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Fatehabad News: धान खरीद से पहले मिलिंग पर सरकार और राइस मिलर्स आमने-सामने

Sat, 26 Sep 2026 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 26 Sep 2026 11:18 PM IST
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Government and rice millers at loggerheads over milling ahead of paddy procurement
फतेहाबाद। पुरानी अनाज मंडी में आई धान की फसल। संवाद
फतेहाबाद। धान खरीद शुरू होने में करीब एक सप्ताह शेष है। इससे पहले ही मिलिंग को लेकर सरकार और राइस मिलर्स आमने-सामने आ गए हैं। जिले की करीब 300 राइस मिलों में अब तक सिर्फ चार ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। मिलर्स ने मांगें पूरी नहीं होने तक मिलिंग से दूरी बनाने की चेतावनी दी है।
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राइस मिलर्स की मुख्य आपत्ति पिछले साल का सीएमआर पूरी तरह नहीं उठने और बकाया भुगतान अटकने को लेकर है। मिलर्स का कहना है कि पुराना चावल नहीं उठने से नई मिलिंग व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं नई नीति में एफडी राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किए जाने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई है।
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हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के अनुसार पिछले साल की मिलिंग का तैयार सीएमआर अभी तक पूरी तरह नहीं उठाया गया है। इसके चलते मिलर्स के पास नई मिलिंग के लिए जगह और व्यवस्था प्रभावित हो रही है। एसोसिएशन का कहना है कि पिछले सीजन की समस्याओं का समाधान किए बिना नए सीजन के लिए पंजीकरण और एग्रीमेंट का दबाव बनाया जा रहा है।
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मिलर्स ने नई नीति में एफडी राशि बढ़ाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार को नियमों में किए गए बदलाव पर पुनर्विचार करना चाहिए। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक पुराना सीएमआर नहीं उठता, बकाया भुगतान नहीं होता और नियमों में बदलाव नहीं किया जाता तब तक पंजीकरण और एग्रीमेंट नहीं किए जाएंगे।
मांगें पूरी नहीं होने पर राइस मिलर्स ने धान की मिलिंग के साथ पंजीकरण और एग्रीमेंट प्रक्रिया के बहिष्कार की चेतावनी दी है। मिलर्स ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती और पिछले सीजन की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता तब तक वे पंजीकरण और एग्रीमेंट प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे।
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पिछले साल 261 मिलों ने किया था काम

धान खरीद शुरू होने से पहले सरकार राइस मिलों से पोर्टल पर पंजीकरण करवाती है। सरकार की ओर से लागू की गई नई शर्ताें पर मिलर्स पंजीकरण न करवाकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। पिछले साल जिले में 261 मिलों ने धान मिलिंग का काम किया था। जिले में करीब 300 राइस मिलें हैं लेकिन इस बार अब तक केवल 4 मिलों ने ही पंजीकरण कराया है। एसोसिएशन का कहना है कि कम पंजीकरण इस बात का संकेत है कि मिलर्स मौजूदा व्यवस्था और नई नीति को लेकर संतुष्ट नहीं हैं।
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गोदामों में चावल पड़ा, मिलों में धान खराब होने का डर

मिलर्स के अनुसार पिछले सीजन का चावल समय पर नहीं उठने के कारण मिलों में धान की समस्या बनी हुई है। नए धान की आवक शुरू होने के साथ मिलों में स्टॉक रखने की चुनौती बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि धान और चावल के लंबे समय तक पड़े रहने से खराब होने का जोखिम रहता है। इसके अलावा गोदामों और मिलों में स्टॉक संभालने के लिए किराया, लेबर और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिलर्स का कहना है कि जब पुराना स्टॉक ही समय पर नहीं उठाया जा रहा है तो नए सीजन की मिलिंग शुरू करना उनके लिए मुश्किल होगा। एसोसिएशन ने सरकार से लंबित पिछले सीजन के मिलिंग मामलों का समाधान करने की मांग की है।

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एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
राइस मिल एसोसिएशन जिला प्रधान बजरंग गर्ग ने बताया कि एसोसिएशन की कुछ प्रमुख मांगे है कि पिछले साल का लंबित सीएमआर तत्काल उठाया जाए, एफसीआई और सरकारी स्तर पर पर्याप्त गोदाम स्पेस उपलब्ध कराया जाए। मिलिंग से जुड़े पुराने किराये, बकाया और अन्य बकायों का भुगतान किया जाए। एफडी की राशि 50 लाख से घटाकर पूर्व व्यवस्था के अनुसार 10 लाख रुपये की जाए। मिलिंग चार्ज बढ़ाकर 100 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
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