फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   Harappan era: Round terracotta cakes were used to make rotis.

हड़प्पा युग : रोटियां बनाने के लिए प्रयोग करते थे गोलाकार टेराकोटा केक

Sat, 09 Dec 2023 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 09 Dec 2023 11:28 PM IST
विज्ञापन
Harappan era: Round terracotta cakes were used to make rotis.
फतेहाबाद के कुनाल गांव में मिली हड़प्पा साइट की बस्ती व वर्कशॉप क्षेत्र की फाइल फोटो।
फतेहाबाद। फतेहाबाद के गांव कुनाल में चल रही आठवीं बार की खोदाई में हड़प्पा काल के कुछ ऐसे उपकरण भी निकले हैं, जो उस समय के लोगों की इंजीनियरिंग को दर्शाता है। यह लोग रोटियां पकाने के लिए टेराकोटा केक का प्रयोग करते थे, जिससे तापमान भी व्यवस्थित रहता था और रोटियां जलती नहीं थी। यही नहीं पहले बस्ती में आग लगने के कारण यहां के लोग एकबारगी इस स्थान को छोड़ गए थे, लेकिन बाद में दोबारा आकर नई बस्ती बसाई।
विज्ञापन


फतेहाबाद के भूना खंड का गांव कुनाल हड़प्पा पूर्व व हड़प्पा काल की यादों को संजोए हुए है। यहां पर चार एकड़ के भूभाग में बने मिट्टी के टीले पर हड़प्पा काल से संबंधित अनेक अवशेष प्राप्त हो रहे हैं। उनके व्यापार व कृषि से संबंधित अनेक अवशेष यहां मिल चुके हैं। यहां पर खोदाई के दौरान टेराकोटा केक के अवशेष मिले हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह टेराकोटा केक काफी सख्त हैं और इनको नदी से निकली मिट्टी से पकाया गया था। पुरातत्व विभाग की भाषा में इन गोलाकार उपकरणों को टेराकोटा केक बोलते हैं। इस केक के माध्यम से रोटियां बनाई जाती थी। इस केक के साथ गूंथे हुए आटे को चिपकाकर आग पर रख दिया जाता था, वहीं यह केक आग पर तापमान को संतुलित रखता था, जिससे रोटी जलती नहीं थी। इसी केक से रोटी को गोल आकार भी दिया जाता था।
विज्ञापन



आग लगने के बाद एक बार खाली हो गई थी बस्ती
पुरातत्व विभाग के अनुसार, करीब छह हजार साल पहले यहां पर बसी बस्ती में एक बार आग भी लग गई थी। जिस कारण यहां के लोग विस्थापित हो गए थे। इसके बाद फिर से उस सभ्यता के लोगों ने बस्ती बसाई और कृषि के साथ व्यापार भी करने लगे। सरस्वती नदी नजदीक होने के कारण इस क्षेत्र में अनाज की कोई कमी नहीं थी। साथ ही उनका व्यापार भी काफी फल-फूल गया था। यहां पर बाद में बड़ी-बड़ी भट्ठियां बनाई गई और उसके साथ ही बड़ा चूल्हा लगाया गया था, ताकि आग के सेंक से भट्ठियां सुलग सकें और वह मिट्टी के बर्तन व मनकों का निर्माण कर सकें। मिट्टी के बर्तनों पर उनकी कारीगरी भी काफी अलग प्रकार की है। वह हर बर्तन पर आड़ी तिरछी लगाकर डिजाइन देते थे। उनके द्वारा निर्मित आभूषण, मिट्टी के बर्तन व मनके आज भी सुरक्षित हैं, जो उस समय की कुशल कारीगरी को दर्शाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन



गांव कुनाल में हड़प्पा काल का सबसे अच्छा व व्यापारिक दौर था। यहां पर खोदाई का कार्य शुरू कर दिया गया है, जो तीन माह तक चलेगा। यहां पर हड़प्पा काल के और भी राज खुलने अभी बाकी हैं।
-डॉ. बुनानी भट्टाचार्य, उपनिदेशक, पुरातत्व विभाग, हरियाणा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed