{"_id":"5706aeed4f1c1b5c28c81183","slug":"fatehabad-news-hindi-news-education-fees-private-school-fatehabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैक डोर से 20 करोड़ वसूलेंगे निजी स्कूल संचालक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैक डोर से 20 करोड़ वसूलेंगे निजी स्कूल संचालक
अमित रूख्ााया/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Fri, 08 Apr 2016 12:37 AM IST
विज्ञापन
मुफ्त शिक्षा
- फोटो : file
मार्च का अंत आते-आते जहां विद्यार्थियों में अगली कक्षा में जाने की खुशी होती है, लेकिन उनके अभिभावकों में एक जाना-पहचाना डर अपना सिर उठाना शुरू कर देता है। यह डर है एडमिशन के समय होने वाले खर्चों का। पिछले दस सालों में स्कूलों के खर्चे इतने अनाप-शनाप तरीके से बढ़े हैं कि अप्रैल का महीना मानों अभिभावकों के रौंगटे खड़े कर देता है।
एक अनुमान के मुताबिक, सिर्फ इसी साल जिले के निजी स्कूल संचालक सिर्फ एनुअल फीस के साथ बैक डोर से तकरीबन 20 करोड़ से अधिक रकम वसूलेंगे। वह भी शिक्षा विभाग को सरेआम ठेंगा दिखाकर। दरअसल, शिक्षा विभाग ने बीते साल नए आदेश जारी कर निजी स्कूलों को पुराने विद्यार्थियों से दोबारा एडमिशन फीस लेने पर प्रतिबंध लगा दिया था। निजी स्कूलों का लगभग 85 प्रतिशत खर्च महज एडमिशन फीस से ही पूरा होने की बात कई निजी संचालक मानते हैं। ऐसे में एडमिशन फीस के विकल्प के रूप में एनुअल चार्ज आए हैं। इसी एनुअल चार्ज को बैकडोर के रूप में इस्तेमाल कर जिले के निजी स्कूल संचालक अब पैसा बनाते हैं।
बड़े स्कूल में औसतन पांच हजार तक देना पड़ता है एनुअल चार्ज
नाम नहीं छापने के आग्रह पर कुछ निजी स्कूल संचालकों ने इस बात को माना है कि जिले भर के लगभग सभी बड़े स्कूलों में प्रति विद्यार्थी कम से कम 5 हजार रुपये एनुअल चार्ज के रूप में लिया जाता है। शिक्षा विभाग के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में लगभग 78 हजार विद्यार्थी निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। खुद निजी स्कूल संचालकों के अनुसार इन 78 हजार में से महज 40 हजार विद्यार्थी हैं जो इस साल 5 हजार रुपये महज एनुअल चार्ज के रूप में देंगे। इसका कुल जोड़ 20 करोड़ रुपये बनता है। बाकी बचे 38 हजार विद्यार्थियों जोड़ दें तो यह आंकड़ा कहीं आगे बढ़ जाएगा।
विज्ञापन
134-ए : पिछले साल ढाई हजार सीटें रहीं खाली, इस बार आवेदन मात्र 1200
निजी स्कूल संचालक धारा 134-ए को लेकर सरकार पर निशाना साधते रहे हैं, लेकिन रिकार्ड के आंकड़े इस दिशा में भी गड़बड़ी की आशंका से इंकार नहीं करते। फतेहाबाद जिले में पिछले साल 134-ए के तहत मुफ्त शिक्षा देने के लिए कुल साढ़े 3 हजार से अधिक सीटें रिजर्व थीं। लेकिन उसमें से ढाई हजार सीटें तो भर ही नहीं पाई। इस बार तो हालात और भी गंभीर होते दिख रहे हैं। अभी तक धारा 134-ए के तहत मुफ्त शिक्षा पाने के लिए फतेहाबाद जिले में महज 1200 आवेदन आए हैं। शुक्रवार इसके आवेदन की अंतिम तिथि है। ऐसे में पिछले साल जितनी सीटें इस बार भी खाली रहेंगी, जिनसे एनुअल चार्ज वसूलने की गुंजाइश है।
सुविधाएं बढ़ी, लेकिन अनुपात में जमीन-आसमान का फर्क
बहुत से निजी स्कूलों में बच्चों के लिए सुविधाएं भी बढ़ी हैं। इनमें एसी क्लास रूम, स्मार्ट क्लासेज, स्पोकन इंग्लिश, एसाइनमेंट्स आदि शामिल हैं। हालांकि, एक बार सुविधा उपलब्ध करवाने के बाद तो उसका मेंटेंनेंस चार्ज ही बनता है। लेकिन, हर बार वही सुविधाएं दिखाकर बढ़ा हुआ एनुअल चार्ज वसूल किया जाता है।
