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Fatehabad News: जाट आरक्षण आंदोलन में 20 लोग सात साल बाद हुए बरी
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कुलां। जाट आरक्षण आंदोलन मामले में टोहाना की अदालत ने बड़ा फैसला देते हुए गांव धारसूल निवासी 20 लोगों को बरी कर दिया है। इन आरोपियों के संबंध में शनिवार को मजिस्ट्रेट मनमीत कौर की अदालत ने फैसला सुनाया है। हालांकि, इस मामले में 22 आरोपी बनाए गए थे, लेकिन दो लोगों का निधन हो चुका है।
गौरतलब है कि सात साल पहले फरवरी 2016 में जाट आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन में धारसूल गांव निवासी कुछ लोगों ने कुलां के मुख्य चौक में धरना प्रदर्शन किया था। जिस पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 22 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। हालांकि, आंदोलन कर रहे लोगों का कहना था कि उन्होंने शांतिपूर्वक तरीके से धरना दिया था। किसी को तंग नहीं किया गया। मेडिकल इमरजेंसी वाहनों को जाने की अनुमति दी गई थी। अधिवक्ता रिछपाल गिल ने बताया कि शनिवार को सात साल पहले के इस मामले में अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया है। बरी होने वालों में शामिल नानू राम व राजेंद्र काला ने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा था और वह न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं।
वकीलों ने दी निशुल्क सेवा
जाट आरक्षण आंदोलन मामले में गांव धारसूल के इन लोगों के केस की सुनवाई अधिवक्ता सुखजिंद्र सिंह नैन, कुलवंत जांगड़ा व रिछपाल सिंह कर रहे थे। सात साल तक चले इस केस में तीनों वकीलों द्वारा निशुल्क सेवा दी गई है। इस केस में अधिवक्ताओं ने फीस का कोई पैसा नहीं लिया है। बरी होने वालों ने इन वकीलों का भी आभार व्यक्त किया।
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गौरतलब है कि सात साल पहले फरवरी 2016 में जाट आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन में धारसूल गांव निवासी कुछ लोगों ने कुलां के मुख्य चौक में धरना प्रदर्शन किया था। जिस पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 22 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। हालांकि, आंदोलन कर रहे लोगों का कहना था कि उन्होंने शांतिपूर्वक तरीके से धरना दिया था। किसी को तंग नहीं किया गया। मेडिकल इमरजेंसी वाहनों को जाने की अनुमति दी गई थी। अधिवक्ता रिछपाल गिल ने बताया कि शनिवार को सात साल पहले के इस मामले में अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया है। बरी होने वालों में शामिल नानू राम व राजेंद्र काला ने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा था और वह न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं।
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वकीलों ने दी निशुल्क सेवा
जाट आरक्षण आंदोलन मामले में गांव धारसूल के इन लोगों के केस की सुनवाई अधिवक्ता सुखजिंद्र सिंह नैन, कुलवंत जांगड़ा व रिछपाल सिंह कर रहे थे। सात साल तक चले इस केस में तीनों वकीलों द्वारा निशुल्क सेवा दी गई है। इस केस में अधिवक्ताओं ने फीस का कोई पैसा नहीं लिया है। बरी होने वालों ने इन वकीलों का भी आभार व्यक्त किया।
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