{"_id":"68b9d8393e143adcc70bb7ee","slug":"game-of-chaos-talents-are-losing-without-competition-fatehabad-news-c-21-hsr1019-702994-2025-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: अव्यवस्था का खेल... बिन मुकाबले के हार रहीं प्रतिभाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: अव्यवस्था का खेल... बिन मुकाबले के हार रहीं प्रतिभाएं
विज्ञापन
गांव हिजरावां कलां में जर्जर होती व्यायाम शाला व मैदान। ग्रामीण
फतेहाबाद। अभ्यास के पर्याप्त मैदान के अभाव और सरकार की तरफ से कोई प्रोत्साहन न मिलने के चलते जिला मुख्यालय से सटे कई गांवों में खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। कहीं मैदान हैं तो उनकी देखरेख के लिए कोई कर्मचारी नहीं है। कहीं तो खेलने की जगह ही नहीं है। अव्यवस्था के खेल में प्रतिभाएं बिना मुकाबला किए ही हार रही हैं।
ऐसी स्थिति में प्रतिभा निखारने के लिए युवा संघर्ष कर रहे हैं। इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। एक तरफ तो सरकार युवाओं को नशे से दूर रहकर खेलों की ओर जागरूक कर रही है लेकिन सुविधा के नाम पर काेई सुविधा नहीं दे रही है। जिन गांव में खेल का मैदान नहीं है उन्हें या तो दूसरे गांव में जाना पड़ता है या शहरों की ओर रुख करना पड़ता है ताकि वह अच्छी तैयारी कर सके।
-- --
बदहाली का शिकार बने खेल मैदान :
कई गांवों में तो खेल के मैदान हैं लेकिन उनकी हालत इतनी खराब है कि वहां खेलना खतरे से खाली नहीं है। कहीं मैदान में घास और झाड़ियां उग गई हैं तो कहीं मैदान की मिट्टी खुरदरी और उबड़-खाबड़ है। इन मैदानों की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी किसी भी विभाग के पास नहीं है। ऐसे में युवा मजबूरी में इन मैदानों का इस्तेमाल करते हैं। इससे चोट लगने का खतरा बना रहता है। कुछ गांवों में गांव से दो किलोमीटर दूर व्यायामशाला या मैदान बनाए गए है जहां कोई भी नहीं जा पाता।
विज्ञापन
-- -
शहर में आकर करते हैं तैयारी
गांव बरसीन, हिजरावां कलां व दौलतपुर के युवा खिलाड़ी सुरेश कुमार, दिनेश, नरेंद्र, पवन बिश्नोई, सुनील कुमार, राधेश्याम आदि ने बताया कि गांव में दौड़ सहित अन्य खेलों को लेकर कोई खास मैदान नहीं है। गांव की खाली पड़ी जगह पर ही युवा खुद श्रमदान करते हुए सफाई करते है। ताकि खाली पड़ी जगह पर खेल सकें। पंचायत को काफी बार मैदान के लिए कहा है लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
-- -
गांव बरसीन में इंडोर स्टेडियम के साथ सिंथेटिक ट्रैक बनाने का प्रस्ताव पास किया हुआ है। जल्द ही उस पर काम शुरू होगा। इससे बरसीन के अलावा आसपास के गांव के खिलाड़ियों को फायदा मिलेगा।
- सुमन खिचड़, चेयरपर्सन जिला परिषद, फतेहाबाद।
विज्ञापन
ऐसी स्थिति में प्रतिभा निखारने के लिए युवा संघर्ष कर रहे हैं। इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। एक तरफ तो सरकार युवाओं को नशे से दूर रहकर खेलों की ओर जागरूक कर रही है लेकिन सुविधा के नाम पर काेई सुविधा नहीं दे रही है। जिन गांव में खेल का मैदान नहीं है उन्हें या तो दूसरे गांव में जाना पड़ता है या शहरों की ओर रुख करना पड़ता है ताकि वह अच्छी तैयारी कर सके।
विज्ञापन
बदहाली का शिकार बने खेल मैदान :
कई गांवों में तो खेल के मैदान हैं लेकिन उनकी हालत इतनी खराब है कि वहां खेलना खतरे से खाली नहीं है। कहीं मैदान में घास और झाड़ियां उग गई हैं तो कहीं मैदान की मिट्टी खुरदरी और उबड़-खाबड़ है। इन मैदानों की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी किसी भी विभाग के पास नहीं है। ऐसे में युवा मजबूरी में इन मैदानों का इस्तेमाल करते हैं। इससे चोट लगने का खतरा बना रहता है। कुछ गांवों में गांव से दो किलोमीटर दूर व्यायामशाला या मैदान बनाए गए है जहां कोई भी नहीं जा पाता।
विज्ञापन
शहर में आकर करते हैं तैयारी
गांव बरसीन, हिजरावां कलां व दौलतपुर के युवा खिलाड़ी सुरेश कुमार, दिनेश, नरेंद्र, पवन बिश्नोई, सुनील कुमार, राधेश्याम आदि ने बताया कि गांव में दौड़ सहित अन्य खेलों को लेकर कोई खास मैदान नहीं है। गांव की खाली पड़ी जगह पर ही युवा खुद श्रमदान करते हुए सफाई करते है। ताकि खाली पड़ी जगह पर खेल सकें। पंचायत को काफी बार मैदान के लिए कहा है लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
गांव बरसीन में इंडोर स्टेडियम के साथ सिंथेटिक ट्रैक बनाने का प्रस्ताव पास किया हुआ है। जल्द ही उस पर काम शुरू होगा। इससे बरसीन के अलावा आसपास के गांव के खिलाड़ियों को फायदा मिलेगा।
- सुमन खिचड़, चेयरपर्सन जिला परिषद, फतेहाबाद।

गांव हिजरावां कलां में जर्जर होती व्यायाम शाला व मैदान। ग्रामीण