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Fatehabad News: टोहाना में राजनीति के बदले समीकरण, वजूद बचाने की रहेगी सियासी जंग

Fri, 06 Sep 2024 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Fri, 06 Sep 2024 12:48 AM IST
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In Tohana, equations have changed from politics, there will be a political war to save existence.
टोहाना। फतेहाबाद जिले की सबसे हॉट सीट टोहाना विधानसभा क्षेत्र में इस बार सत्ताधारी दल के सामने जीत की चुनौती है। वहीं, कांग्रेस के लिए खोई जमीन पाने का अवसर है। इस सीट की विशेष बात यह रही है कि यहां से जो भी विधायक बनता है, उसकी सत्ता में अच्छी भागीदारी होती है।
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साल 2014 तक टोहाना विधानसभा सीट पर सरदार हरपाल सिंह व उनके परिवार का ही दबदबा रहा है। अब तक हुए 14 चुनावों में से सात बार इनका ही परिवार जीता है। हरपाल सिंह व उनके बेटे परमवीर सिंह दोनों मंत्री रह चुके हैं। इस बार एकाएक टोहाना की राजनीति के समीकरण बदल चुके हैं। साल 2019 में जननायक जनता पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले देवेंद्र सिंह बबली इस बार भाजपा के उम्मीदवार बन गए हैं।
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पहले देवेंद्र बबली के कांग्रेस की टिकट पर मैदान में आने के कयास लग रहे थे, लेकिन टिकट पक्की नहीं हुई, तो उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने के दो दिन बाद ही उनकी टिकट का ऐलान हो गया है। देवेंद्र सिंह बबली विधायक रहते सरकारी सिस्टम से जूझते रहे, लेकिन पंचायत मंत्री बनने के बाद विकास कार्यों को रफ्तार दी है। इस दौरान उनकी किसानों से फिर सरपंचों के साथ तैशबाजी ने माहौल में गर्मी बनाए रखी। कई जगहों पर उन्हें विरोध भी झेलना पड़ा। संवाद
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मुद्दों से ज्यादा राजनीतिक घटनाक्रमों ने बनाया माहौल
विशेष बात यह है कि टोहाना विधानसभा क्षेत्र में जमीनी मुद्दों से ज्यादा राजनेताओं के घटनाक्रमों ने माहौल बनाया हुआ है। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद सुभाष बराला और देवेंद्र बबली में हमेशा 36 का आंकड़ा रहा है। मगर इस बार दोनों एक ही पार्टी में नजर आएंगे। करीब छह महीने से अधिक समय से देवेंद्र बबली की भाजपा में एंट्री के प्रयास हो रहे थे, लेकिन बराला के अड़े रहने से उनकी ज्वाइनिंग नहीं हो पाई।
अब चुनाव के ऐन मौके पर केंद्रीय नेतृत्व तक मामला पहुंचने के बाद देवेंद्र बबली को भाजपा का पटका पहनाया गया है। इसी तरह कांग्रेस में भी दावेदारों की बड़ी फेहरिस्त है। जिनमें हुड्डा खेमे से पूर्व कृषि मंत्री परमवीर सिंह, बलजीत सिंह दंदीवाल, हरपाल बुडानिया, सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर गिल तो कुमारी सैलजा के खेमे से संजय शर्मा, रणदीप सुरजेवाला खेमे से बलजिंदर सिंह दावेदारी जता रहे हैं।
विकास को दी रफ्तार, लेकिन गुस्से के चलते झेली नाराजगी
ये विकास कार्य करवाए
गांव रसूलपुर में मेडिकल कॉलेज की घोषणा करवाई, इसके लिए 1100 करोड़ रुपये मंजूर भी हुए हैं। नए बस स्टैंड और 100 बेड के नए अस्पताल का निर्माण शुरू करवाया। 148बी नेशनल हाईवे का नवनिर्माण, 250 करोड़ रुपये से शहर व गांवों में जलघर, एसओपी का निर्माण, नई सीवरेज व पीने के पानी की पाइप लाइन, टोहाना शहर में 28 करोड़ रुपये से आधुनिक कम्युनिटी हाॅल, 250 करोड़ रुपये से गांवों में फिरनी, लाइट, सुंदरीकरण व अन्य कार्य करवाए। 80 करोड़ रुपये से 25 गांवों में आधुनिक सामुदायिक केंद्र बनवाए हैं। बबली का दावा है कि उन्होंने टोहाना विधानसभा क्षेत्र में तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के कार्य करवाए हैं।
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ये विकास कार्य नहीं चढ़े सिरे
इंदिरा गांधी राजकीय महाविद्यालय के नए भवन का निर्माण नहीं करवा सके। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय का सेंटर नहीं ला सके। बारिश के पानी की निकासी का संपूर्ण समाधान नहीं करवा पाए हैं। शहर में सीसीटीवी लगवाने का प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ा सके।
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भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष को हराकर सुर्खियों में आए
देवेंद्र सिंह बबली 2019 में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के सबसे नजदीकी थी। उस समय वह टोहाना से कांग्रेस की टिकट के प्रबल दावेदार थे। मगर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नजदीकी परमवीर सिंह को कांग्रेस की टिकट मिली। इससे नाराज होकर देवेंद्र बबली ने तब नई बनी पार्टी जजपा का दामन थामा और जजपा के उम्मीदवार बन गए। उस चुनाव में बबली ने 57 फीसदी 1,00,752 वोट लेकर भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला को 52,302 वोटों से करारी शिकस्त दी थी। उस समय तीसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी परमवीर सिंह की जमानत जब्त हुई थी।

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देवेंद्र बबली का पूरा कार्यकाल विवादों से भरा ही रहा है। हलके में विकास की गति बढ़ाने के बजाय वह बड़े-बड़े बोल ही बोलते रहे हैं। चुनाव के समय आंखों की जांच के शिविर लगाने की याद आई है। सत्ता के घमंड में कर्मचारियों से बुरा बर्ताव करते रहे। इस बार जनता सबक सिखाएगी।
-परमवीर सिंह, पूर्व कृषि मंत्री
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पिछली बार प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को मिले वोट
देवेंद्र सिंह बबली - जजपा - 1,00,752
सुभाष बराला - भाजपा - 48,450
परमवीर सिंह - कांग्रेस - 16,717
बलजीत बौद्ध - बहुजन समाज पार्टी - 2593
अजय कुमार - आम आदमी पार्टी - 1852
सीपीआईएम - जगतार सिंह - 1334
राजपाल सैनी - इनेलो - 1213
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अब तक रह चुके विधायक
1968 - हरपाल सिंह
1972 - हरपाल सिंह
1977 - कर्म सिंह डांगरा
1982 - हरपाल सिंह
1985 - हरपाल सिंह
1987 - हरपाल सिंह
1991 - हरपाल सिंह
1996 - विनोद कुमार
1999 - निशान सिंह
2005 - परमवीर सिंह
2009 - परमवीर सिंह
2014 - सुभाष बराला
2019 - देवेंद्र सिंह बबली
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ग्राउंड रिपोर्ट व विधायक रिपोर्ट कार्ड



सीट - टोहाना



मौजूदा विधायक - देवेंद्र सिंह बबली



पार्टी - जजपा


साल 2019 में वोट मिले - 1,00,752



दूसरे नंबर पर रहे - सुभाष बराला



पार्टी - भाजपा



साल 2019 में वोट मिले - 48,450
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