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गहनता से जांच हुई तो और भी निकलेगा फर्जीवाड़ा, दो वाहनों का गायब मिला रिकॉर्ड

Tue, 06 Apr 2021 11:28 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 06 Apr 2021 11:28 PM IST
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Intensive investigation will lead to further forgery, missing records of two vehicles
लघु सचिवालय स्थित एसडीएम कार्यालय में बनी मोटर लाइसेंस शाखा। - फोटो : Fatehabad
लघु सचिवालय स्थित फतेहाबाद के एसडीएम कार्यालय में वाहनों की आरसी जारी करने में फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आए हैं। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के अधिकारियों का दावा है कि अगर गहनता से जांच की गई तो बड़ी संख्या में फर्जीवाड़े के मामले सामने आएंगे। फिलहाल शहर थाना पुलिस ने फर्जी आरसी तैयार करने के मामले में फतेहाबाद के तीन पूर्व एसडीएम सतबीर जांगू, संजय बिश्नोई, सुरजीत नैन, दो वाहन पंजीकरण क्लर्कों ओमप्रकाश सिहाग व राजेश खटक और तीन वाहन मालिकों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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पुलिस को दी शिकायत में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के हिसार डीएसपी कार्यालय के एसआई राजेश कुमार ने बताया है कि उन्हें एसडीएम कार्यालय में फर्जी दस्तावेज तैयार करके दूसरे राज्यों व जिलों के वाहनों की आरसी जारी करने की शिकायत मिली थी। इन वाहन पंजीकरण में वाहन निरीक्षक द्वारा व्हीकल पासिंग की रिपोर्ट भी नहीं लगाई जा रही है। वाहन नंबर एचआर61ए8000, एचआर 31 एच 9322, एचआर 02 एटी 6882, एचआर 71 एच 1744 व एचआर 88-2310 के फर्जी दस्तावेज तैयार करके एसडीएम कार्यालय से रजिस्ट्रेशन किया गया है। इसके बाद सोमवार को एसआई राजेश कुमार, ईएसआई विरसा सिंह, ईएएसआई जयवीर सिंह, चालक राजबीर सिंह ने एसडीएम कार्यालय आकर वाहन पंजीकरण लिपिक अजमेर सिंह से उक्त वाहनों से संबंधित रिकॉर्ड मांगा। वाहन नंबर एचआर 61 ए 8000 स्कॉर्पियो, एचआर 02एटी 6882 क्रूजर व एचआर 88-2310 रिटज कार के कागजात की सत्यापित फोटोप्रतियां भी ली गईं। वाहन नंबर एचआर 31 एच 9322 व एचआर 71 एच 1744 से संबंधित रिकॉर्ड गायब मिला।
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ऐसे किया गया फर्जीवाड़ा
केस नंबर एक
एचआर 61 ए 8000 स्कॉर्पियो के कागजात देखे तो पाया कि वाहन की एनओसी आरटीए भिवानी से आरटीओ फतेहाबाद वाहन मालिक बिहार के रोहताश जिले के गांव अकबरपुर निवासी शमशीर आलम खां के नाम जारी की गई है। वाहन पंजीकरण के समय कागजात में वाहन निरीक्षक की पासिंग रिपोर्ट नहीं लगाई गई। ई-दिशा केंद्र की रसीद में शमशेर आलम के पते की जगह फतेहाबाद लिखा हुआ है, लेकिन पंजीकरण फाइल में फतेहाबाद में निवास स्थान का कोई कागजात नहीं लगा है। फिर भी तत्कालीन एसडीएम सतबीर सिंह जांगू, तत्कालीन वाहन पंजीकरण क्लर्क ओमप्रकाश सिहाग ने शमशीर आलम खां को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हरियाणा सरकार के नियमों के खिलाफ अन्य राज्य के निवासी के नाम ई-दिशा केंद्र फतेहाबाद में 1 जनवरी 2018 को रसीद जारी करवाकर स्कॉर्पियो की आरसी तैयार कर दी।
