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हर साल लग रहे पांच लाख पौधे फिर भी घट रहा वन क्षेत्र

Sun, 21 Mar 2021 12:29 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 21 Mar 2021 12:29 AM IST
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Five lakh saplings are seen every year, yet the forest area is decreasing
पौधों को अनदेखा कर उनके ऊपर लगाई गई ग्रिल। - फोटो : Fatehabad
जिले में वन क्षेत्र लगातार घट रहा है। आंकड़ों के अनुसार तीन दशक पहले जिले में 23 प्रतिशत वन क्षेत्र था, लेकिन अब मात्र 0.85 वन क्षेत्र बचा है। दूसरी ओर वन विभाग दावा कर रहा है कि हर साल जिले में पांच लाख पौधे लगाए जा रहे हैं। सवाल उठता है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में पौधे हर साल लगाए जा रहे हैं तो वन क्षेत्र घट क्यों रहा है। दूसरी ओर विकास के नाम पर भी पेड़ काटने का सिलसिला जारी है। नई सड़कें बनाने, सड़कों को चौड़ा करने और शहरी विस्तार के नाम पर करीब 32 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं।
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शहरों में बन रही खूबसूरत इमारतों को देखकर लगता है कि चारों तरफ विकास हो रहा है। मगर खत्म होती हरियाली बताती है कि यह विकास पर्यावरण के लिए घातक है। बीते दस साल के आंकड़े बताते हैं कि विकास के नाम पर पर्यावरण के साथ बुरा बर्ताव हुआ है। लगातार पेड़ काटे गए। कई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अभी और भी पड़े कटेंगे। कहने को नए पौधे लगाकर क्षतिपूर्ति भी की गई। मगर एक पौधे को पेड़ बनने में कई साल लगते हैं। कुछ पेड़ किसानों ने खुद काट दिए। कई पेड़ सरकार ने कटवा दिए। अब तो शहरों में पेड़ों की जगह कंकरीट की दीवारें ही नजर आती हैं। चिंताजनक स्थिति है कि जिले का कुल क्षेत्रफल 2538 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से वन क्षेत्र सिर्फ 0.84 प्रतिशत रह गया है।
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फोरलेन निर्माण में काटे गए 7 हजार पेड़
वर्ष 2015 में दिल्ली से डबवाली तक फोरलेन बनाया गया। सिरसा व फतेहाबाद जिले में 120 किलोमीटर लंबी रोड से 39 हजार पेड़ काटे गए। फतेहाबाद के दायरे में 7 हजार 200 व सिरसा जिले में 32 हजार पेड़ काटे गए। इसी तरह मिनी बाईपास के निर्माण के दौरान हिसार रोड से सिरसा रोड तक 1300 पेड़ काटे गए थे। कई लिंक मार्ग चौड़े किए गए हैं। इस तरह अलग-अलग विकास परियोजनाओं के लिए दस साल में 32 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं।
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300 पेड़ और कटने की आशंका
हाल ही में बजट में एलान किया गया है कि पानीपत से भूना से रतिया होते हुए सरदूलगढ़ तक एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा। इसके लिए रोड चौड़ा किया जाएगा और पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी। इसके लिए जिले में 3000 पेड़ और कटने की आशंका है। इसी तरह भादरा से रतिया तक फिलहाल स्टेट हाईवे है। इसे जल्द ही नेशनल हाईवे बनाया जाएगा। ऐसे में इस रोड पर खड़े पेड़ों की भी बलि देनी पड़ सकती है।
एक पौधे पर होता है 200 रुपये खर्च
वन विभाग द्वारा लगाए गए एक पौधे पर करीब 200 रुपये खर्च आता है। विभाग इतने रुपये में पौधा लगाने के साथ उसकी तीन साल तक देखभाल भी करता है। प्रत्येक वर्ष पौधे लगाने पर दो से तीन करोड़ रुपये बजट आता है। इस बजट से नए पौधे लगाए जाने के साथ गत वर्ष लगाए पौधों में पानी की व्यवस्था की जाती है। इसके साथ ट्री गार्ड भी इस बजट के तहत लगते हैं। गत वर्ष वन विभाग ने जिले में साढ़े चार लाख पौधे लगाए। वहीं, करीब एक हजार ट्री गार्ड लगाए गए हैं।
जिले की स्थिति
कुल क्षेत्रफल : 2538 वर्ग किलोमीटर
सघन वन : 3 किलोमीटर
खुला वन क्षेत्र : 18 वर्ग किलोमीटर
कुल वन क्षेत्र : 21 वर्ग किलोमीटर
प्रतिशत: 0.84
खेतों में नहीं बचे पेड़, किसानों ने खुद काट दिए
तीन दशक पहले जिले में करीब 23 प्रतिशत वन क्षेत्र था। सरकारी पेड़ कम और किसानों के निजी पेड़ ज्यादा थे। मगर खेती को बेहतर बनाने के लिए किसानों ने पेड़ काट दिए। अब धान के क्षेत्र में पेड़ों की संख्या न के समान है। दूर तक मैदान नजर आते हैं। भट्टूकलां क्षेत्र में थोड़े बहुत पेड़ बचे हैं। आज वन क्षेत्र एक प्रतिशत भी नहीं है।

हर साल पांच लाख पौधे लगाता है विभाग : डीएफओ
वन विभाग जिले में हर साल करीब पांच लाख पौधे लगाता है। लाखों रुपये पौधों की देखरेख पर खर्च होते हैं। लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता की कमी के कारण पेड़ों को क्षति पहुंचती है। चूंकि विकास जरूरी है, इसलिए विभाग का प्रयास रहता है कि जितने पेड़ काटे जाते हैं, उससे कई गुना नए पौधे लगाए जाएं।
- राजेश माथुर, जिला वन अधिकारी।
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