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Fatehabad News: फतेहाबाद हलके में 14 में से छह चुनाव जीती कांग्रेस, तीन बार इनेलो का विधायक बना
Mon, 16 Sep 2024 06:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 16 Sep 2024 06:48 AM IST
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कपिल शर्मा
फतेहाबाद। चौटाला परिवार के गढ़ सिरसा के साथ लगता जिला है फतेहाबाद, लेकिन यहां कांग्रेस सबसे अधिक बार चुनाव जीती है। पंजाब से अलग होकर हरियाणा बनने के बाद यहां हुए 14 चुनावों में छह कांग्रेस ने जीते हैं। तीन बार इनेलो का विधायक बना है, जबकि दो बार भाजपा को जीत मिली है। हरियाणा विकास पार्टी, जनता पार्टी एक-एक बार जीतने में सफल रही। एक बार निर्दलीय प्रत्याशी को लोगों ने अपना विधायक चुना है।
फतेहाबाद में पहले 15 साल तक कांग्रेस के ही विधायक बने। कांग्रेस को पहली बार 1977 में हार मिली। उस चुनाव में जनता पार्टी के हरफूल सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी लीलाकृष्ण चौधरी को मात्र 137 वोटों से हराया था। इसके बाद 1982 में फिर से कांग्रेस ने वापसी की। मगर अगली बार फिर कांग्रेस को हार मिली। 1987 में भाजपा का फतेहाबाद में खाता खुला। उस चुनाव में भाजपा के बलबीर सिंह चौधरी विधायक चुने गए। उन्होंने सीपीआईएम के पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया को 28,615 के बड़े अंतराल से हराया था। इस चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी लीलाकृष्ण चौधरी मात्र 9,679 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। संवाद
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1991 के बाद दो चुनाव फिर हारी कांग्रेस
साल 1991 के चुनाव में कांग्रेस से लीलाकृष्ण चौधरी विधायक चुने गए। उन्होंने सीपीआईएम के पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया को 5,208 वोटों से हराया था। इसके बाद फिर कांग्रेस को दो चुनावों में हार झेलनी पड़ी। 1996 के चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी से हरमिंद्र सिंह ने कांग्रेस के लीलाकृष्ण चौधरी को 18,121 वोटों से हराया था। इसके बाद 2000 के चुनाव में लीलाकृष्ण चौधरी इंडियन नेशनल लोकदल की टिकट पर मैदान में उतरे और 20,979 वोटों से जीतकर विधायक बने।
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पिछले 15 साल से जीत को तरस रही कांग्रेस
फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र से पिछले 15 साल से कांग्रेस जीत के लिए तरस रही है। साल 2005 में कांग्रेस की टिकट पर दुड़ाराम ही विधायक बने थे। उसके बाद से कांग्रेस तीन चुनाव हार चुकी है। साल 2009 में निर्दलीय प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा जीते जबकि 2014 में इनेलो की टिकट पर बलवान सिंह दौलतपुरिया विधायक बने। फिर 2019 के चुनाव में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए दुड़ाराम ने जीत हासिल की थी। विशेष बात यह है कि साल 2014 और 2019 के चुनाव में तो कांग्रेस मुकाबले में ही नहीं रही। 2014 में हजकां और इनेलो जबकि 2019 में भाजपा और जजपा में ही मुकाबला रहा।
अब तक ये रह चुके विधायक
साल 1967 - गोबिंद राय बतरा - कांग्रेस
1968 - पोखरराम गोदारा - कांग्रेस
1972 - पोखरराम गोदारा - कांग्रेस
1977 - हरफूल सिंह - जनता पार्टी
1982 - गोबिंद राय बतरा - कांग्रेस
1987 - बलबीर चौधरी - भाजपा
1991 - लीलाकृष्ण चौधरी - कांग्रेस
1996 - हरमिंद्र सिंह - हरियाणा विकास पार्टी
2000 - लीलाकृष्ण चौधरी - इनेलो
2002 - स्वतंत्र बाला चौधरी - इनेलो (उपचुनाव)
2005 - दुड़ाराम - कांग्रेस