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केस नंबर दो
वाहन नंबर एचआर-02एटी-6882 की एनओसी वाहन पंजीकरण अथॉरिटी जगाधरी से आरटीओ फतेहाबाद के नाम वाहन मालिक टोहाना के गांव कन्हड़ी निवासी रमेश के नाम जारी की गई। वाहन पंजीकरण फाइल में एमवीआई वाहन पासिंग रिपोर्ट भी नहीं लगाई गई और पंजीकरण फाइल देखने पर कागजों में वाहन की चेसिस नंबर के आगे पुराना रिकॉर्ड छिपाने के लिए (स्लेश) लगाया हुआ मिला। मगर तत्कालीन एसडीएम संजय बिश्नोई व पंजीकरण लिपिक राजेश खटक ने वाहन मालिक रमेश को लाभ पहुंचाने की नीयत से गांव कन्हडी की टोहाना पंजीकरण अथॉरिटी होते हुए भी फतेहाबाद वाहन पंजीकरण अथॉरिटी से ई-दिशा केंद्र फतेहाबाद में 21 जुलाई 2020 को रशीद जारी करवाकर आरसी तैयार कर दी।
केस नंबर तीन
वाहन नंबर एचआर-88-2310 की एनओसी वाहन पंजीकरण अथॉरिटी एसडीएम बाढड़ा से वाहन पंजीकरण अथॉरिटी एसडीएम बरवाला के नाम वाहन मालिक राजेश के नाम जारी की गई थी। इस वाहन का पंजीकरण एसडीएम फतेहाबाद द्वारा भीमसिंह निवासी गांव डूल्ट जिला फतेहाबाद के नाम किया गया। पंजीकरण फाइल में वाहन निरीक्षक की वाहन पासिंग रिपोर्ट भी नहीं लगी थी और कागजों में वाहन की चेसिस नंबर के पीछे पुराना रिकॉर्ड छिपाने के लिए (स्लेश) लगाया हुआ था। मगर तत्कालीन एसडीएम सुरजीत नैन और क्लर्क ओमप्रकाश सिहाग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बरवाला अथॉरिटी के नाम ई-दिशा केंद्र फतेहाबाद में 25 अप्रैल 2019 को रशीद जारी करवाकर आरसी तैयार करवा दी।
कई मामले आ सकते हैं सामने
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के अधिकारी ने अपनी शिकायत में कहा है कि अगर एसडीएम कार्यालय में अन्य गाड़ियों का रिकार्ड चेक किया जाए तो इस प्रकार के फर्जी दस्तावेजों से संबंधित और भी कई मामले सामने आ सकते हैं।
इसलिए करवाते हैं फर्जी रजिस्ट्रेशन
जानकार बताते हैं कि वाहन लेने के बाद दूसरे राज्यों में जाकर पंजीकरण करवाने से बचने के लिए यहीं करवा लेते हैं। इससे उनका आने-जाने का समय बचता है और वहां होने वाला अधिक खर्च भी बचता है। बस यहां कर्मचारियों या अधिकारियों से सांठगांठ करनी होती है। इसके बाद फर्जी तरीके से यहां का पता फार्म में भरकर कर्मचारी फाइल तैयार कर देते हैं और अधिकारी उस पर हस्ताक्षर कर आरसी जारी करवा देते हैं।
कोट
सीएम फ्लाइंग के एसआई की शिकायत पर तत्कालीन तीन एसडीएम, दो क्लर्क के अलावा तीन वाहन मालिकों पर केस दर्ज कर लिया गया हैं। मामले की गहनता से जांच की जाएगी। और भी कोई संलिप्त पाया जाएगा, तो उस पर भी कार्रवाई होगी।

-राजेश कुमार, एसपी, फतेहाबाद।
कोट
अभी कामकाज पूरी तरह ऑनलाइन है। मेरे कार्यकाल में फिलहाल पूरी तरह काम साफ-सुथरे तरीके से हो रहा है। जिनके नाम सामने आए हैं, उन्हें पहले ही मैंने पंजीकरण कार्य से हटाकर उनकी कहीं और ड्यूटी लगाई हुई है।
- कुलभूषण बंसल, एसडीएम, फतेहाबाद।
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