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पंडित जसराजः 6 साल पहले आए थे फतेहाबाद, दोबारा करना चाहते थे एक काम... पढ़ें यादगार किस्सा
Tue, 18 Aug 2020 12:25 PM IST
रोहतक ब्यूरो
अमित रुखाया, फतेहाबाद(हरियाणा)
अमित रुखाया, फतेहाबाद(हरियाणा)
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 18 Aug 2020 12:25 PM IST
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पंडित जसराज
संगीत की दुनिया के बेशकीमती चिराग पंडित जसराज अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमेशा हमारे बीच रहेंगी। ऐसा ही एक यादगार किस्सा हम आपको बताने जा रहे हैं।
पंडित जसराज
पंडित जसराज मूलरूप से हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव पीलीमंदौरी के रहने वाले थे और संयोग देखिए कि महज तीन दिन पहले 15 अगस्त को ही उन्होंने अपनी बेटी दुर्गा जसराज से फतेहाबाद को लेकर चर्चा की थी।
पंडित जसराज
पंडित जसराज की बेटी दुर्गा जसराज अमेरिका में ऑनलाइन जूम सेशन आयोजित करती हैं, जिसमें वह संगीत की दुनिया के लोगों से चर्चा करती हैं। गत 15 अगस्त को उन्होंने फतेहाबाद के प्रसिद्ध गायकों दीपेश राही व उनके पिता मुकेश राही को इस सेशन के लिए आमंत्रित किया था। पंडित जसराज भी लाइव थे। जब उन्हें पता चला कि मुकेश व दीपेश राही फतेहाबाद से हैं तो पंडित जसराज ने अपनी बेटी से फतेहाबाद को लेकर चर्चा भी की थी।
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पंडित जसराज
दोबारा आना चाहते थे फतेहाबाद
पंडित जसराज छह साल पहले 28 जनवरी 2014 को गांव पीलीमंदौरी आए थे। यहां पर उन्होंने अपने पिता पंडित मोतीराम के नाम पर एक लाइब्रेरी व खुद के नाम पर एक पार्क का शुभारंभ किया था। तत्कालीन सांसद अशोक तंवर भी इस दौरान उनके साथ रहे थे। ग्रामीणों की मानें तो कुछ दिन पहले उन्होंने वीडियो कॉल करके लाइब्रेरी के बारे में बातचीत भी की थी। इस दौरान उन्होंने अपने दोस्त पूर्व सरपंच रामचंद्र बागड़िया से काफी देर तक बातें की थीं। बागड़िया की मानें तो उन्होंने कहा था कि वे दोबारा जल्दी ही अपने गांव में एक बार अवश्य आएंगे और एक-दो दिन अवश्य लगाएंगे, लेकिन हालात को कुछ और ही मंजूर था।
पंडित जसराज छह साल पहले 28 जनवरी 2014 को गांव पीलीमंदौरी आए थे। यहां पर उन्होंने अपने पिता पंडित मोतीराम के नाम पर एक लाइब्रेरी व खुद के नाम पर एक पार्क का शुभारंभ किया था। तत्कालीन सांसद अशोक तंवर भी इस दौरान उनके साथ रहे थे। ग्रामीणों की मानें तो कुछ दिन पहले उन्होंने वीडियो कॉल करके लाइब्रेरी के बारे में बातचीत भी की थी। इस दौरान उन्होंने अपने दोस्त पूर्व सरपंच रामचंद्र बागड़िया से काफी देर तक बातें की थीं। बागड़िया की मानें तो उन्होंने कहा था कि वे दोबारा जल्दी ही अपने गांव में एक बार अवश्य आएंगे और एक-दो दिन अवश्य लगाएंगे, लेकिन हालात को कुछ और ही मंजूर था।
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पंडित जसराज
एक आग्रह पर प्रदेश सरकार ने मंजूर कर दिया था पौने दो करोड़ का टेंडर
गांव पीलीमंदौरी में पेयजल की काफी समस्या चल रही थी। इसी दौरान पंडित जसराज का अपने पैतृक गांव में आने का कार्यक्रम फाइनल हो गया। यहां पहुंचे तो ग्रामीणों ने पलक पांवड़े बिछाकर उनका स्वागत किया। इसी दौरान ग्रामीणों ने उनके समक्ष गांव में पेयजल की किल्लत की बात रखी। जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन सांसद अशोक तंवर के मार्फत प्रदेश सरकार से इस समस्या के निदान का आग्रह किया, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने लगभग पौने दो करोड़ का लंबित पड़ा टेंडर तुरंत मंजूर कर गांव को पेयजल की समस्या से मुक्ति दिला दी थी।
गांव पीलीमंदौरी में पेयजल की काफी समस्या चल रही थी। इसी दौरान पंडित जसराज का अपने पैतृक गांव में आने का कार्यक्रम फाइनल हो गया। यहां पहुंचे तो ग्रामीणों ने पलक पांवड़े बिछाकर उनका स्वागत किया। इसी दौरान ग्रामीणों ने उनके समक्ष गांव में पेयजल की किल्लत की बात रखी। जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन सांसद अशोक तंवर के मार्फत प्रदेश सरकार से इस समस्या के निदान का आग्रह किया, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने लगभग पौने दो करोड़ का लंबित पड़ा टेंडर तुरंत मंजूर कर गांव को पेयजल की समस्या से मुक्ति दिला दी थी।