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Fatehabad News: खुशी से झूमी दादी बोलीं- मन्नतों के बाद मिला दिलखुश
Wed, 07 Jan 2026 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 07 Jan 2026 11:01 PM IST
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ढाणी भोजराज में ़10 बेटियों के बाद बेटा होने पर परिवार खुशी मनाते हुए
फतेहाबाद/भूना। ढाणी भोजराज गांव में संजय का परिवार खुशियों से सराबोर है। वजह यह है कि शादी के पूरे 19 साल और 10 बेटियों के जन्म के बाद 11वीं संतान के रूप में बेटे का जन्म हुआ है। बेटे के जन्म ने सभी दिलों को खुश कर दिया तो परिवार ने नाम भी दिलखुश रख दिया है। पोते के जन्म से खुश नजर आ रही दादी माया देवी बोलीं कि काफी मन्नतों के बाद घर में दिलखुश हुआ है।
दिलखुश के ढाणी भोजराज पहुंचने पर परिवार ने गांव में लड्डू बांटे। यही नहीं महिलाओं ने मंगलगीत गाए और पापा संजय, दादी माया देवी और बहनें बुधवार को खूब नाची और खुशी मनाई। पिता संजय और माता सुनीता ने कहा कि बेटियों के लिए प्यार पहले जैसा ही बना रहेगा। उन्हें स्कूल में पढ़ा रहे हैं और कामयाब बनाना है।
सबसे बड़ी बहन सरीना ने कहा कि उनके पास मोबाइल पर पापा का फोन आया कि सरप्राइज है, जब वीडियो देखी तो यकीन हो गया और खुशी से आंखों में आंसू आ गए कि उन्हें भी एक भाई मिल गया। वहीं गांव की सरपंच ज्योति देवी ने दंपत्ती को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि संजय और सुनीता कन्या भ्रूण हत्या करने वालों के लिए एक प्रेरणादायक हैं। भले ही बेटी की चाह में उनके 10 बेटियां हो गईं पर उन्होंने कभी कन्या भ्रूण हत्या के बारे में नहीं सोचा।
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10 बेटियों के बाद हुआ बेटा
ढाणी भोजराज निवासी संजय और उनकी पत्नी सुनीता की शादी को 19 साल हो चुके हैं। शादी के बाद से ही उन्हें बेटे की चाह थी, लेकिन समय के साथ उनके घर 10 बेटियों ने जन्म लिया। इसके बावजूद संजय और सुनीता ने कभी बेटियों के साथ भेदभाव नहीं किया। संजय का कहना है कि उन्होंने अपनी सभी बेटियों को बेटों के समान ही पाला-पोसा और पढ़ाया। आज उनकी सबसे बड़ी बेटी 18 साल की है और 12वीं कक्षा में पढ़ रही है। हैरानी की बात यह है कि 11वीं डिलीवरी भी पूरी तरह नॉर्मल हुई। संजय ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी की डिलीवरी घर से करीब 50 किलोमीटर दूर एक जींद जिले के निजी अस्पताल में करवाई। जन्म के समय बच्चे में खून की कमी पाई गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत खून चढ़ाया। अब मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
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एक बेटी को दिया हुआ है गोद
संजय की मां माया देवी पोते के जन्म से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि भगवान ने उनकी वर्षों की मन्नत पूरी कर दी। संजय के पिता कपूर सिंह, जो लोक निर्माण विभाग में बेलदार के पद पर कार्यरत थे, उनका पहले ही निधन हो चुका है। परिवार की जिम्मेदारियां लंबे समय से संजय के कंधों पर हैं। संजय ने बताया कि एक बेटी रिश्तेदारी में गोद दी गई है, जबकि बाकी 9 बेटियों की जिम्मेदारी वह खुद निभा रहे हैं। उनका कहना है कि बेटियां भी किसी से कम नहीं होतीं और वह चाहते हैं कि उनकी सभी बेटियां पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें।
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दिलखुश के ढाणी भोजराज पहुंचने पर परिवार ने गांव में लड्डू बांटे। यही नहीं महिलाओं ने मंगलगीत गाए और पापा संजय, दादी माया देवी और बहनें बुधवार को खूब नाची और खुशी मनाई। पिता संजय और माता सुनीता ने कहा कि बेटियों के लिए प्यार पहले जैसा ही बना रहेगा। उन्हें स्कूल में पढ़ा रहे हैं और कामयाब बनाना है।
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सबसे बड़ी बहन सरीना ने कहा कि उनके पास मोबाइल पर पापा का फोन आया कि सरप्राइज है, जब वीडियो देखी तो यकीन हो गया और खुशी से आंखों में आंसू आ गए कि उन्हें भी एक भाई मिल गया। वहीं गांव की सरपंच ज्योति देवी ने दंपत्ती को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि संजय और सुनीता कन्या भ्रूण हत्या करने वालों के लिए एक प्रेरणादायक हैं। भले ही बेटी की चाह में उनके 10 बेटियां हो गईं पर उन्होंने कभी कन्या भ्रूण हत्या के बारे में नहीं सोचा।
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10 बेटियों के बाद हुआ बेटा
ढाणी भोजराज निवासी संजय और उनकी पत्नी सुनीता की शादी को 19 साल हो चुके हैं। शादी के बाद से ही उन्हें बेटे की चाह थी, लेकिन समय के साथ उनके घर 10 बेटियों ने जन्म लिया। इसके बावजूद संजय और सुनीता ने कभी बेटियों के साथ भेदभाव नहीं किया। संजय का कहना है कि उन्होंने अपनी सभी बेटियों को बेटों के समान ही पाला-पोसा और पढ़ाया। आज उनकी सबसे बड़ी बेटी 18 साल की है और 12वीं कक्षा में पढ़ रही है। हैरानी की बात यह है कि 11वीं डिलीवरी भी पूरी तरह नॉर्मल हुई। संजय ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी की डिलीवरी घर से करीब 50 किलोमीटर दूर एक जींद जिले के निजी अस्पताल में करवाई। जन्म के समय बच्चे में खून की कमी पाई गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत खून चढ़ाया। अब मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
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एक बेटी को दिया हुआ है गोद
संजय की मां माया देवी पोते के जन्म से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि भगवान ने उनकी वर्षों की मन्नत पूरी कर दी। संजय के पिता कपूर सिंह, जो लोक निर्माण विभाग में बेलदार के पद पर कार्यरत थे, उनका पहले ही निधन हो चुका है। परिवार की जिम्मेदारियां लंबे समय से संजय के कंधों पर हैं। संजय ने बताया कि एक बेटी रिश्तेदारी में गोद दी गई है, जबकि बाकी 9 बेटियों की जिम्मेदारी वह खुद निभा रहे हैं। उनका कहना है कि बेटियां भी किसी से कम नहीं होतीं और वह चाहते हैं कि उनकी सभी बेटियां पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें।

ढाणी भोजराज में ़10 बेटियों के बाद बेटा होने पर परिवार खुशी मनाते हुए