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गंभीर बीमारियों के साथ पैदा हुए 33 बच्चों को स्वास्थ्य विभाग ने दी जिंदगी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Nov 2021 12:30 AM IST
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Health department gave life to 33 children born with serious diseases
फतेहाबाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम बच्चों की जांच करती। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। जन्म दोष विकार के साथ पैदा हुए 33 बच्चों को स्वास्थ्य विभाग नई जिंदगी चुका है। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त इन बच्चों के जयपुर, हिसार, चंडीगढ़ में निशुल्क ऑपरेशन करवाए गए है। इसमें दिल में छेद जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त बच्चे भी शामिल है, जो कि मोबाइल हेल्थ टीम की स्क्रीनिंग में सामने आए थे।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत होने वाली स्क्रीनिंग में स्वास्थ्य विभाग जन्म दोष विकार से ग्रस्त बच्चों के छोटे से लेकर बड़े ऑपरेशन निशुल्क करवाया रहा है। इस साल विभाग जन्म दोष विकार के साथ पैदा हुए 33 बच्चों का इलाज करवा चुका है। इनमें से दिल में छेद से ग्रस्त 12 बच्चों के ऑपरेशन करवाए गए है। यहां तक कि टेडे-मेढ़े पैरों के साथ पैदा हुए 4 बच्चों को भी ऑपरेशन के बाद अब किसी सहारे की जरूरत नहीं है। इसके अलावा सात बच्चों के रेटिनो पैथी प्री मैच्योरटी व चार बच्चों के बहरेपन का उपचार करवाया गया है। इसके अलावा छह अन्य बच्चों का भी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उपचार करवाया है।
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रेटिनो पैथी प्री मैच्योरटी से ग्रस्त बच्चों को मिली रोशनी :
रेटिनो पैथी ऑफ प्री मैच्चोरिटी के साथ पैदा हुए सात बच्चों की आंखों को रोशनी मिली है। समय से पहले डिलिवरी होने पर बच्चों की आंखें पूरी नहीं बन पाती है और बच्चा अंधा हो जाता है। रेटिनो पैथी ऑफ प्री मैच्योरिटी के तह सात बच्चों का स्वास्थ्य विभाग ने चंडीगढ़ पीजीआई में ऑपरेशन करवाया है।
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राजस्थान में हुआ चार बच्चों के बहरेपन का उपचार :
बहरापन से ग्रस्त 4 बच्चों का निशुल्क इलाज राजस्थान के गंगानगर में करवाया है। जन्म के दौरान कई बच्चों के होठ कटे फटे होते हैं। जिले में इस बार 6 बच्चों का स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उपचार करवाया है। इसके अलावा कमर में फोड़ा होने पर एक बच्चे तथा आंखों में मोतियाबिंद होने पर एक बच्चे का ऑपरेशन करवाया गया है।
अब स्क्रीनिंग में बच्चों की आंखों की नजर मिली कमजोर तो मिलेंगे चश्में
मोबाइल हेल्थ टीम स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों के आंखों की रोशनी की जांच करेगी। इस दौरान अगर बच्चे की आंखों की रोशनी कम मिलती है तो उसे चश्मा भी उपलब्ध करवाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने 125 बच्चों का चयन किया है, जिन्हें अब चश्में उपलब्ध करवाए जाएंगे।
निजी में पढ़ रहा है बच्चा तो भी मिलेगा लाभ :
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मोबाइल टीमें आंगनबाड़ी और सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती है। टीम को कोई बच्चा गंभीर बीमारी से ग्रस्त मिलता है तो उसे स्वास्थ्य विभाग के जिला आरंभिक स्वास्थ्य केंद्र में रेफर कर दिया जाता है। यहां पर डॉक्टरों की टीम बच्चों की जांच करती है और उसे उपचार के लिए पैनल में शामिल अस्पताल में रेफर करती है। अब कई बीमारियों में ऐसे बच्चों को भी लाभ मिलेगा, जो निजी स्कूल में पढ़ रहे। लेकिन परिवार बीपीएल श्रेणी में होना चाहिए। पहले सिर्फ सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को ही लाभ मिल रहा था।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 0 से 18 साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग स्वास्थ्य विभाग की टीम करती है। इस दौरान अगर कोई बच्चा गंभीर बीमारी से ग्रस्त मिलता है तो उसे जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र में रेफर किया जाता है। यहां पर टीम जांच करती है और बच्चे को उपचार के लिए पैनल में शामिल अस्पताल में रेफर करती है। जिले में इस कार्यक्रम के तहत सैकड़ों बच्चों को उपचार मिल चुका है।

डॉ. हिमांशु ठकराल, फिजियोथरेपिस्ट, जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र फतेहाबाद
स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दिल में छेद, पैर जुड़े हुए टेड-मेढ़े होना, रेटिनो पैथी ऑफ प्री मैच्योरिटी समेत गंभीर बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के ऑपरेशन करवाए गए है, इसका खर्च स्वास्थ्य विभाग द्वारा ही वहन किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें समय-समय पर स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती है।
- मेजर डॉ. शरद तुली, उप सिविल सर्जन
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