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बीजेपी की जांच रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के बड़े अफसरों का नाम, गिरेगी गाज
fatehabad
Updated Mon, 26 Sep 2016 12:22 AM IST
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लैंटर का दृश्य।
- फोटो : amar ujala
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नागरिक अस्पताल में महिला वार्ड की छत का मलबा गिरने के मामले में स्वास्थ्य विभाग के कई बड़े अधिकारी नप सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीजेपी निगरानी कमेटी सदस्यों द्वारा इस मामले की जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के कई बड़े अफसरों को लापरवाही का दोषी ठहराया गया है। इस लिस्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि बीजेपी निगरानी कमेटी ने डाक्टर आरसी गोयल और मेंटिनेंस संभालने वाली स्टाफ नर्स को तो दोषी ठहराया ही है, साथ ही उन्होंने इसके लपेटे में स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों को भी ले लिया है।
अधिकारियों को ठहराया लापरवाही का दोषी
बीजेपी से जुड़े सूत्रों की मानें तो निगरानी कमेटी ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को गंभीर लापरवाही का दोषी माना है। रिपोर्ट में बाकायदा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है जिसमें उन्होंने डॉ. आरसी गोयल को तो दोषी ठहरा दिया लेकिन अस्पताल के रखरखाव से जुड़े अन्य अफसरों को चुपके से निकाल दिया गया। बीजेपी की इस रिपोर्ट में एसएमओ और सीएमओ दफ्तर से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगाए गए हैं।
विभाग के पास बजट होने के बावजूद नहीं हुई थी अस्पताल की मरम्मत
बीजेपी निगरानी कमेटी के सदस्यों ने अपनी जांच में पाया था कि अस्पताल प्रशासन के पास पर्याप्त बजट था और अगर अधिकारी चाहते तो औपचारिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए बड़े आराम से अस्पताल की मरम्मत करा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। जांच में ये बात भी निकल कर आई थी कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस बात का पता ही नहीं था कि अस्पताल में कौन-कौन से हिस्से जर्जर होकर गिरने की कगार पर हैं। इसके पीछे रखरखाव कमेटी द्वारा इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक ना करना एक बड़ा कारण था। हादसा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर निरीक्षण की मांग की थी। इसके बाद जाकर पीडब्ल्यूडी की टीम ने आकर निरीक्षण किया तो पाया कि अस्पताल में लगभग 12 प्वाइंट ऐसे हैं जिन्हें तुरंत मरम्मत की जरूरत है।
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अभी तक शुरू नहीं हुई मरम्मत, दूसरी बार फिर गिर चुका मलबा
लोकनिर्माण विभाग द्वारा अस्पताल की मरम्मत के लिए लगभग साढ़े तीन लाख का एस्टीमेट बनाकर अस्पताल प्रशासन को सौंप दिया था। अस्पताल प्रशासन ने इसे मंजूरी के लिए उच्चाधिकारियों को भेज दिया था। हालांकि दो माह बीतने को आए, अभी तक उच्चाधिकारियों से इस एस्टीमेट को मंजूरी नहीं मिल सकी है। जिसके चलते अस्पताल की मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि अस्पताल के भूतल पर स्थित महिला शौचालय की छत का मलबा भी बीते दिनों गिर चुका है। आननफानन में अस्पताल प्रशासन ने महिला वार्ड और अब महिला शौचालय को बंद करा दिया है। हालांकि सौ टके का सवाल तो यही है कि आखिर कमरा बंद कर देने से क्या अस्पताल की मजबूती लौट आएगी।
ये था मामला
अगस्त माह के शुरुआती सप्ताह में अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित महिला वार्ड की छत का मलबा अचानक गिरने से नीचे लेटी हुई तीन चार महिलाएं और राजस्थान निवासी विनोद का एक नवजात उसकी चपेट में आ गए। महिलाओं को हलकी चोट लगी लेकिन नवजात की हालत गंभीर होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने उसे जिंदल अस्पताल में रेफर कर दिया गया जहां जाते ही उसकी मौत हो गई। इस मामले में हंगामा होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने डॉ. गिरीश के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की जिसकी जांच के बाद डा. आरसी गोयल और मेंटिनेंस ड्यूटी पर रही स्टाफ नर्स के खिलाफ कार्यवाही की सिफारिश कर दी। जिस पर डा. आरसी गोयल को सेवामुक्त कर दिया गया था और स्टाफ नर्स के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की गई थी।