स्टेशनरी-किताबें और स्कूल यूनिफार्म का कमीशन अलग
जिले के अधिकतर निजी स्कूल बुक स्टोर से सेटिंग करने में भी पीछे नहीं हैं। एडमिशन के बाद बच्चों को मिलने वाली किताबें-स्टेशनरी खरीदने के लिए दुकानें निश्चित हैं। हर जगह एनसीआरईटी की किताबें उपलब्ध नहीं होती तो उसका बोझ भी अभिभावकों की जेब पर ही पड़ता है। कई स्कूलों में विद्यार्थियों को स्कूल के नाम वाली स्टेशनरी खरीदने को भी कहा जाता है। ऐसी कापियां बाजार में मिलने वाली कापियों से महंगी मिलती हैं। इसके अलावा, विद्यार्थी स्कूल यूनिफार्म कहां से खरीदेगा, यह दुकान भी लगभग फिक्स होती है। हालांकि, सभी स्कूल इस प्रक्रिया को नहीं अपनाते।
निजी स्कूल इन मदों में से सरकार को देते हैं टैक्स
बाल कल्याण फंड
रेडक्रॉस फंड
स्पोर्ट्स फंड
बच्चे के भविष्य को देख शिकायत से बचते हैं अभिभावक
बता दें कि शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर रखे हैं कि अगर कोई स्कूल संचालक एडमिशन या अन्य खर्चों में बहुत ज्यादा फीस की मांग करे तो इसके खिलाफ शिकायत की जाए। लेकिन बच्चों के भविष्य के डर से कोई अभिभावक इसकी शिकायत नहीं करता।
स्कूलों को विभाग की ओर से आदेश जारी किए जाते हैं कि अगर उनकी तरफ से अनाप-शनाप फीस मांगी गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अभी तक ऐसी एक भी शिकायत नहीं आई है। कोई शिकायत आई तो अवश्य कार्रवाई की जाएगी। -दयानंद सिहाग, उपजिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद
इस तरह की सूचनाएं मिली हैं कि निजी स्कूलों में अनाप-शनाप फीसें वसूली जा रही हैं। इस बारे में शिकायत आते ही कार्रवाई करूंगा। इस बाबत शिक्षा विभाग को भी निर्देश दे दिए हैं। लोग भी आगे आएं और शिकायत करें।
जय किशन आभीर, एडीसी, फतेहाबाद
प्राइमरी से मिडिल, फिर हायर सेकेंडरी विंग में नया दाखिला लेने के लिए स्कूलों को विभाग से अनुमति मिली हुई है। हां, अगर कोई स्कूल संचालक प्रत्येक साल एडमिशन फीस लेते हैं तो यह गलत है। स्कूल संचालकों को अनाप-शनाप चार्जेज लेने से बचना चाहिए। एसोसिएशन की बैठक में भी इस बात को उठाया जाएगा। -शैलेन भास्कर, महासचिव, जिला प्राइवेट स्कूल संघ, फतेहाबाद
विज्ञापन
एक अनुमान के मुताबिक, सिर्फ इसी साल जिले के निजी स्कूल संचालक सिर्फ एनुअल फीस के साथ बैक डोर से तकरीबन 20 करोड़ से अधिक रकम वसूलेंगे। वह भी शिक्षा विभाग को सरेआम ठेंगा दिखाकर। दरअसल, शिक्षा विभाग ने बीते साल नए आदेश जारी कर निजी स्कूलों को पुराने विद्यार्थियों से दोबारा एडमिशन फीस लेने पर प्रतिबंध लगा दिया था। निजी स्कूलों का लगभग 85 प्रतिशत खर्च महज एडमिशन फीस से ही पूरा होने की बात कई निजी संचालक मानते हैं। ऐसे में एडमिशन फीस के विकल्प के रूप में एनुअल चार्ज आए हैं। इसी एनुअल चार्ज को बैकडोर के रूप में इस्तेमाल कर जिले के निजी स्कूल संचालक अब पैसा बनाते हैं।
विज्ञापन
बड़े स्कूल में औसतन पांच हजार तक देना पड़ता है एनुअल चार्ज
नाम नहीं छापने के आग्रह पर कुछ निजी स्कूल संचालकों ने इस बात को माना है कि जिले भर के लगभग सभी बड़े स्कूलों में प्रति विद्यार्थी कम से कम 5 हजार रुपये एनुअल चार्ज के रूप में लिया जाता है। शिक्षा विभाग के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में लगभग 78 हजार विद्यार्थी निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। खुद निजी स्कूल संचालकों के अनुसार इन 78 हजार में से महज 40 हजार विद्यार्थी हैं जो इस साल 5 हजार रुपये महज एनुअल चार्ज के रूप में देंगे। इसका कुल जोड़ 20 करोड़ रुपये बनता है। बाकी बचे 38 हजार विद्यार्थियों जोड़ दें तो यह आंकड़ा कहीं आगे बढ़ जाएगा।