2009 - प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा - निर्दलीय
2014 - बलवान सिंह दौलतपुरिया - इनेलो
2019 - दुड़ाराम - भाजपा
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फतेहाबाद। चौटाला परिवार के गढ़ सिरसा के साथ लगता जिला है फतेहाबाद, लेकिन यहां कांग्रेस सबसे अधिक बार चुनाव जीती है। पंजाब से अलग होकर हरियाणा बनने के बाद यहां हुए 14 चुनावों में छह कांग्रेस ने जीते हैं। तीन बार इनेलो का विधायक बना है, जबकि दो बार भाजपा को जीत मिली है। हरियाणा विकास पार्टी, जनता पार्टी एक-एक बार जीतने में सफल रही। एक बार निर्दलीय प्रत्याशी को लोगों ने अपना विधायक चुना है।
फतेहाबाद में पहले 15 साल तक कांग्रेस के ही विधायक बने। कांग्रेस को पहली बार 1977 में हार मिली। उस चुनाव में जनता पार्टी के हरफूल सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी लीलाकृष्ण चौधरी को मात्र 137 वोटों से हराया था। इसके बाद 1982 में फिर से कांग्रेस ने वापसी की। मगर अगली बार फिर कांग्रेस को हार मिली। 1987 में भाजपा का फतेहाबाद में खाता खुला। उस चुनाव में भाजपा के बलबीर सिंह चौधरी विधायक चुने गए। उन्होंने सीपीआईएम के पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया को 28,615 के बड़े अंतराल से हराया था। इस चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी लीलाकृष्ण चौधरी मात्र 9,679 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। संवाद
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1991 के बाद दो चुनाव फिर हारी कांग्रेस
साल 1991 के चुनाव में कांग्रेस से लीलाकृष्ण चौधरी विधायक चुने गए। उन्होंने सीपीआईएम के पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया को 5,208 वोटों से हराया था। इसके बाद फिर कांग्रेस को दो चुनावों में हार झेलनी पड़ी। 1996 के चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी से हरमिंद्र सिंह ने कांग्रेस के लीलाकृष्ण चौधरी को 18,121 वोटों से हराया था। इसके बाद 2000 के चुनाव में लीलाकृष्ण चौधरी इंडियन नेशनल लोकदल की टिकट पर मैदान में उतरे और 20,979 वोटों से जीतकर विधायक बने।
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पिछले 15 साल से जीत को तरस रही कांग्रेस
फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र से पिछले 15 साल से कांग्रेस जीत के लिए तरस रही है। साल 2005 में कांग्रेस की टिकट पर दुड़ाराम ही विधायक बने थे। उसके बाद से कांग्रेस तीन चुनाव हार चुकी है। साल 2009 में निर्दलीय प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा जीते जबकि 2014 में इनेलो की टिकट पर बलवान सिंह दौलतपुरिया विधायक बने। फिर 2019 के चुनाव में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए दुड़ाराम ने जीत हासिल की थी। विशेष बात यह है कि साल 2014 और 2019 के चुनाव में तो कांग्रेस मुकाबले में ही नहीं रही। 2014 में हजकां और इनेलो जबकि 2019 में भाजपा और जजपा में ही मुकाबला रहा।
अब तक ये रह चुके विधायक
साल 1967 - गोबिंद राय बतरा - कांग्रेस
1968 - पोखरराम गोदारा - कांग्रेस
1972 - पोखरराम गोदारा - कांग्रेस
1977 - हरफूल सिंह - जनता पार्टी
1982 - गोबिंद राय बतरा - कांग्रेस
1987 - बलबीर चौधरी - भाजपा
1991 - लीलाकृष्ण चौधरी - कांग्रेस
1996 - हरमिंद्र सिंह - हरियाणा विकास पार्टी
2000 - लीलाकृष्ण चौधरी - इनेलो
2002 - स्वतंत्र बाला चौधरी - इनेलो (उपचुनाव)
2005 - दुड़ाराम - कांग्रेस
2009 - प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा - निर्दलीय
2014 - बलवान सिंह दौलतपुरिया - इनेलो
2019 - दुड़ाराम - भाजपा