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ऑनलाइन शिक्षा में बच्चों की रुचि कम

Sat, 30 May 2020 11:42 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 30 May 2020 11:42 PM IST
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Low interest in children online education
लॉकडाउन को दो माह से ज्यादा का समय हो चुका है। करीब डेढ़ माह से स्कूल विद्यार्थियों को आनलाइन पढ़ा रहे हैं। किसी स्कूल ने व्हाट्सअप ग्रुप बना दिया है तो कोई ऐप के जरिये विद्यार्थियों को आनलाइन पढ़ा रहा है। आनलाइन पढ़ाई शुरू हुई तो अभिभावकों को मोबाइल लेकर देना भी जरूरी हो गया। अब विद्यार्थी आनलाइन पढ़ाई बेशक कर रहे हैं लेकिन उस पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। कई स्कूल जूम ऐप तो कोई हाइट क्लासिस ऐप तो कोई वेबक्स ऐप का प्रयोग कर रहे हैं। विद्यार्थियों को इन ऐप पर एक साथ जोड़ा जा रहा है लेकिन विद्यार्थी उस पर समझाए जाने वाले टॉपिक को समझ नहीं पा रहे हैं।
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विद्यार्थियों का कहना है कि आनलाइन और मैनुअल पढ़ाई में काफी अंतर है। कक्षा में पूरा ध्यान पढ़ाई पर रहता है लेकिन आनलाइन क्लासिस में ध्यान भटकता है इस वजह से शिक्षक द्वारा पढ़ाए जाने वाले टॉपिक को समझ नहीं पाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आनलाइन पढ़ाई का समय निर्धारित होना चाहिए, ज्यादा ध्यान अगर मोबाइल पर रहेगा तो यह खतरनाक हो सकता है।
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सरकारी स्कूल के ये पढ़ रहे विद्यार्थी
कक्षा विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे
पहली से पांचवी 41893 22996
छठी से आठवीं 28099 15409
नौंवी से दसवीं 18491 9993
ग्याहरवीं से बारहवीं 9559 6310
ये बोले विद्यार्थी
दसवीं कक्षा की परीक्षा दी है और मेडिकल संकाय ग्याहरवीं कक्षा में लिया है। हाइट क्लासिस के नाम से एप और वाट्सपग्रुप के जरिए स्कूल के शिक्षक पढ़ा रहे हैं। मैनुअल पढ़ाई में ज्यादा समझ आता है लेकिन आनलाइन क्लासिस लगाने में अच्छी तरह समझ नहीं आ रहा है। कक्षा में ध्यान से पढ़ा जा सकता है लेकिन आनलाइन में पूरी तरह से ध्यान न लगने की समस्या आ रही है।
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वंशिका, कक्षा ग्यारहवीं।
मैं डीएवी स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ती हूं। जब आनलाइन पढ़ाई शुरू हुई तब कुछ अलग से लगा था, शुरू में इसे गंभीर नहीं लिया। लेकिन धीरे-धीरे जब स्कूल का दबाव बना और इस ध्यान लगाया था तो अब रूचि बन गई है। पहले घर के लोग मोबाइल नहीं देते थे, ये ही कहते थे कि गेम खेलोगे, अब आसानी से मोबाइल मिल जाता है, मोबाइल का प्रयोग सिर्फ होमवर्क आने पर ही प्रयोग करते है। यहां तक स्कूल के वाट्सअपग्रुप में सुबह और दोपहर को हाजिरी लगानी पड़ रही है।
- छात्रा पारीशा।
पिछले डेढ़ माह से मैं वाट्सअप ग्रुप के जरिए पढ़ रहा हूं। सुबह 10 बजे वाट्सअप ग्रुप में स्कूल से होमवर्क आ जाता है। घर में छोटा हूं इसलिए मोबाइल पहले नहीं मिलता था, अब बहन के मोबाइल पर होमवर्क आता है उसके मोबाइल से होमवर्क नोट करके उसकी फोटो करके वापस भेज देता हूं। स्कूल शिक्षक चेक भी करते हैं और जो गलती होती है उसके बारे में बताते भी हैं।
छात्र मुकुल कुमार।
मैं नौंवी कक्षा का छात्र हूं। सेंट जोसफ स्कूल के शिक्षक जूम एप से आनलाइन पढाते हैं। आकाश इंस्टीच्यूट की भी आनलाइन क्लासिस चलती है। स्कूल की क्लासिस दो घंटे रोजाना तथा आकाश इंस्टीच्यूट की सप्ताह में तीन दिन मंगलवार और वीरवार और शनिवार चलती है। आनलाइन क्लासिस में सबसे बड़ी समस्या ध्यान की आ रही है। पूरी तरह से ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं।
- छात्र तानव।
मैं दूसरी कक्षा का छात्र हूं। स्कूल की तरफ जूम एप से आनलाइन क्लास लगाई जाती है।
आनलाइन क्लास रोजाना आधा-आधा घंटा दो बार लगती है। मम्मी-पापा जॉब में होने के कारण इसमें मेरे दादा मेरी मदद करते हैं। क्लास में होमवर्क भी दिया जाता है, जिसे करने के बाद वाट्सअप पर भेजना होता है।
छात्र हिमेकश।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विद्यार्थियों की दिनचर्या बिगड़ी
लॉकडाउन के दौरान स्कूल विद्यार्थियों को आनलाइन पढ़ा रहे हैं, पढ़ाना मजबूरी भी है और जरूरी भी है। लेकिन इने विद्यार्थियों की दिनचर्या बिगाड़ दी है। पहले विद्यार्थियों को स्कूल जाना होता था तो वह समय पर उठते थे और तैयार होकर जाते थे। लेकिन अब आनलाइन पढ़ाई पर विद्यार्थी अच्छी तरह फोकस नहीं कर पाते हैं, घंटों स्क्रीन पर रहते हैं। देर रात वीडियो सुनते हैं और ऑडियो सुनते हैं। देर रात तक सोते हैं और सुबह लेट उठते है। अधिक समय तक मोबाइल का प्रयोग करने के कारण इसके आदी हो रहे हैं।
- डॉ.गिरीश, मनोरोग विशेषज्ञ।
विद्यार्थी इस समय मोबाइल पर पढ़ रहे हैं। मोबाइल का ज्यादा प्रयोग खतरनाक है। सबसे ज्यादा असर आंख पर पड़ता है। विद्यार्थी बीस मिनट लगातार मोबाइल या कंप्यूटर का प्रयोग करने के बाद दो मिनट का ब्रेक जरूर लें। इसके अलावा साफ पानी से आंखों को बंद करके साफ करें। इसके अलावा आंखों को झपकाने की आदत डालें। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो आंख दर्द, सिर दर्द व खारिश की समस्या हो सकती है।

डॉ.विनोद शर्मा, नेत्र रोग विशेषज्ञ।
हरियाणा एजूसेट के चैनल सिर्फ शहर की केबल पर उपलब्ध है। गांवों में एनसीआरटी के चैनल चल रहे हैं। इसके अलावा बच्चों को वाट्सग्रुप के जरिए जुड़े हुए हैं। कई अभिभावकों के पास फीचर फोन है, उसके कारण दिक्कत आ रही हैं। सरकारी स्कूलों के 65 फीसदी विद्यार्थी पढ़ हे हैं।
अनुराग धारीवाल, जिला सक्षम संयोजक, आनलाइन शिक्षा प्रभारी।
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