{"_id":"59077dfd4f1c1bcf3a442723","slug":"fathebad-doughter-bound-janjir-8-yaeras-fatehabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां के पास नहीं थे इलाज के पैसे, आठ साल से जंजीरों से बंधी है बेटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां के पास नहीं थे इलाज के पैसे, आठ साल से जंजीरों से बंधी है बेटी
ब्यूरो/अमर उजाला/फतेहाबाद
Updated Tue, 02 May 2017 12:04 AM IST
विज्ञापन
लड़की
- फोटो : bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
8 साल से एक किशोरी को उसके परिजनों ने बेड़ियों में में बांधकर रखा है। पूछने पर परिवार कह रहा है कि मजबूरी है साहब क्या करें। अपनी लाडली को बेड़ियों में जकड़ेंगे नहीं तो वह मानसिक रूप से असंतुलित है, किसी पर भी हमला कर सकती है। मां यह कहते हुए रो पड़ी। उसने कहा कि साहब हमारे पास इसके इलाज के लिए पैसे नहीं हैं नहीं तो हम इसका इलाज कब का करा चुके होते।
आलम ये है कि इस घर का गुजारा करने के लिए पिता की मौत के बाद उसकी मां और भाई को मजदूरी करके घर का गुजारा चलाना पड़ता है। ऐसे में लड़की की मां ने सरकार से बेटी के इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई है। वहीं इस बारे में एसडीएम ने कहा कि वे स्वास्थ्य विभाग व महिला एवं बाल विकास से बच्ची की रिपोर्ट लेकर हरसंभव मदद करेंगे।
बुखार के बाद बिगड़ गया संतुलन
मां ने बताया कि लगभग 8 साल पहले इस समय 16 वर्षीय लड़की निशा को बुखार हुआ। बुखार का इलाज करवाने का खर्च का इंतजाम करते-करते बेटी के पिता की मौत हो गई। हादसे के बाद लड़की अपना मानसिक संतुलन खो बैठी। पिता की मौत के बाद से घर पर रोटी का संकट पैदा हो गया और ऐसे में ईलाज के पैसे नहीं होने के कारण मजबूरन नाबालिग की ये हालात हो गई है। जद्दोजहद के बीच अब परिवार के पास दिमागी तौर पर कमजोर नाबालिग बेटी को जंजीरों में कैद रखने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। नाबालिग की मां कमलेश बताती है कि उसने अपनी बड़ी बेटी की जैसे तैसे शादी कर दी। बेटा भी मेहनत करके कमाता है पर उससे घर का गुजारा चलता है इलाज नहीं हो सकता।
विज्ञापन
क्या कहते हैं एसडीएम
एसडीएम सरजीत नैन ने कहा कि जंजीरों में बंधी लड़की के बारे में विभागीय रिपोर्ट तैयार करवाई जाएगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करके पीड़िता की हर संभव मदद की जाएगी।
विज्ञापन
आलम ये है कि इस घर का गुजारा करने के लिए पिता की मौत के बाद उसकी मां और भाई को मजदूरी करके घर का गुजारा चलाना पड़ता है। ऐसे में लड़की की मां ने सरकार से बेटी के इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई है। वहीं इस बारे में एसडीएम ने कहा कि वे स्वास्थ्य विभाग व महिला एवं बाल विकास से बच्ची की रिपोर्ट लेकर हरसंभव मदद करेंगे।
विज्ञापन
बुखार के बाद बिगड़ गया संतुलन
मां ने बताया कि लगभग 8 साल पहले इस समय 16 वर्षीय लड़की निशा को बुखार हुआ। बुखार का इलाज करवाने का खर्च का इंतजाम करते-करते बेटी के पिता की मौत हो गई। हादसे के बाद लड़की अपना मानसिक संतुलन खो बैठी। पिता की मौत के बाद से घर पर रोटी का संकट पैदा हो गया और ऐसे में ईलाज के पैसे नहीं होने के कारण मजबूरन नाबालिग की ये हालात हो गई है। जद्दोजहद के बीच अब परिवार के पास दिमागी तौर पर कमजोर नाबालिग बेटी को जंजीरों में कैद रखने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। नाबालिग की मां कमलेश बताती है कि उसने अपनी बड़ी बेटी की जैसे तैसे शादी कर दी। बेटा भी मेहनत करके कमाता है पर उससे घर का गुजारा चलता है इलाज नहीं हो सकता।
विज्ञापन
क्या कहते हैं एसडीएम
एसडीएम सरजीत नैन ने कहा कि जंजीरों में बंधी लड़की के बारे में विभागीय रिपोर्ट तैयार करवाई जाएगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करके पीड़िता की हर संभव मदद की जाएगी।