम आधा घंटा व्यायाम जरूर करें। फास्ट फूड से परहेज करें। पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं। सोने से करीब डेढ़ घंटा पहले मोबाइल छोड़ दें।
-डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक, नागरिक अस्पताल फतेहाबाद
विज्ञापन
हर तीन माह में मनोचिकित्सक की ओपीडी ढाई हजार तक रहती है। मनोचिकित्सक के पास रोजाना 35 से 40 मरीज आ रहे हैं। वर्ष 2023-24 की बात करें तो मनोचिकित्सक की ओपीडी में उपचार के लिए 10081 मरीज आए हैं। इस साल जनवरी से मार्च माह तक ही 2740 मरीज आ चुके हैं। चिकित्सकों के मुताबिक गर्मी के कारण रोगियों की मानसिक स्थिरता प्रभावित होती है। पहले ठीक हो चुके रोगियों पर भी असर पड़ रहा है। रोगी ज्यादा बात करने लगता है और चिड़चिड़ापन रहता है। नींद नहीं आने के कारण किसी से बात करने का मन भी नहीं करता है।
विज्ञापन
मनोचिकित्सक की ओपीडी में ये रही है मरीजों की स्थिति
माह ओपीडी में आए मरीज
अप्रैल 2023 से दिसंबर तक 7341
जनवरी 2024 से मार्च तक 2740
एंग्जायटी के बढ़ रहे केस
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ.गिरीश का कहना है कि गर्मी के कारण ओपीडी में घबराहट वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है। गर्मी में ही इस तरह की बीमारियां सामने आती हैं। जिसे एंग्जाइटी कहा जाता है। अचानक हाथ कांपना, पसीना आना, घबराहट, मन में उलझन होना, बिना बात के रोना बेचैनी के लक्षण हैं। लगातार ठीक से नींद न आने पर भी बेचैनी की दिक्कत हो सकती है।
विज्ञापन
ये लक्षण हैं तो मनोचिकित्सक से जरूर लें सलाह
मनोचिकित्सक का कहना है कि अगर घबराहट रहती है, डर लगता है, बेचैनी, शरीर में कंपन रहना, दिल की धड़कन बढ़ना, तनाव महसूस करना, सिर में दर्द, हाथ-पैर में पसीना आता है या फिर बार-बार ये मन में आता है कि बुरा होने वाला है तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
अपनी बात को दूसरे के साथ साझा जरूर करें
गर्मी में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है। बैचेनी और नींद न आना की समस्या रहती है। जिन मरीजों की दवाई चल रही है वह लेते रहें। इसके अलावा लोग अपने मन की बात दूसरों के साथ साझा जरूर करें। कम से कम आधा घंटा व्यायाम जरूर करें। फास्ट फूड से परहेज करें। पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं। सोने से करीब डेढ़ घंटा पहले मोबाइल छोड़ दें।
-डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक, नागरिक अस्पताल फतेहाबाद