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Fatehabad News: घर-घर कचरा उठान एजेंसी, सीएसआई पर प्राथमिकी दर्ज

Fri, 20 Feb 2026 10:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Fri, 20 Feb 2026 10:49 PM IST
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FIR lodged against door-to-door garbage collection agency, CSI
फतेहाबाद में एजेंसी कचरे का उठान करते हुए स्त्रोत लाइब्रेरी
फतेहाबाद। नगर परिषद प्रशासन पर डोर टू डोर कचरा उठान एजेंसी को बिल भुगतान में मेहरबानी बरतने का आरोप है। इसका खुलासा वीरवार को नगर निकाय के स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक और कार्यकारी अभियंता अंकित लोहान के बिलों के जांच के दौरान हुआ। इसकी की शिकायत पुलिस को दी गई है।
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आरोप है कि मुख्य सफाई निरीक्षक (सीएसआई) सतपाल सैनी पर सफाई का टेंडर लेने वाली फर्म को गैर वाजिब फायदा पहुंचाकर नगर परिषद के खाते से भुगतान का आरोप लगा है। आरोप है कि एजेंसी को पिछले साल दिसंबर माह का बिल शर्तों को अनदेखा करते हुए कर दिया गया। घरों के बाहर जो आरएफ आईडी लगाई गई है उसकी रिपोर्ट ही नहीं ली गई। एजेंसी के लापरवाही बरतने पर जुर्माना नही लगाया गया और अधिकारियों ने 17.20 लाख रुपये का भुगतान करने का आरोप है।
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इस मामले में नप ने वीरवार को ही पुलिस ने सफाई निरीक्षक सतपाल सैनी और सफाई का टेंडर लेने वाली फर्म मैसर्ज राधा कृष्ण कॉ-ऑपरेटिव लेबर सोसायटी लिमिटेड फर्म के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई है। जिले पुलिस के प्रवक्ता विनोद कुमार का कहना है कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं इस मामले के बाद नगर परिषद फिर से चर्चा में आ गया है। वजह ये है कि दिसंबर में नगर परिषद में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर हिमांशु रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
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गाड़ियां पूरी नहीं लगाई, स्कैनर की रिपोर्ट की अनदेखी

पुलिस को दी गई शिकायत में कार्यकारी अभियंता अंकित लोहान की ओर से आरोप लगाया गया है कि नगर परिषद में वेंडर को टेंडर में निर्धारित लिखित मापदंडों की अवहेलना करते हुए भुगतान किया गया है। लोहान की ओर से ये भी कहा गया है कि नियमानुसार काम सही ढंग से ना करने पर फर्म पर जुर्माना लगाना बनता था, लेकिन मुख्य सफाई निरीक्षक ने काफी कम जुर्माना लगाया। इससे सरकारी खजाने से गड़बड़ी की गई और सफाई फर्म को गैर वाजिब फायदा दिया गया। शहर में करीब 25 हजार प्रॉपर्टी है और यहां पर स्कैनर लगाए गए है लेकिन स्थिति यह है कि स्कैनर यानि आरएफ आईडी टूट चुके हैं। इसके अलावा एजेंसी ने गाड़ियां भी पूरी नहीं लगाई गई। सूत्रों का कहना है कि एजेंसी पर जहां डेढ़ से दो लाख का जुर्माना लगाकर बिल में कटौती की जानी थी वहीं सिर्फ 17.44 लाख के बिल में से सिर्फ 24 हजार रुपये की कटौती कर 17.20 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया।

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पांच साल के लिए दिया गया है ठेका

मुख्य सफाई निरीक्षक के अलावा नगर परिषद प्रशासन ने डोर टू डोर कचरा उठान का टेंडर लेने वाली फर्म के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। डोर टू डोर कचरा उठान के लिए नगर परिषद प्रशासन ने राधा कृष्ण सोसायटी को पांच साल के लिए शहर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए टेंडर दिया गया है। आरोप है कि फर्म ने शुरुआत में नियमों का पालन नहीं किया। फर्म के कर्मचारियों को घरों के बाहर लगी डिवाइस के जरिए स्कैन करके डेटा उपलब्ध करवाना था। लेकिन बिना पर्याप्त स्कैनर लगाए ही बिल क्लेम कर दिया गया और इसे पास भी कर दिया गया। जबकि नियमानुसार इसमें जुर्माना लगाते हुए कटौती की जानी थी।




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दो माह बाद फिर सुर्खियों में नगर परिषद

नगर परिषद कार्यालय में एसीबी ने कंप्यूटर ऑपरेटर हिमांशु को दिसंबर माह में रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। आरोप है कि बिल पास करने की एवज में ठेकेदार से रिश्वत की डिमांड की गई थी। मामले में नगर परिषद के कई अधिकारियों के नाम सामने आ चुका है हालांकि मामले की अभी जांच चल रही है। मामला अभी ठंडा ही हुआ था कि अब कचरा उठान एजेंसी के बिल भुगतान में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।
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