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ओलावृष्टि की मार : कृषि विभाग की रिपोर्ट में बराला के पैतृक गांव सहित 12 गांवों की फसल तबाह
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Wed, 01 Feb 2017 12:46 AM IST
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खेतों में ओला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पिछले दिनों हुई बारिश और ओलावृष्टि से टोहाना के करीब एक दर्जन गांवों में सरसों और गेहूं की फसल बिल्कुल नष्ट हो गई। हालांकि बीमा कंपनी और तहसील विभाग ने इसका अभी सर्वे नहीं किया लेकिन कृषि विभाग के आला अधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं कि इन गांवों में से 8 गांवों में काफी नुकसान हुआ है। बताया गया है कि यहां 70 से 80 फीसदी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। कृषि उपनिदेशक ने इस नुकसान की पुष्टि भी की है।
पिछले दिनों जिले भर में हुई बारिश से जहां फसलों को फायदा हुआ तो टोहाना उपमंडल के गांव गाजूवाला, नांगली, समैण, नन्हेड़ी, कन्हेड़ी, हंसेवाला, चितैण, भीमेवाला, बढईखेड़ा, कमालवाला, लोहाखेड़ा व डांगरा में 25 जनवरी की रात को ओलावृष्टि हुई। इनमें भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला का पैतृक गाव डांगरा भी है।
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भारी मात्रा में हुई ओलावृष्टि से किसानों की गेहूं व सरसों की फसल जमीन पर गिर गई। अगली सुबह फसलों की हालत देख किसानों ने टोहाना के उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. बलजीत सिंह को और फतेहाबाद कृषि उपनिदेशक बलवंत सहारण को शिकायत दी। किसानों ने शिकायत देकर बीमा कंपनी और सरकार से मुआवजे की मांग रखी है। सोमवार को कृषि अधिकारी इन गांवों में गए तो देखा कि यहां सरसों और गेहूं की फसल काफी खराब है।
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खराबे की सही स्थिति के लिए विभाग करेगा औपचारिक टीम का गठन
कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक टोहाना उपमंडल के जिन एक दर्जन गांवों में ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है उनमें गाजूवाला, नांगली, समैण, नन्हेड़ी, कन्हेड़ी, हंसेवाला, भीमेवाला और चितैण गांव ऐसे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इन गांवों में सरसों की फसल 70 से 80 फीसदी तबाह हो गई है जबकि गेहूं की फसल कम से कम पचास फीसदी तक नष्ट हुई है। जबकि बढ़ईखेड़ा, कमालवाला, लोहाखेड़ा और डांगरा में नुक्सान इन गांवों के मुकाबले कुछ कम है। हालांकि कृषि विभाग की टीम खराबे के लिए एक औपचारिक टीम का गठन करेगी जिसमें राजस्व विभाग से तहसीलदार, पटवारी, व कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।
पिछली फसल का अब तक नहीं मिला मुआवजा, इस बार भी आशंकित हैं किसान
इस बार ओलावृष्टि से जहां किसानों की रबी की फसल में गेहूं और सरसों की फसल बर्बाद हुई है वहीं पिछली बार खरीफ की फसल में नरमा और धान भी बारिश की भेंट चढ़ गई थी। मौके पर निरीक्षण के लिए पहुंचे किसान रामकिशन, सरूप सिंह आदि को जब कृषि विभाग के अधिकारियों ने बीमा कंपनी से मुआवजा मिलने की बात कही तो उनका कहना था कि पिछली बार का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है तो ऐसे में इस फसल का मुआवजा कैसे मिलेगा। किसानों की बात में दम भी है क्योंकि खरीफ की फसल के खराबे के समय 309 किसानों के खेतों की निरीक्षण रिपोर्ट कृषि विभाग ने बीमा कंपनी को भेजी थी। इसमें से अभी तक महज 53 किसानों की रिपोर्ट को ही उन्होंने सही माना और नुकसान की बात स्वीकार की है। इन किसानों को मुआवजा कब तक मिलेगा, इस बारे में अभी तक कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। ऐसे में इस बार के खराबे के लिए किसानों को पहले ही परेशानी महसूस हो रही है।
मैंने कृषि एक्सपर्ट से अपने स्तर पर इन गांवों में खेतों का निरीक्षण कराया है। सरसों की फसल 70 से 80 फीसदी खराब हो चुकी है और गेहूं की फसल अब तक की रिपोर्ट के मुताबिक 50 फीसदी खराब हुई है। हालांकि गेहूं की फसल में कुछ हद तक सुधार आने की संभावना है क्योंकि अभी तक दाना नहीं लगा। संयुक्त टीम एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजेगी।
-बलवंत सहारण, कृषि उपनिदेशक, फतेहाबाद।
टोहाना में ओलावृष्टि से प्रभावित फसल के लिए कृषि विभाग के उच्चाधिकारी खंड कृषि अधिकारी, तहसील विभाग और कंपनी के फील्ड अधिकारी की अगुवाई में एक टीम गठित की जाएगी। वो आंकलन करेगी कि किस गांव में, किस प्लॉट में किस फसल का कितना नुकसान हुआ है अथवा नहीं हुआ। इस रिपोर्ट के आधार पर अगली कार्यवाही की जाएगी। पिछला मुआवजा फरवरी तक मिल जाएगा।
-रवि दुबे, जिला मैनेजर, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, फतेहाबाद ।