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Fatehabad News: भट्टू कलां में धूमधाम से मनाया गया गणगौर पर्व, महिलाओं ने गाए मंगल गीत
Sat, 21 Mar 2026 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 21 Mar 2026 11:52 PM IST
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भट्टूकलां में प्राचीन हनुमान मंदिर कुएं पर गणगौर पूजा करते ग्रामीण। स्त्रोत : संवाद
भट्टू कलां। क्षेत्र में गणगौर पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। गांवों में इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा अर्चना की और मंगल गीत गाए। खासकर भट्टूकलां में महिलाएं गणगौर माता और ईशर (भगवान शिव) की पूजा कर ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा निकाली।
यात्रा भट्टूकलां के राजपूत परिवार के घर से शुरू होकर गांव के प्राचीन मंदिर स्थित कुएं तक गई। यहां पूजा के बाद महिलाओं ने मंगल गीत गाए और कुएं पर फेरों की रस्म अदा की। गांव के लोग गणगौर माता की पूजा करते हुए इस पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाते हैं। गणगौर पर्व चैत्र महीने में होली के 18 दिन बाद मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में राजपूत समाज और मारवाड़ी समुदाय के लोग राजस्थान और हरियाणा में इस पर्व को हर्षोल्लास से मनाते हैं।
इस दिन महिलाएं सोलह शृंगार करके गणगौर और भगवान शिव की पूजा करती हैं। वे अच्छे जीवनसाथी और पति की लंबी उम्र के लिए कामना करती हैं। घरों में मीठे पकवान, खासकर बाजरी और गेहूं के आटे से बने ढोकले बनाए जाते हैं। इन्हें भांप में पकाया जाता है। यह पर्व महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के सौहार्द का प्रतीक माना जाता है।
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यात्रा भट्टूकलां के राजपूत परिवार के घर से शुरू होकर गांव के प्राचीन मंदिर स्थित कुएं तक गई। यहां पूजा के बाद महिलाओं ने मंगल गीत गाए और कुएं पर फेरों की रस्म अदा की। गांव के लोग गणगौर माता की पूजा करते हुए इस पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाते हैं। गणगौर पर्व चैत्र महीने में होली के 18 दिन बाद मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में राजपूत समाज और मारवाड़ी समुदाय के लोग राजस्थान और हरियाणा में इस पर्व को हर्षोल्लास से मनाते हैं।
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इस दिन महिलाएं सोलह शृंगार करके गणगौर और भगवान शिव की पूजा करती हैं। वे अच्छे जीवनसाथी और पति की लंबी उम्र के लिए कामना करती हैं। घरों में मीठे पकवान, खासकर बाजरी और गेहूं के आटे से बने ढोकले बनाए जाते हैं। इन्हें भांप में पकाया जाता है। यह पर्व महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के सौहार्द का प्रतीक माना जाता है।
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