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Fatehabad News: सरसों में मरगोजा ने बढ़ाई किसान की चिंता, पैदावार कम होने की आशंका

Sat, 01 Mar 2025 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 01 Mar 2025 11:32 PM IST
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Margoza in mustard increases farmer's worries, fear of reduced yield
गांव मेहूवाला में सरसों की फसल में मरगोजा के उगे पौधे। संवाद
फतेहाबाद। सरसों की फसल में मरगोजा खरपतवार से किसान चिंतित हैं। मरगोजा एक परजीवी खरपतवार है। इसे रूखड़ी, गुल्ली, खुंबी आदि नामों से भी जाना जाता है। यह रेतीली जमीन में ज्यादा होता है। इस कारण सरसों की पैदावार में 30 से 60 प्रतिशत तक की कमी होने की आंशका रहती है।
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बता दें कि मरगोजे का पौधा सरसों की जड़ में उगता है। इससे फलियों में दाना नहीं पक पाता है। इस कारण उत्पादन में कमी होने की आशंका बनी रहती है। जिले में सरसों की फसल का सबसे अधिक रकबा भट्टू खंड के साथ लगते गांव ठुइंया, ढाबी, रामसरा, दैयड़, ढिंगसरा, बनमंदोरी, पीलीमंदोरी, शेखूपुर और मेहूवाला में होता है। इस क्षेत्र में ज्यादातर जमीन रेतीली है। किसान जयप्रकाश, विजय सिंह, विकास, जसवंत सिंह, दरिया सिंह और प्रकाश चंद आदि ने बताया की पिछले 20 दिनों से सरसों की फसल में मरगोजा काफी फैल चुका है।
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इस बार 10 एकड़ में सरसों की फसल की बुवाई की हुई है। खेल में काफी मात्रा में मरगोजा खरपतवार उग आया है। इसके कारण सरसों के पौधे पर असर होना शुरू हो चुका है।
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-रण सिंह, किसान गांव ढिंगसरा
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सरसों की फसल में मरगोजा काफी मात्रा में उग आया है। इसको लेकर जब मैंने कृषि चिकित्सक से सलाह ली तो बताया की इस रोग की रोकथाम सरसों क बिजाई के समय में किया जाता है।
-रामस्वरूप, किसान गांव पीलीमंदोरी
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मेरे सरसाें के खेत में पिछले साल भी मरगोजा खरपतवार उग आया था। इस कारण सरसों की पैदावार बहुत कम हुई थी। वहीं इस बार सरसों में फिर से काफी मात्रा में मरगोजा उग आया है।

राय सिंह, किसान गांव भट्टू कलां

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मरगोजा एक परजीवी पौधा है। यह सरसों के पौधे की जड़ में ही होता है। इससे बचाव के लिए सरसों की बिजाई के 25 से 30 दिन के बाद 25 एमएल राउंड अप या ग्लाइसल प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। इस खरपतवारनाशी का दूसरा छिड़काव 50 से 55 दिन बाद 50 एमएल प्रति एकड़ के हिसाब से करें। छिड़काव एक साथ करें अथवा कट या टक वाली नोजल का इस्तेमाल करें। वहीं छिड़काव से 3-4 दिन पहले या बाद में सिंचाई अवश्य करें। ताकि दवा सरसों के पौधे की जड़ तक पहुंच सके। अब दवा के छिड़काव का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि अब सरसों की कटाई का समय नजदीक आ चुका है।
- डॉ. ओमप्रकाश कंबोज, जिला कृषि विस्तार विशेषज्ञ, एचएयू हिसार।
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