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सामान्य अस्पताल में अब सब कुछ होगा ‘नजरों’ के सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Mon, 08 Dec 2014 12:25 AM IST
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सामान्य अस्पताल में अब ओपीडी से लेकर अस्पताल के हर चप्पे-चप्पे पर तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों की नजर हो गई। अस्पताल में चोरी की घटनाएं व ओपीडी में डाक्टरों के साथ बढ़ रही घटनाओं के मद्देनजर सरकार ने फतेहाबाद और टोहाना के अस्पताल में कैमरे लगाने की मंजूरी दे दी है।
चंडीगढ़ में हुई बैठक में लिए गए निर्णय के बाद जल्द ही बजट आने के बाद अस्पताल में कैमरे लगाए जाने का काम शुरू हो जाएगा। अस्पताल में वीडियो कांफ्रेंसिंग हॉल भी बनाया जाएगा, जिसके बाद डाक्टर अस्पताल में बैठे ही अपनी गवाही दे सकेंगे। साथ ही उच्च अधिकारियों के साथ होने वाली मीटिंग में भाग लेने के लिए भी बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
2 साल से लटकी पड़ी थी फाइल:
सामान्य अस्पताल में सीसीटीवी कैमरों की जरूरत समझते हुए सीएमओ कार्यालय से चंडीगढ़ मुख्यालय में अप्रूवल के लिए लगभग दो साल पहले फाइल भेजी गई थी। लेकिन मुख्यालय में इस फाइल पर ग्रहण लग गया और अप्रूव्ल होकर नहीं लौटी।
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पिछले दिनों चंडीगढ़ मुख्यालय में हुई बैठक में अस्पतालों में हो रही घटनाओं को लेकर जब मुद्दा उठा तो उसमें फतेहाबाद तथा टोहाना के सामान्य अस्पताल में कैमरे लगाने की फाइल को मंजूरी दे दी गई, जिसके बाद इसी माह में बजट आते ही हर कोने में तीसरी आंख की नजर होगी।
बच्ची चोरी होने की घटना के बाद पुलिस को करनी पड़ी थी मशक्कत
सामान्य अस्पताल से तीन महीने पहले गांव नाढौड़ी की एक महिला ने बच्ची को चारी कर लिया था। उसे ढूंढने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।
उस समय भी सभी की जुबान पर एक ही बात थी कि अस्पताल में यदि कैमरे होते तो शायद नजर रखी जा सकती थी। जिसके बाद एसएमओ कार्यालय ने अपने स्तर पर कुछ मुख्य जगहों पर कैमरे लगवाए थे।
ओपीडी में भी लगेंगे कैमरे
अस्पताल की ओपीडी कक्ष में भी सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान है। ओपीडी में कैमरे लगने के बाद एक ओर जहां अस्पताल में डाक्टरों के साथ हो रही घटनाओं पर नजर होगी। वहीं अपने कक्ष में मस्ती मारने वाले डाक्टर भी कैमरे की नजर में रहेंगे।
डाक्टरों को केस की पैरवी में मिलेगी सहूलियत
सीसीटीवी कैमरे लगाने की मंजूरी के साथ फतेहाबाद के सीएमओ कार्यालय में विडियो कांफ्रेंसिंग हॉल को भी मंजूरी मिल गई है। पहले यह फाइल भी चंडीगढ़ मुख्यालय में पेंडिंग पड़ी थी। विडियो कांफ्रेंसिंग हॉल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि डाक्टरों को किसी केस की पैरवी के लिए कोर्ट में जाने की जरूरत नहीं होगी।
बल्कि वह वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही अपनी गवाही दे सकेंगे। वहीं समय-समय पर चंडीगढ़ मुख्यालय में होने वाली मीटिंग को अस्पताल के डाक्टर यहीं बैठे अटेंड कर सकेंगे।
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चंडीगढ़ में हुई बैठक में लिए गए निर्णय के बाद जल्द ही बजट आने के बाद अस्पताल में कैमरे लगाए जाने का काम शुरू हो जाएगा। अस्पताल में वीडियो कांफ्रेंसिंग हॉल भी बनाया जाएगा, जिसके बाद डाक्टर अस्पताल में बैठे ही अपनी गवाही दे सकेंगे। साथ ही उच्च अधिकारियों के साथ होने वाली मीटिंग में भाग लेने के लिए भी बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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2 साल से लटकी पड़ी थी फाइल:
सामान्य अस्पताल में सीसीटीवी कैमरों की जरूरत समझते हुए सीएमओ कार्यालय से चंडीगढ़ मुख्यालय में अप्रूवल के लिए लगभग दो साल पहले फाइल भेजी गई थी। लेकिन मुख्यालय में इस फाइल पर ग्रहण लग गया और अप्रूव्ल होकर नहीं लौटी।
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पिछले दिनों चंडीगढ़ मुख्यालय में हुई बैठक में अस्पतालों में हो रही घटनाओं को लेकर जब मुद्दा उठा तो उसमें फतेहाबाद तथा टोहाना के सामान्य अस्पताल में कैमरे लगाने की फाइल को मंजूरी दे दी गई, जिसके बाद इसी माह में बजट आते ही हर कोने में तीसरी आंख की नजर होगी।
बच्ची चोरी होने की घटना के बाद पुलिस को करनी पड़ी थी मशक्कत
सामान्य अस्पताल से तीन महीने पहले गांव नाढौड़ी की एक महिला ने बच्ची को चारी कर लिया था। उसे ढूंढने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।
उस समय भी सभी की जुबान पर एक ही बात थी कि अस्पताल में यदि कैमरे होते तो शायद नजर रखी जा सकती थी। जिसके बाद एसएमओ कार्यालय ने अपने स्तर पर कुछ मुख्य जगहों पर कैमरे लगवाए थे।
ओपीडी में भी लगेंगे कैमरे
अस्पताल की ओपीडी कक्ष में भी सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान है। ओपीडी में कैमरे लगने के बाद एक ओर जहां अस्पताल में डाक्टरों के साथ हो रही घटनाओं पर नजर होगी। वहीं अपने कक्ष में मस्ती मारने वाले डाक्टर भी कैमरे की नजर में रहेंगे।
डाक्टरों को केस की पैरवी में मिलेगी सहूलियत
सीसीटीवी कैमरे लगाने की मंजूरी के साथ फतेहाबाद के सीएमओ कार्यालय में विडियो कांफ्रेंसिंग हॉल को भी मंजूरी मिल गई है। पहले यह फाइल भी चंडीगढ़ मुख्यालय में पेंडिंग पड़ी थी। विडियो कांफ्रेंसिंग हॉल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि डाक्टरों को किसी केस की पैरवी के लिए कोर्ट में जाने की जरूरत नहीं होगी।
बल्कि वह वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही अपनी गवाही दे सकेंगे। वहीं समय-समय पर चंडीगढ़ मुख्यालय में होने वाली मीटिंग को अस्पताल के डाक्टर यहीं बैठे अटेंड कर सकेंगे।