विज्ञापन
134-ए : पिछले साल ढाई हजार सीटें रहीं खाली, इस बार आवेदन मात्र 1200
निजी स्कूल संचालक धारा 134-ए को लेकर सरकार पर निशाना साधते रहे हैं, लेकिन रिकार्ड के आंकड़े इस दिशा में भी गड़बड़ी की आशंका से इंकार नहीं करते। फतेहाबाद जिले में पिछले साल 134-ए के तहत मुफ्त शिक्षा देने के लिए कुल साढ़े 3 हजार से अधिक सीटें रिजर्व थीं। लेकिन उसमें से ढाई हजार सीटें तो भर ही नहीं पाई। इस बार तो हालात और भी गंभीर होते दिख रहे हैं। अभी तक धारा 134-ए के तहत मुफ्त शिक्षा पाने के लिए फतेहाबाद जिले में महज 1200 आवेदन आए हैं। शुक्रवार इसके आवेदन की अंतिम तिथि है। ऐसे में पिछले साल जितनी सीटें इस बार भी खाली रहेंगी, जिनसे एनुअल चार्ज वसूलने की गुंजाइश है।
सुविधाएं बढ़ी, लेकिन अनुपात में जमीन-आसमान का फर्क
बहुत से निजी स्कूलों में बच्चों के लिए सुविधाएं भी बढ़ी हैं। इनमें एसी क्लास रूम, स्मार्ट क्लासेज, स्पोकन इंग्लिश, एसाइनमेंट्स आदि शामिल हैं। हालांकि, एक बार सुविधा उपलब्ध करवाने के बाद तो उसका मेंटेंनेंस चार्ज ही बनता है। लेकिन, हर बार वही सुविधाएं दिखाकर बढ़ा हुआ एनुअल चार्ज वसूल किया जाता है।
स्टेशनरी-किताबें और स्कूल यूनिफार्म का कमीशन अलग
जिले के अधिकतर निजी स्कूल बुक स्टोर से सेटिंग करने में भी पीछे नहीं हैं। एडमिशन के बाद बच्चों को मिलने वाली किताबें-स्टेशनरी खरीदने के लिए दुकानें निश्चित हैं। हर जगह एनसीआरईटी की किताबें उपलब्ध नहीं होती तो उसका बोझ भी अभिभावकों की जेब पर ही पड़ता है। कई स्कूलों में विद्यार्थियों को स्कूल के नाम वाली स्टेशनरी खरीदने को भी कहा जाता है। ऐसी कापियां बाजार में मिलने वाली कापियों से महंगी मिलती हैं। इसके अलावा, विद्यार्थी स्कूल यूनिफार्म कहां से खरीदेगा, यह दुकान भी लगभग फिक्स होती है। हालांकि, सभी स्कूल इस प्रक्रिया को नहीं अपनाते।
निजी स्कूल इन मदों में से सरकार को देते हैं टैक्स
बाल कल्याण फंड
रेडक्रॉस फंड
स्पोर्ट्स फंड
बच्चे के भविष्य को देख शिकायत से बचते हैं अभिभावक
बता दें कि शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर रखे हैं कि अगर कोई स्कूल संचालक एडमिशन या अन्य खर्चों में बहुत ज्यादा फीस की मांग करे तो इसके खिलाफ शिकायत की जाए। लेकिन बच्चों के भविष्य के डर से कोई अभिभावक इसकी शिकायत नहीं करता।
स्कूलों को विभाग की ओर से आदेश जारी किए जाते हैं कि अगर उनकी तरफ से अनाप-शनाप फीस मांगी गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अभी तक ऐसी एक भी शिकायत नहीं आई है। कोई शिकायत आई तो अवश्य कार्रवाई की जाएगी। -दयानंद सिहाग, उपजिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद
इस तरह की सूचनाएं मिली हैं कि निजी स्कूलों में अनाप-शनाप फीसें वसूली जा रही हैं। इस बारे में शिकायत आते ही कार्रवाई करूंगा। इस बाबत शिक्षा विभाग को भी निर्देश दे दिए हैं। लोग भी आगे आएं और शिकायत करें।
जय किशन आभीर, एडीसी, फतेहाबाद
प्राइमरी से मिडिल, फिर हायर सेकेंडरी विंग में नया दाखिला लेने के लिए स्कूलों को विभाग से अनुमति मिली हुई है। हां, अगर कोई स्कूल संचालक प्रत्येक साल एडमिशन फीस लेते हैं तो यह गलत है। स्कूल संचालकों को अनाप-शनाप चार्जेज लेने से बचना चाहिए। एसोसिएशन की बैठक में भी इस बात को उठाया जाएगा। -शैलेन भास्कर, महासचिव, जिला प्राइवेट स्कूल संघ, फतेहाबाद