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Fatehabad News: अगले सप्ताह कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली
Sat, 17 Aug 2024 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 17 Aug 2024 11:28 PM IST
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देवेंद्र सिंह बबली, पूर्व मंत्री हरियाणा।
टोहाना (फतेहाबाद)। हरियाणा में विधानसभा चुनाव का ऐलान होते ही टोहाना के जजपा से विधायक एवं पूर्व पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली ने जननायक जनता पार्टी को अलविदा कह दिया है। बबली ने जजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय सिंह चौटाला को अपना इस्तीफा भेजा है। इस्तीफा के बाद देवेंद्र बबली ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि उन्होंने जननायक जनता पार्टी को अलविदा कह दिया है।
बबली ने कहा कि जिस समय जननायक जनता पार्टी में शामिल हुए थे, उस समय की परिस्थितियां कुछ और थी, अब परिस्थितियां कुछ और हैं और परिस्थितियों के अनुसार ही यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार में रहने के दौरान बीते पांच वर्षों में टोहाना की व्यवस्था बदलने का कार्य किया है और लोगों की सेवा की है। आने वाले समय में भी वह अपने कार्य को जारी रखेंगे। बबली ने कहा कि यह चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ेंगे क्योंकि टोहाना में पिछले पांच साल में विकास की गंगा बही है।
आगामी दिनों में कांग्रेस में जाने के कयास
बता दें कि पूर्व मंत्री ने देवेंद्र सिंह बबली ने अपने समर्थकों की बैठक लेकर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ देने का ऐलान किया था। इसके बाद टोहाना में सबसे अधिक वोटों से कांग्रेस की लोकसभा प्रत्याशी कुमारी सैलजा विजयी रही थीं। अब देवेंद्र बबली के कांग्रेस में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चाएं हैं कि अगले सप्ताह देवेंद्र बबली कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। कांग्रेस में जाने के सवाल के जवाब में बबली ने कहा कि बिल्कुल कांग्रेस में भी जा सकते हैं। जैसा उनके कार्यकर्ता व समर्थक कहेंगे, वह वैसा ही फैसला लेंगे।
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साल 2019 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिली तो जजपा की टिकट पर लड़ा चुनाव
साल 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी देवेंद्र सिंह बबली कांग्रेस से टिकट के प्रबल दावेदार थे। तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के वह बेहद खासमखास थे। मगर ऐन मौके पर उनके बजाय परमवीर सिंह को टोहाना से कांग्रेस की टिकट मिल गई। उस समय नई बनी जजपा पार्टी मजबूत उम्मीदवार तलाश रही थी। जजपा ने देवेंद्र बबली को टिकट देकर मैदान में उतार दिया। देवेंद्र बबली ने एक लाख से ज्यादा वोट लेकर तत्कालीन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला को 52 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। उसके बाद 28 दिसंबर 2021 को जजपा कोटे से देवेंद्र बबली को विकास एवं पंचायत विभाग देकर कैबिनेट मंत्री बनाया गया। मगर देवेंद्र बबली का पूरा मंत्री कार्यकाल विवादों में ही निपटा। पहले ई-टेंडरिंग के नाम पर सरपंचों और फिर किसानों के साथ उनका विवाद हुआ।
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बबली ने कहा कि जिस समय जननायक जनता पार्टी में शामिल हुए थे, उस समय की परिस्थितियां कुछ और थी, अब परिस्थितियां कुछ और हैं और परिस्थितियों के अनुसार ही यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार में रहने के दौरान बीते पांच वर्षों में टोहाना की व्यवस्था बदलने का कार्य किया है और लोगों की सेवा की है। आने वाले समय में भी वह अपने कार्य को जारी रखेंगे। बबली ने कहा कि यह चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ेंगे क्योंकि टोहाना में पिछले पांच साल में विकास की गंगा बही है।
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आगामी दिनों में कांग्रेस में जाने के कयास
बता दें कि पूर्व मंत्री ने देवेंद्र सिंह बबली ने अपने समर्थकों की बैठक लेकर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ देने का ऐलान किया था। इसके बाद टोहाना में सबसे अधिक वोटों से कांग्रेस की लोकसभा प्रत्याशी कुमारी सैलजा विजयी रही थीं। अब देवेंद्र बबली के कांग्रेस में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चाएं हैं कि अगले सप्ताह देवेंद्र बबली कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। कांग्रेस में जाने के सवाल के जवाब में बबली ने कहा कि बिल्कुल कांग्रेस में भी जा सकते हैं। जैसा उनके कार्यकर्ता व समर्थक कहेंगे, वह वैसा ही फैसला लेंगे।
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साल 2019 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिली तो जजपा की टिकट पर लड़ा चुनाव
साल 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी देवेंद्र सिंह बबली कांग्रेस से टिकट के प्रबल दावेदार थे। तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के वह बेहद खासमखास थे। मगर ऐन मौके पर उनके बजाय परमवीर सिंह को टोहाना से कांग्रेस की टिकट मिल गई। उस समय नई बनी जजपा पार्टी मजबूत उम्मीदवार तलाश रही थी। जजपा ने देवेंद्र बबली को टिकट देकर मैदान में उतार दिया। देवेंद्र बबली ने एक लाख से ज्यादा वोट लेकर तत्कालीन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला को 52 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। उसके बाद 28 दिसंबर 2021 को जजपा कोटे से देवेंद्र बबली को विकास एवं पंचायत विभाग देकर कैबिनेट मंत्री बनाया गया। मगर देवेंद्र बबली का पूरा मंत्री कार्यकाल विवादों में ही निपटा। पहले ई-टेंडरिंग के नाम पर सरपंचों और फिर किसानों के साथ उनका विवाद हुआ।