बीजेपी निगरानी कमेटी के जांच टीम के सदस्यों ने अस्पताल बारे अपनी रिपोर्ट मुझे दे दी है। इस रिपोर्ट को सोमवार या मंगलवार तक मैं खुद चंडीगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को सौंपूंगा। इसके आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।
-गुलशन हंस, संयोजक, भाजपा निगरानी कमेटी, फतेहाबाद।
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अधिकारियों को ठहराया लापरवाही का दोषी
बीजेपी से जुड़े सूत्रों की मानें तो निगरानी कमेटी ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को गंभीर लापरवाही का दोषी माना है। रिपोर्ट में बाकायदा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है जिसमें उन्होंने डॉ. आरसी गोयल को तो दोषी ठहरा दिया लेकिन अस्पताल के रखरखाव से जुड़े अन्य अफसरों को चुपके से निकाल दिया गया। बीजेपी की इस रिपोर्ट में एसएमओ और सीएमओ दफ्तर से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगाए गए हैं।
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विभाग के पास बजट होने के बावजूद नहीं हुई थी अस्पताल की मरम्मत
बीजेपी निगरानी कमेटी के सदस्यों ने अपनी जांच में पाया था कि अस्पताल प्रशासन के पास पर्याप्त बजट था और अगर अधिकारी चाहते तो औपचारिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए बड़े आराम से अस्पताल की मरम्मत करा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। जांच में ये बात भी निकल कर आई थी कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस बात का पता ही नहीं था कि अस्पताल में कौन-कौन से हिस्से जर्जर होकर गिरने की कगार पर हैं। इसके पीछे रखरखाव कमेटी द्वारा इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक ना करना एक बड़ा कारण था। हादसा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर निरीक्षण की मांग की थी। इसके बाद जाकर पीडब्ल्यूडी की टीम ने आकर निरीक्षण किया तो पाया कि अस्पताल में लगभग 12 प्वाइंट ऐसे हैं जिन्हें तुरंत मरम्मत की जरूरत है।
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अभी तक शुरू नहीं हुई मरम्मत, दूसरी बार फिर गिर चुका मलबा
लोकनिर्माण विभाग द्वारा अस्पताल की मरम्मत के लिए लगभग साढ़े तीन लाख का एस्टीमेट बनाकर अस्पताल प्रशासन को सौंप दिया था। अस्पताल प्रशासन ने इसे मंजूरी के लिए उच्चाधिकारियों को भेज दिया था। हालांकि दो माह बीतने को आए, अभी तक उच्चाधिकारियों से इस एस्टीमेट को मंजूरी नहीं मिल सकी है। जिसके चलते अस्पताल की मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि अस्पताल के भूतल पर स्थित महिला शौचालय की छत का मलबा भी बीते दिनों गिर चुका है। आननफानन में अस्पताल प्रशासन ने महिला वार्ड और अब महिला शौचालय को बंद करा दिया है। हालांकि सौ टके का सवाल तो यही है कि आखिर कमरा बंद कर देने से क्या अस्पताल की मजबूती लौट आएगी।
ये था मामला
अगस्त माह के शुरुआती सप्ताह में अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित महिला वार्ड की छत का मलबा अचानक गिरने से नीचे लेटी हुई तीन चार महिलाएं और राजस्थान निवासी विनोद का एक नवजात उसकी चपेट में आ गए। महिलाओं को हलकी चोट लगी लेकिन नवजात की हालत गंभीर होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने उसे जिंदल अस्पताल में रेफर कर दिया गया जहां जाते ही उसकी मौत हो गई। इस मामले में हंगामा होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने डॉ. गिरीश के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की जिसकी जांच के बाद डा. आरसी गोयल और मेंटिनेंस ड्यूटी पर रही स्टाफ नर्स के खिलाफ कार्यवाही की सिफारिश कर दी। जिस पर डा. आरसी गोयल को सेवामुक्त कर दिया गया था और स्टाफ नर्स के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की गई थी।
बीजेपी निगरानी कमेटी के जांच टीम के सदस्यों ने अस्पताल बारे अपनी रिपोर्ट मुझे दे दी है। इस रिपोर्ट को सोमवार या मंगलवार तक मैं खुद चंडीगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को सौंपूंगा। इसके आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।
-गुलशन हंस, संयोजक, भाजपा निगरानी कमेटी, फतेहाबाद।