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Fatehabad News: 30 साल तक पिता ने काटे चक्कर, अब 3 साल से बेटा काट रहा, फिर भी नहीं मिला भीवां बस्ती का रिकॉर्ड

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 May 2023 11:41 PM IST
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For 30 years, the father was traveling, now the son has been traveling for 3 years, yet the record of Bhiwan Basti is not found.
लघु सचिवालय में जमीन का रिकॉर्ड लेने के लिए डीसी से मिलने आया अशोक नगर निवासी दयानंद। 
फतेहाबाद। सरकारी तंत्र के सामने आम आदमी किस तरह पिसता है, इसकी बानगी फतेहाबाद में देखने को मिली है। अपनी ही जमीन का रिकॉर्ड निकलवाने के लिए 30 साल तक पिता चक्कर काटता रहा और अब तीन साल से बेटा काट रहा है। मगर उन्हें आज तक रिकॉर्ड नहीं मिला है। रिकॉर्ड रूम के पटवारी से लेकर डीसी कार्यालय तक चक्कर काट लिए, फिर भी हाथ में रिकॉर्ड नहीं आया है।
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अशोक नगर निवासी दयानंद ने बताया कि पाकिस्तान से आए लोगों को जमीन अलॉट की गई थी। उन्हें भीवां बस्ती की करीब 300 एकड़ जमीन अलॉट हुई थी। उनके पिता के पास अलॉटमेंट पर्ची भी है। 30 साल से उसके पिता कृष्ण लाल साल 1952-53 और साल 1960-61 की जमीन की जमाबंदी की नकल का रिकॉर्ड मांगते रहे। अब वह कार्यालयों के चक्कर काटने में लगा हुआ है, लेकिन हर बार खाली हाथ लौटना पड़ता है। संवाद
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भीवां बस्ती की जगह पर ही बने हुए हैं सेक्टर और लघु सचिवालय
दिलचस्प बात यह है कि जिस भीवां बस्ती का रिकॉर्ड प्रशासन नहीं दे रहा है, उसी की जमीन पर सेक्टर 3, सेक्टर 10, सेक्टर 11, सब्जी मंडी, ऑटो मार्केट एरिया, पुलिस लाइन से लेकर लघु सचिवालय तक बना हुआ है। कुछ समय पहले निजी कंपनी द्वारा रिकॉर्ड स्कैन करवा कर ऑनलाइन भी किया गया। मगर वहां भी भीवां बस्ती का रिकॉर्ड नहीं मिला है।
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6 सीएम विंडो, 6 ही आरटीआई लगाई, कुछ नहीं हुआ

दयानंद ने बताया कि जब से हिसार से रिकॉर्ड फतेहाबाद आया है। तब से उसने जमीन का रिकॉर्ड निकलवाने के लिए छह बार सीएम विंडो और छह ही बार आरटीआई लगा दी है। डीसी से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत भेज दी है। मंडल आयुक्त कार्यालय तक में भी पत्र लिखे हैं, लेकिन हर जगह से निराशा ही मिली है।

2020 में हिसार से बक्सों में लाया गया था रिकॉर्ड
जिले की जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन करने के लिए हिसार से सारा रिकॉर्ड बक्सों में भरकर जुलाई 2020 में फतेहाबाद लाया गया था। रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों ने लिखित में दिया है कि सारे रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद साल 1952-53 और साल 1960-61 का भीवां बस्ती का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।


कोट
शिकायतकर्ता दयानंद मेरे से मिला था। यह पुराना रिकॉर्ड है और जिला बाद में बना था। फिर भी मामला मेरे संज्ञान में है और रिकॉर्ड निकलवाने के लिए निर्देश दे दिए हैं।

-मनदीप कौर, डीसी, फतेहाबाद
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